Kullu News: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में नाट्य उत्सव का दूसरा दिन, 'एक गोभक्त से भेंट' और 'द प्रपोजल' के मंचन ने दर्शकों को बांधा
Kullu News: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के उपलक्ष्य में कुल्लू दशहरा कमेटी द्वारा आयोजित नाट्य प्रस्तुतियों के दूसरे दिन अटल सदन कुल्लू के सभागार में दो उत्कृष्ट नाटकों का मंचन किया गया। रंगमंच के कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली अदाकारी और चुटीले संवादों से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। उत्सव के दूसरे दिन जहां पहली प्रस्तुति में व्यंग्य के जरिए समाज के पाखंड पर प्रहार किया गया, वहीं दूसरी प्रस्तुति में मानवीय स्वभाव और ईगो के टकराव से उपजे हास्य ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया।
सभागार में मौजूद कला और रंगमंच प्रेमियों ने दोनों ही नाटकों की प्रस्तुति और कलाकारों के अभिनय की मुक्तकंठ से सराहना की।
Kullu News: 'एक गोभक्त से भेंट' के जरिए पाखंड और दोहरे चरित्र पर तीखा कटाक्ष
सदन में पहली प्रस्तुति प्रसिद्ध व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई द्वारा रचित चर्चित व्यंग्य रचना "एक गोभक्त से भेंट" पर आधारित रही। रेनबो आर्ट एंड थिएटर क्लब के कलाकारों ने निर्देशक जीवानंद चौहान के कुशल निर्देशन में इसका सफल मंचन किया। यह नाटक धर्म, राजनीति और गौ-रक्षा के नाम पर समाज में फैले पाखंड, दिखावे और दोहरे चरित्र को बेहद तीखे व तार्किक अंदाज में बेनकाब करता है।
रेलवे स्टेशन पर एक तथाकथित 'स्वामी जी' से लेखक की भेंट के प्रसंग के माध्यम से यह दर्शाया गया कि कैसे आस्था और जीव-दया की आड़ में निजी स्वार्थ साधे जाते हैं। नाटक में जतिन कुमार, अक्षिता, हितिया, अभिनव, दीपांकुर, साइना, रानिका, इशिता और महिंदर सिंह सहित अन्य कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
एंटन चेखोव के विश्वविख्यात नाटक 'द प्रपोजल' का सफल रूपांतरण
नाट्य संध्या की दूसरी प्रस्तुति मन्नत कला मंच के कलाकारों द्वारा रूसी नाटककार एंटन चेखोव के विश्वविख्यात नाटक "द प्रपोजल" की रही, जिसका निर्देशन नवनीत भारद्वाज ने किया। नाटक का ताना-बाना एक ऐसे पिता और उसकी 28 वर्षीय अविवाहित बेटी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो किसी भी तरह शादी के बंधन में बंधना चाहते हैं। लेकिन उनके अड़ियल और अजीबोगरीब व्यवहार के कारण बात नहीं बन पाती।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब एक परिचित युवक शादी का प्रस्ताव लेकर उनके घर पहुंचता है। युवक का स्वभाव भी कुछ वैसा ही बेढंगा होता है। शादी की बात आगे बढ़ने के बजाय जमीन और कुत्तों जैसे मामूली मुद्दों पर बहस में बदल जाती है और ईगो की जंग शुरू हो जाती है। इस तकरार से मंच पर कई हास्य प्रसंग उत्पन्न होते हैं, हालांकि तमाम नोकझोंक के बाद अंततः विवाह का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है।
कलाकारों की टोली ने बिखेरे अभिनय के रंग
'द प्रपोजल' नाटक में नवनीत भारद्वाज, हेमा, हरीश, अशोक, गोपाल, विनय, चंपा और अलीशा ने विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत किया। नाटक में मान चंद का पार्श्व संगीत और हितेश भार्गव की सटीक प्रकाश व्यवस्था ने मंचन को और अधिक प्रभावी बना दिया। अटल सदन में उपस्थित दर्शकों ने दोनों ही प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और कलाकारों की हौसला अफजाई की।
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