Nishad Kumar: एशियाई पैरा खेलों में रचा इतिहास, ऊंची कूद में नया रिकॉर्ड बनाकर जीता दूसरा गोल्ड
AI सारांश
- नागोया एशियाई पैरा खेलों में निषाद कुमार ने ऊंची कूद टी-47 में 2.04 मीटर का नया गेम्स रिकॉर्ड बनाकर जीता दूसरा स्वर्ण।
- इससे पहले लंबी कूद स्पर्धा के पदार्पण में 7.11 मीटर छलांग लगाकर हासिल किया था पहला गोल्ड।
- टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक के रजत पदक विजेता हैं ऊना जिले के बदाऊं गांव के निवासी निषाद।
Nishad Kumar: जापान के आइची नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेलों में हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के पैरा एथलीट निषाद कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया है। बदाऊं गांव के रहने वाले 27 वर्षीय निषाद ने मंगलवार को पुरुषों की ऊंची कूद टी-47 स्पर्धा में 2.04 मीटर की स्वर्णिम छलांग लगाकर नया एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
निषाद ने मुकाबले की शुरुआत से ही जबर्दस्त लय दिखाई और 1.88 मीटर, 1.94 मीटर, 1.98 मीटर व 2.02 मीटर की ऊंचाई को अपने पहले ही प्रयास में सफलतापूर्वक पार कर लिया। इसके बाद 2.04 मीटर की ऊंचाई पार कर उन्होंने स्वर्ण पदक पक्का किया। हालांकि बाद में 2.06 मीटर की छलांग लगाने के प्रयास में वे सफल नहीं हो सके, लेकिन उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय अभियान को नई ऊर्जा दी है।
Nishad Kumar: सोमवार को भी लंबी कूद में जीता था गोल्ड
इससे पहले सोमवार को नागोया में ही पुरुषों की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में उतरे निषाद कुमार ने 7.11 मीटर की छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया था। ऊंची कूद के विशेषज्ञ माने जाने वाले निषाद ने पहली बार किसी बड़े मंच पर लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा लिया और पदार्पण में ही स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इस स्पर्धा में भी वे विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर काबिज हैं।
माता-पिता के कड़े संघर्ष और त्याग ने संवारे निषाद के सपने
निषाद की इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे उनके परिवार का कड़ा संघर्ष और त्याग छिपा है। बेटे के खेल प्रशिक्षण और पौष्टिक खुराक में कोई कमी न आए, इसके लिए किसान पिता रछपाल सिंह ने दिन-रात अतिरिक्त मेहनत कर खेत में सब्जियां उगाईं। वहीं उनकी माता पुष्पा देवी ने घर पर मवेशी पालकर और दूध बेचकर बेटे के सपनों को पंख दिए।
महज 2,500 रुपये लेकर पंचकूला पहुंचे थे खेल का हुनर तराशने
बचपन में एक हादसे के दौरान हाथ कट जाने के बावजूद निषाद ने कभी हिम्मत नहीं हारी और सामान्य वर्ग के एथलीटों से प्रतिस्पर्धा कर राज्य स्तर पर पहला स्थान पाया। वर्ष 2017 में वे महज 2,500 रुपये की सीमित राशि लेकर पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचे, जहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। इसके बाद वर्ष 2019 में बंगलूरू कैंप में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा।
टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में रजत पदक, अर्जुन पुरस्कार से हो चुके हैं सम्मानित
वर्ष 2019 में दुबई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा था। इसके बाद 2021 में दुबई में एशियाई रिकॉर्ड बनाया और टोक्यो पैरालंपिक 2021 व पेरिस पैरालंपिक 2024 में देश के लिए दो बार रजत पदक जीते। खेल क्षेत्र में उनके इस उत्कृष्ट योगदान और निरंतर प्रदर्शन के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है।
घर से निकलते समय लिया था दो स्वर्ण पदक
जीतकर लौटने का संकल्प
निषाद की इस दोहरी स्वर्णिम जीत के बाद उनके पैतृक गांव बदाऊं में जश्न का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। मां पुष्पा देवी और बहन रमा देवी ने खुशी साझा करते हुए बताया कि जब निषाद नागोया के लिए रवाना हो रहे थे, तो उन्होंने घर से निकलते वक्त ही देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीतकर लौटने का पक्का संकल्प लिया था।
अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के बावजूद पक्की नौकरी नहीं, मां ने लगाई गुहार
मां पुष्पा देवी ने दर्द साझा करते हुए कहा कि पैरालंपिक में दो पदक, विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण और अब एशियाई खेलों में दोहरे स्वर्ण के बावजूद केंद्र या प्रदेश सरकार ने उन्हें कोई पक्की सरकारी नौकरी नहीं दी है। देश का मान बढ़ाने वाले बेटे को आज भी सुरक्षित भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से मांग की है कि निषाद की उपलब्धियों के अनुरूप उन्हें अविलंब उच्च पद पर सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।
सीएम सुक्खू ने दी बधाई, बताया देश का गौरव
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पैरा एथलीट निषाद कुमार को उनकी इस ऐतिहासिक स्वर्णिम सफलता पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि निषाद की यह उपलब्धि न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए अत्यधिक गर्व का विषय है। उन्होंने निषाद को उनके उज्ज्वल भविष्य और आगामी प्रतियोगिताओं के लिए भी शुभकामनाएं दीं।
संघर्ष और जज्बे की मिसाल, युवाओं को नई प्रेरणा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने निषाद के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो मानते हैं कि दिव्यांगता सफलता की राह में बाधा बन सकती है। उन्होंने कहा कि निषाद के अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छाशक्ति ने यह साबित किया है कि सच्ची लगन से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि वे आगे भी नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे।
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