छौहारा की कविता शर्मा ने लिखी ग्रामीण उद्यमिता की नई इबारत, 20 लीटर से शुरू कर 800 लीटर दूध प्रसंस्करण तक पहुंचाया कारोबार
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के विकास खंड छौहारा के थाना (जांगला) गांव की निवासी कविता शर्मा ने अपनी मेहनत, मजबूत इच्छाशक्ति और उद्यमशीलता के दम पर एक मिसाल कायम की है। वर्ष 2025 में महज 20 लीटर प्रतिदिन दूध के प्रसंस्करण से शुरू हुई उनकी छोटी सी डेयरी इकाई आज करीब 800 लीटर प्रतिदिन दूध का प्रसंस्करण कर रही है। वर्तमान में इस आधुनिक इकाई में शुद्ध घी, पनीर, दही और मक्खन जैसे उत्पाद तैयार कर स्थानीय बाजारों में सप्लाई किए जा रहे हैं।
कविता शर्मा का यह सफल उद्यम आज उनके परिवार के लिए सम्मानजनक आजीविका का साधन बनने के साथ-साथ क्षेत्र की 100 से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों के लिए नियमित आय का मुख्य जरिया बन चुका है। राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीतियों, स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिले अनुभव और केंद्र सरकार की मदद से उन्होंने सीमित संसाधनों में शुरू किए गए एक छोटे प्रयास को बड़े और लाभदायक व्यवसाय में तब्दील कर दिया है।
स्वयं सहायता समूह और सरस मेलों ने प्रदान की व्यावहारिक समझ
कविता शर्मा वर्ष 2020 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। समूह के माध्यम से उन्हें दिल्ली हाट, अंतरराष्ट्रीय शिमला समर फेस्टिवल और विभिन्न राज्यों में आयोजित सरस मेलों में अपने स्टॉल लगाने का अवसर मिला। ग्राहकों से सीधे संवाद के जरिए उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, मांग और मार्केटिंग की व्यावहारिक समझ हासिल हुई, जिससे उनमें अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास पैदा हुआ।
PMFME से मिली 7 लाख रुपये की वित्तीय सहायता, स्थापित हुई आधुनिक मशीनरी
अपने अनुभव को धरातल पर उतारते हुए कविता शर्मा ने अक्टूबर 2025 में एसएचजी नंदला के सहयोग से दुग्ध प्रसंस्करण इकाई की नींव रखी। सीमित बजट के कारण शुरुआत में प्रतिदिन केवल 20 लीटर दूध ही प्रसंस्कृत हो पाता था। व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) योजना के तहत 7 लाख रुपये की वित्तीय मदद मिली, जिससे उन्होंने बीएमसी, पाश्चराइजर, होमोजेनाइजर, वैक्यूम पैकेजिंग और क्रीम सेपरेटर जैसी आधुनिक मशीनरी स्थापित की।
11 महीनों में 800 लीटर क्षमता, 70 लाख रुपये पहुंचा वार्षिक टर्नओवर
आधुनिक तकनीक और पाश्चराइजेशन सुविधाओं के बल पर इकाई का तेजी से विस्तार हुआ। महज 11 महीनों के भीतर सितंबर 2026 तक प्रसंस्करण क्षमता 20 लीटर से बढ़कर 800 लीटर प्रतिदिन पहुंच गई। कविता शर्मा ने स्वयं रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल के बाजारों में जाकर दुकानदारों से संपर्क साधा और अपने ब्रांड की आपूर्ति सुनिश्चित की। वर्तमान में उनकी इस प्रसंस्करण इकाई का अनुमानित वार्षिक कारोबार लगभग 70 लाख रुपये के स्तर तक पहुंच गया है।
100 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को मिला नियमित बाजार
कविता शर्मा की इस सफलता का सबसे बड़ा सामाजिक पहलू स्थानीय महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण है। आसपास के गांवों की 100 से अधिक पशुपालक महिलाएं रोजाना इस इकाई को दूध सप्लाई कर रही हैं, जिन्हें हर महीने सामूहिक रूप से लगभग 7 लाख रुपये का सीधे भुगतान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त इकाई में दो स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।
ग्रामीण महिला सशक्तीकरण को मिल रही गति
कविता शर्मा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी नीतियों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और PMFME योजना को दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए दिए जा रहे अवसरों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। आने वाले समय में वे अपनी प्रोसेसिंग यूनिट की क्षमता को और बढ़ाएंगी ताकि बाजार की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
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