28 अक्तूबर 2026 का पंचांग: कार्तिक कृष्ण तृतीया व वरीयान योग में बुध कृपा, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और गणेश-विष्णु पूजन का विशेष उपाय
28 October 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज बुधवार का दिन है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु और बुध देव को समर्पित होता है। आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है (जो भोर 04:07 बजे से प्रारंभ हो चुकी है)। आज के दिन कृतिका उपरांत रोहिणी नक्षत्र तथा वरीयान योग का शुभ प्रभाव रहेगा। कार्तिक मास के पावन दिनों में बुधवार के दिन गणेश जी और भगवान विष्णु की संयुक्त आराधना करने से बुद्धि, विद्या और व्यापार में आ रही समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
ज्योतिषाचार्य मणि पुरोहित (Mani Purohit) द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग आपको आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास एवं पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देता है। पंचांग के अनुसार शुभ दिन, शुभ तारीख और शुभ समय पर कार्य आरंभ करने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो देखिए आज का पंचांग और जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त, और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल।
28 October 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत- कार्तिक, अमांत- आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: तृतीया (संपूर्ण दिन-रात, 29 अक्तूबर तड़के 01:06 बजे तक), उपरांत चतुर्थी तिथि आरंभ।
दिन: बुधवार।
नक्षत्र: कृत्तिका (दोपहर 01:26 बजे तक), उपरांत रोहिणी नक्षत्र।
योग: व्यतीपात (प्रातः 07:18 बजे तक), उपरांत वरीयान योग।
करण: वणिज (दोपहर 02:37 बजे तक), उपरांत विष्टि (भद्रा) करण।
प्रविष्टे: 12 कार्तिक
ऋतु: वैदिक ऋतु - शरद, द्रिक ऋतु - हेमंत।
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
सूर्योदय: प्रातः 06:37 बजे।
सूर्यास्त: सायं 05:32 बजे।
चन्द्रोदय: सायं 07:01 बजे (28 अक्तूबर)।
चन्द्रास्त: प्रातः 10:07 बजे (29 अक्तूबर)।
चन्द्र राशि: चंद्रमा संपूर्ण दिन-रात वृषभ राशि पर संचार करेगा।
सूर्य राशि: सूर्य देव तुला राशि में विराजमान हैं।
28 अक्तूबर 2026 के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:01 से 05:49 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: बुधवार को सामान्यतः अभिजीत मान्य नहीं होता (शुभ कार्यों हेतु विजय व अमृत काल श्रेष्ठ हैं)।
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:56 से 02:41 बजे तक।
अमृत काल: पूर्वाह्न 10:35 से दोपहर 12:04 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 05:32 से 05:57 बजे तक।
28 अक्तूबर 2026: राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 12:04 से 01:27 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: प्रातः 07:59 से 09:22 बजे तक।
कुलिक: पूर्वाह्न 10:44 से दोपहर 12:04 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: पूर्वाह्न 11:43 से दोपहर 12:27 बजे तक।
भद्रा: दोपहर 02:37 बजे से देर रात्रि 01:06 बजे तक (स्वर्ग की भद्रा, पृथ्वी पर दोषमुक्त)।
वर्ज्यम्: रात्रि 08:42 से 10:11 बजे तक।
28 अक्तूबर 2026 के प्रमुख व्रत और पर्व
कार्तिक कृष्ण तृतीया: कार्तिक मास का पावन स्नान, यम तर्पण व नियम पालन।
बुधवार व्रत एवं गणेश पूजन: विघ्नहर्ता गणेश जी को दूर्वा अर्पण एवं बुद्धि-व्यापार वृद्धि अनुष्ठान।
रोहिणी नक्षत्र प्रवेश: दोपहर 01:26 बजे से चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग।
कार्तिक दीपदान: सायंकाल तुलसी चौरा एवं देवालयों में दीप प्रज्वलन।
28 अक्तूबर 2026 के लिए विशेष उपाय (Special Remedy)
कार्तिक मास के बुधवार पर प्रातः स्नान के उपरांत प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को 21 दूर्वा दल और मोदक या बेसन के लड्डू अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले पुष्प चढ़ाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' अथवा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र की एक माला जपें। सायंकाल तुलसी के पौधे के समीप गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और सात बार परिक्रमा करें। आज के दिन हरी मूंग की दाल, हरी सब्जियां या हरे वस्त्र का जरूरतमंदों को दान करने तथा गाय को हरा चारा खिलाने से बुध ग्रह के दोष दूर होते हैं, व्यापार में उन्नति मिलती है और बुद्धि व वाणी में निखार आता है।
हरि ॐ
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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