एक था गधा उर्फ अलादाद खां: अपनी झूठी वाहवाही के लिए नवाब ने रचा गरीब के जनाजे का सियासी खेल
Himachal News: अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के सांस्कृतिक एवं नाट्य संध्याओं के तीसरे दिन अटल सदन कुल्लू में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन के कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से समां बांध दिया। प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर के कुशल निर्देशन में शरद जोशी द्वारा रचित सुप्रसिद्ध व्यंग्य नाटक "एक था गधा उर्फ अलादाद खां" का शानदार मंचन किया गया। कलाकारों के सधे हुए संवादों और चुटीले अभिनय ने दर्शकों को जहां हंसा-हंसाकर लोटपोट किया, वहीं सत्तालोलुपता और व्यवस्था की क्रूर सच्चाई से रूबरू कराकर उन्हें स्तब्ध भी कर दिया।
नाटक का कथानक एक ऐसे आत्ममुग्ध नवाब के इर्द-गिर्द घूमता है, जो हर वक्त सिर्फ अपनी झूठी प्रशंसा और वाहवाही सुनने का आदी है। सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए वह हर संभव पैंतरा आजमाता रहता है। इसी क्रम में उसे सूचना मिलती है कि अलादाद खां नाम के किसी गरीब और आम व्यक्ति की मौत हो गई है। अपनी छवि चमकाने और जनता का मसीहा बनने के लिए नवाब उस जनाजे में शामिल होने का ऐलान कर देता है और इस पूरे घटनाक्रम को भुनाने के लिए व्यापक मीडिया मैनेजमेंट करते हुए जनाजे के लाइव प्रसारण तक की व्यवस्था करवा देता है।

कुल्लू के अटल सदन में नाटक 'एक था गधा उर्फ अलादाद खां' का मंचन करते कलाकार।
सच उजागर होते ही शासन-प्रशासन में मचा भारी हड़कंप
जब सारी तैयारियां पूरी हो जाती हैं और शोहरत की स्क्रिप्ट तैयार होती है, तभी ऐन वक्त पर एक चौंकाने वाला मोड़ आता है। असल में किसी इंसान की नहीं, बल्कि एक धोबी के गधे की मौत हुई थी, जिसका नाम 'अलादाद खां' था। यह सच्चाई सामने आते ही नवाब और उसके चाटुकार प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच जाता है। अपनी झूठी साख, पद और चेहरे को जनता के सामने बेनकाब होने से बचाने के लिए सत्ता तंत्र एक बेहद क्रूर और अमानवीय साजिश रचता है।
इज्जत बचाने को जिंदा इंसान की बलि
अपनी नाक बचाने के लिए शासन के नुमाइंदे एक सीधे-सादे गरीब इंसान को पकड़ते हैं, उसकी हत्या कर दी जाती है और जबरन उसका जनाजा निकालकर तमाशा पूरा किया जाता है। व्यवस्था के इस स्याह सच को मंच पर उतारते हुए केहर सिंह ठाकुर, रेवत राम, परमानंद, शिवांगनी, सेजल, गीतांजलि, सोनिया, अनन्या, गौरव, आशु शर्मा, हनी नेगी, समृद्धि, आराध्या और सानवी ने अपने अभिनय का लोहा मनवाया। मंच पर सटीक प्रकाश व्यवस्था मीनाक्षी की रही, जबकि पार्श्व ध्वनि का प्रभावशाली संचालन जिया द्वारा किया गया।
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