18 अक्तूबर 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का विशेष उपाय
18 October 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज रविवार का दिन है। रविवार का दिन प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य देव (आदित्य) और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मां दुर्गा को समर्पित होता है। आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की महाअष्टमी (अष्टमी) तिथि है और शारदीय नवरात्रि का आठवां दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप 'माता महागौरी' की पूजा-अर्चना की जाती है। आज ही के दिन दुर्गा अष्टमी (महाअष्टमी), कन्या पूजन (कंचक पूजन), सुलभ महाष्टमी व्रत तथा सरस्वती पूजन का अत्यंत पवित्र महासंयोग है। रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देने तथा मां महागौरी की आराधना से साधकों के सभी पाप धुल जाते हैं, अक्षय पुण्य, अलौकिक सिद्धियां, मनवांछित फल तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य मणि पुरोहित (Mani Purohit) द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग आपको आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास एवं पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देता है। पंचांग के अनुसार शुभ दिन, शुभ तारीख और शुभ समय पर कार्य आरंभ करने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो देखिए आज का पंचांग और जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त, और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल।
18 October 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत- आश्विन, अमांत- आश्विन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: अष्टमी।
दिन: रविवार
नक्षत्र: उत्तराषाढा (दोपहर 01:28 बजे तक), उपरांत श्रवण नक्षत्र।
योग: सुकर्मा (शाम 06:12 बजे तक), उपरांत धृति योग।
करण: विष्टि/भद्रा (दोपहर 05:07 बजे तक), उपरांत बव करण।
प्रविष्टे: 02 कार्तिक
ऋतु: वैदिक ऋतु - शरद, द्रिक ऋतु - शरद
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
सूर्योदय: प्रातः 06:30 बजे
सूर्यास्त: सायं 05:43 बजे
चन्द्रोदय: दोपहर 12:48 बजे (18 अक्तूबर)
चन्द्रास्त: रात्रि 11:59 बजे (18 अक्तूबर)
चन्द्र राशि: चंद्रमा पूरे दिन-रात मकर राशि पर संचार करेगा।
सूर्य राशि: सूर्य देव तुला राशि में विराजमान हैं।
18 अक्तूबर 2026 के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:54 से 05:42 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से दोपहर 12:30 बजे तक।
अमृत काल: रात्रि 03:02 से 04:39 बजे तक (19 अक्तूबर)।
आनन्दादि योग: छत्र (दोपहर 01:28 बजे तक), उपरांत मित्र योग।
18
अक्तूबर 2026: राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: शाम 04:30 से 06:00 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 12:06 से 01:31 बजे तक।
कुलिक: दोपहर 02:55 से शाम 04:18 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: शाम 04:13 से 04:58 बजे तक।
वर्ज्यम्: प्रातः 09:34 से सुबह 11:12 बजे तक।
18 अक्तूबर 2026 के प्रमुख व्रत और पर्व
शारदीय नवरात्रि (महाअष्टमी / दुर्गा अष्टमी): मां दुर्गा के आठवें स्वरूप 'माता महागौरी' की विशेष पूजा-अर्चना और महागौरी पूजन।
कन्या पूजन (कंचक): महाअष्टमी पर छोटी कन्याओं (2 से 10 वर्ष) को भोजन, चुनरी एवं उपहार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त करने का महापर्व।
सरस्वती पूजन: नवरात्रि उत्सव के अंतर्गत माता सरस्वती का प्रधान पूजन।
रविवार व्रत एवं सूर्य देव पूजन: आरोग्य, तेज, यश और आत्मबल वृद्धि हेतु भगवान सूर्य नारायण का विशेष अर्घ्य एवं पूजन।
18 अक्तूबर 2026 के लिए विशेष उपाय (Special Remedy)
आज रविवार का दिन है और शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी तिथि का पावन महासंयोग है। प्रातः काल सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र के साथ भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके साथ ही नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी को नारियल, हलवा, पूरी और चने का भोग लगाएं तथा उनके सिद्ध मंत्र 'ॐ देवी महागौर्यै नमः' या 'या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः' का जाप करें। आज 2 से 10 वर्ष की नौ कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर उनके पैर धोएं, उन्हें पूरी, हलवा, काले चने का प्रसाद खिलाएं और सामर्थ्य अनुसार चुनरी व दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें। इस उपाय से माता महागौरी और सूर्य देव की कृपा से जीवन के समस्त पाप, कष्ट और दरिद्रता दूर होगी तथा सुख, समृद्धि, शांति और अक्षय संपत्ति की प्राप्ति होगी।
हरि ॐ
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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