India News: अमित शाह मानहानि मामले में राहुल गांधी बरी, सुल्तानपुर कोर्ट ने सुनाया फैसला
India News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आपराधिक मानहानि के एक बेहद चर्चित और पुराने मामले में अदालत से बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सोमवार को अंतिम सुनवाई पूरी करते हुए राहुल गांधी को सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया। यह पूरा विवाद वर्ष 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर दिए गए एक बयान से जुड़ा हुआ था। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट रूप से माना कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया बयान मानहानिकारक नहीं था।
अदालत द्वारा अंतिम निर्णय सुनाए जाने के दौरान राहुल गांधी स्वयं कोर्ट रूम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। मजिस्ट्रेट द्वारा बरी किए जाने का आदेश सुनाए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने खुशी जाहिर की और इसे सच्चाई की जीत करार दिया। इस न्यायिक निर्णय के साथ ही कांग्रेस नेता के खिलाफ वर्ष 2018 से चल रहे करीब 8 साल पुराने आपराधिक मानहानि मुकदमे का आधिकारिक रूप से पटाक्षेप हो गया है।
बेंगलुरु की चुनावी रैली में अमित शाह पर की गई टिप्पणी से शुरू हुआ था सियासी विवाद
इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी, जब बेंगलुरु में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर टिप्पणी की थी। उन्होंने अपने भाषण में अमित शाह को एक पुराने हत्या के मामले में आरोपी बताए जाने का उल्लेख किया था, जिसे लेकर भाजपा नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया था।
सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराया था मानहानि का मुकदमा
राहुल गांधी के इस बयान के विरोध में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को अदालत में आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल किया था। शिकायतकर्ता का तर्क था कि कांग्रेस नेता ने इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करके अमित शाह की सार्वजनिक प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गंभीर ठेस पहुंचाई है।
वॉयस सैंपल याचिका भी नहीं चढ़ सकी थी सिरे
मुकदमे की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उनके बयान को पूरे संदर्भ से काटकर पेश किया गया है और यह राजनीतिक आलोचना का हिस्सा था। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी के वॉयस सैंपल के मिलान को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी, लेकिन निचली अदालत से लेकर बाद की ऊपरी अदालतों तक शिकायतकर्ता को इस याचिका पर कोई राहत नहीं मिल सकी थी।
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