Panchakarma Treatment: सिरमौर में 89 आयुष केंद्रों से मजबूत हो रही पारंपरिक चिकित्सा, युवाओं को मिल रहा रोजगार
नाहन (सिरमौर): हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल के तहत जिला सिरमौर में आयुष विभाग द्वारा संचालित स्वास्थ्य संस्थानों में Panchakarma Treatment के माध्यम से नागरिकों को व्यापक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया जा रहा है। उपचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ युवाओं को पंचकर्म तकनीशियन का एक वर्षीय प्रशिक्षण देकर उनके कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं।
वर्तमान में जिला सिरमौर में आयुष सेवाओं का सुदृढ़ नेटवर्क कार्यरत है, जिसके तहत 89 स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इनमें 72 आयुष्मान आरोग्य संस्थान, 15 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र और दो प्रमुख आयुर्वेदिक अस्पताल शामिल हैं। इन केंद्रों पर उपलब्ध चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशिक्षित स्टाफ की देखरेख में मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म प्रक्रियाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
प्रमुख व्याधियों के निवारण में सहायक बन रहीं विभिन्न पंचकर्म विधियां
जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल सहित अन्य संबंधित केंद्रों पर जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती, कटी बस्ती, शिरोधारा, नस्य कर्म, स्नेहन, स्वेदन, अग्निकर्म, रक्तमोक्षण और मर्म चिकित्सा जैसी विशिष्ट प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। जोड़ों के दर्द, जकड़न, गर्दन और कमर से जुड़ी समस्याओं के प्रबंधन में इन पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त मानसिक तनाव, अनिद्रा और सिरदर्द से पीड़ित मरीजों को शिरोधारा जैसी प्रक्रियाओं से उल्लेखनीय विश्राम और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो रहा है।
लाभार्थियों को मिला आराम, स्थानीय स्तर पर उपचार से बड़ी सुविधा
नाहन के गुन्नू घाट निवासी रंजीत सिंह ने बताया कि घुटनों के दर्द के चलते उन्होंने जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म उपचार करवाया, जिसके बाद उन्हें दर्द से राहत और शारीरिक हल्कापन महसूस हुआ। इसी प्रकार सिरदर्द और चक्कर आने की समस्या से परेशान नाहन निवासी सुनीधि अग्रवाल ने अस्पताल में शिरोधारा प्रक्रिया करवाई, जिससे उन्हें तनावमुक्त होने और स्थिति में सुधार का अनुभव हुआ। दोनों लाभार्थियों ने जिला स्तर पर ही यह पारंपरिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार का आभार जताया।
Panchakarma Treatment: प्रशिक्षण से युवाओं के लिए खुल रहीं रोजगार की राहें
पारंपरिक चिकित्सा को सशक्त करने के साथ आयुष विभाग युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण भी दे रहा है। पच्छाद क्षेत्र के क्वाकधार गांव की लवली तथा नाहन के बनेठी गांव की कृतिका पुंडीर और स्नेहा ठाकुर जैसे युवा एक वर्षीय पंचकर्म तकनीशियन पाठ्यक्रम (Panchakarma Treatment) कर रहे हैं। इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से उन्हें आयुष क्षेत्र में दक्षता हासिल हो रही है, जिससे भविष्य में उनके लिए सरकारी व निजी वेलनेस संस्थानों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
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