Shimla News: शिमला में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गई तीव्रता
Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और इसके आसपास के इलाकों में शनिवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, सुबह 4:36 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 दर्ज की गई।
भूकंप का केंद्र 31.298 N अक्षांश और 77.529 E देशांतर पर जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। तड़के आए इन झटकों के कारण कई लोग नींद से जाग गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल भूकंप के प्रभाव और किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
उत्तराखंड में आया था 4.9 तीव्रता का भूकंप
इससे पहले 6 अक्टूबर को भी उत्तर भारत के कई हिस्सों में भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, उस समय उत्तराखंड के चमोली में रात 10:22 बजे (IST) 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका असर दिल्ली-एनसीआर (NCR) क्षेत्र तक महसूस किया गया था।
जानिए हिमाचल प्रदेश में बड़े भूकंप के झटकों से हुआ नुकसान
4 अप्रैल 1905: कागड़ा (7.8 रिक्टर स्केल) 20 हजार लोगों की मौत।
1 जून 1945: चंबा (6.5 रिक्टर स्केल) आंकड़े उपलब्ध नहीं।
19 जनवरी 1975: किन्नौर (6.8 रिक्टर स्केल) 60 लोगों की मौत।
26 अप्रैल 1986: धर्मशाला (5.5 रिक्टर स्केल) 6 लोगों की मौत।
1 अप्रैल 1994: चंबा (4.5 रिक्टर स्केल) कई घरों को नुकसान।
24 मार्च 1995: चंबा (4.9 रिक्टर स्केल) कई घरों को नुकसान।
9 जुलाई 1997: सुंदरनगर (5.0 रिक्टर स्केल) एक हजार घरों को नुकसान।
कांगड़ा में 1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गईं थीं जानें
हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से सिस्मिक जोन चार और पांच में आता है। कांगड़ा, चंबा, लाहौल, कुल्लू और मंडी भूकंप की दृष्टि से सबसे अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। बता दें कि कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अल सुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से करीब एक लाख इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए थे।
जानिए कैसे आता है भूकंप?
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप के आने की मुख्य वजह धरती के अंदर प्लेटों का टकरना है। धरती के भीतर सात प्लेट्स होती हैं जो लगातार घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें किसी जगह पर आपस में टकराती हैं, तो वहां फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है और सतह के कोने मुड़ जाते हैं। सतह के कोने मुड़ने की वजह से वहां दबाव बनता है और प्लेट्स टूटने लगती हैं। इन प्लेट्स के टूटने से अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है, जिसकी वजह से धरती हिलती है और हम इसे भूकंप मानते हैं। इसके अलावा उल्का प्रभाव और ज्वालामुखी विस्फोट, माइन टेस्टिंग और न्यूक्लियर टेस्टिंग की वजह से भी भूकंप आते हैं।
रिक्टर स्केल क्या होता है
अमेरिकी भू-विज्ञानी चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर ने सन 1935 में एक ऐसे उपकरण का इजाद किया, जो पृथ्वी की सतह पर उठने वाली भूकंपीय तरंगों के वेग को माप सकता था। इस उपकरण के जरिए भूकंपीय तरंगों को आंकड़ों में परिवर्तित किया जा सकता है। रिक्टर स्केल आमतौर पर लॉगरिथम के अनुसार कार्य करता है। इसके अनुसार एक संपूर्ण अंक अपने मूल अर्थ के 10 गुना अर्थ में व्यक्त होता है। रिक्टर स्केल में 10 अधिकतम वेग को दर्शाता है।
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल (Earthquake Richter Scale) पर मापा जाता है। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके केंद्र (एपिसेंटर) से निकलने वाली ऊर्जा की तरंगों से लगाया जाता है। सैकड़ों किलोमीटर तक फैली इस लहर से कंपन होता है। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी (एनसीएस) भूकंप की तीव्रता मापने के लिए विशेष यंत्रों का इस्तेमाल करता है। आइए आपको बताते हैं कि कितने रिक्टर स्केल का भूकंप कितना विनाशकारी साबित हो सकता है।
जानिए भूकंप की किस तीव्रता में क्या होगा?
0 से 1.9: रिक्टर स्केल पर 0 से 1.9 जब भूकंप की तीव्रता होती है, तो सिर्फ सीज्मो ग्राफ पर ही ये दर्ज होता है। इस तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो कैटेगरी में रखा जाता है और यह भूकंप महसूस नहीं किए जाते। रिक्टर स्केल पर माइक्रो कैटेगरी के 8,000 भूकंप दुनियाभर में रोजाना दर्ज किए जाते हैं।
2 से 2.9: इस तीव्रता वाले भूकंप को माइनर कैटेगरी में रखा जाता है। इस तीव्रता का भूकंप का लोगों को बेहद हल्का कंपन महसूस होता है। इन भूकंप के झटको में इतनी क्षमता नहीं होती कि जानमाल का कोई नुकसान कर सकें। ऐसे 1,000 भूकंप प्रतिदिन आते हैं।
3 से 3.9: इस तीव्रता वाले भूकंप वेरी लाइट कैटेगरी के होते हैं, जो एक साल में 49,000 बार दर्ज किए जाते हैं। इसमें हल्के झटके महसूस होते हैं। ये झटके ऐसे होते हैं, जैसे कोई बड़ी गाड़ी बस या ट्रक आपके नजदीक से गुजरी हो। इन्हें महसूस तो किया जाता है, लेकिन इनसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
4 से 4.9: इस तीव्रता के भूकंप के लाइट कैटेगरी के होते हैं जो पूरी दुनिया में एक साल में करीब 6,200 बार रिक्टर स्केल पर दर्ज किए जाते हैं। इन झटकों को महसूस किया जाता है और इनसे घर के सामान हिलते नजर आते हैं। इस भूकंप से इमारतों को नुकसान हो सकता है। इमारत की खिड़कियां भी टूट सकती हैं। इसलिए लोगों को सर्तक रहने की सलाह दी जाती है।
5 से 5.9: इस तीव्रता के भूकंप से काफी नुकसान हो सकता है। इस दौरान घर में रखी भारी वस्तुएं जैसे फर्नीचर आदि हिलने लगता है। कमजोर इमारतों की दीवारों में दरारें भी आ सकती है।
6 से 6.9: अगर इस तीव्रता का भूकंप आता है, तो तेज कंपन महसूस होती है। इससे कच्चे घर ढह सकते हैं और कई इमारतों की भी नींव दरक सकती हैं। आमतौर पर दुनियाभर में प्रतिवर्ष ऐसे अधिकतम 200 भूकंप आते हैं।
7 से 7.9: इस स्केल के भूकंप में बहुत तीव्र कंपन महसूस होता है। इसे विनाशकारी भूकंप कहा जा सकता है, जिसमें जानमाल का काफी नुकसान होता है। इससे इमारतें गिर सकती हैं। सुनामी की आशंका भी इस दौरान जताई जाती है। गुजरात के भुज और नेपाल में भी इसी तीव्रता का भूकंप आया था।
8 से 8.9: इस दौरान पृथ्वीर की सतह इतनी तेज गति से हिलती है कि बड़े-बड़े पुल भी ढह सकते हैं। सुनामी आ सकती है। ऐसे में जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे भूकंप शहर के शहर तबाह कर देते हैं।
9 से 9.9: अगर इस तीव्रता का भूकंप आता है, तो पृथ्वी के बड़े हिस्सेह का नाश हो जाएगा। इस दौरान मैदानी धरती किसी खेत की तरह लहराती नजर आ सकती है। ऐसे प्रलय की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है।
10 रिक्टर स्केल: 10 तीव्रता का भूकंप बहुत ही विनाशकारी होगा, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। ऐसा भूकंप आने के बाद शायद ही कोई धरती पर जिंदा बचे। भूकंप से जुड़े तथ्य कहते हैं कि ऐसा कभी नहीं हो सकता यानि दुनिया में शायद ही कभी 10 की तीव्रता वाला भूकंप का झटका लगे।
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