19 सितंबर 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का विशेष उपाय
19 September 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।
ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 19 सितंबर 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार आज शनिवार है। शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनिदेव और हनुमान जी को समर्पित होता है। आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर 'राधाष्टमी' और 'दुर्गाष्टमी व्रत' का अत्यंत पावन पर्व भी मनाया जा रहा है। शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना करने, सरसों के तेल का दीपक जलाने तथा श्री राधा-कृष्ण व मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट, दोष और नकारात्मक शक्तियां समाप्त होती हैं तथा सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
ज्योतिषाचार्य मणि पुरोहित (Mani Purohit) द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग आपको आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास एवं पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देता है। पंचांग के अनुसार शुभ दिन, शुभ तारीख और शुभ समय पर कार्य आरंभ करने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो देखिए आज का पंचांग और जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त, और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल।
19 September 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत- भाद्रपद, अमांत- भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल
तिथि: अष्टमी (दोपहर 03:27 बजे तक), उपरांत नवमी तिथि प्रारंभ।
दिन: शनिवार
नक्षत्र: मूल
योग: आयुष्मान (दोपहर 02:28 बजे तक), उपरांत सौभाग्य योग प्रारंभ।
करण: बव (दोपहर 03:27 बजे तक), उपरांत बालव।
प्रविष्टे: 03 आश्विन
ऋतु: वैदिक ऋतु - वर्षा, द्रिक ऋतु - शरद
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)
सूर्योदय: प्रातः 06:11 बजे
सूर्यास्त: सायं 06:18 बजे
चन्द्रोदय: दोपहर 01:50 बजे (19 सितंबर)
चन्द्रास्त: रात 11:42 बजे
चन्द्र राशि: चंद्रमा धनु राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)।
सूर्य राशि: सूर्य देव कन्या राशि पर गोचर कर रहे हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:36 से 05:24 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:39 बजे तक।
अमृत काल: शाम 06:36 से रात 08:24 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: सुबह 09 बजे से 10:30 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 01:45 से 03:16 बजे तक।
कुलिक: प्रातः 06:11 से 07:42 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: प्रातः 07:48 से 08:37 बजे तक।
वर्ज्यम्: सुबह 07:43 से 09:31 बजे तक एवं रात 11:54 से मध्यरात्रि 01:42 बजे (20 सितंबर) तक।
भद्रा: मध्यरात्रि 02:13 बजे समाप्त हो चुकी है (आज दिन में भद्रा नहीं है)।
गंडमूल नक्षत्र: पूरा दिन-रात (मूल नक्षत्र)।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
राधाष्टमी: बरसाना लाडली श्री राधा रानी का जन्मोत्सव, जिनकी पूजा से अखंड सौभाग्य और भक्ति रस की प्राप्ति होती है।
दुर्गाष्टमी व्रत: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की मासिक दुर्गाष्टमी, मां भगवती दुर्गा का विशेष पूजन उत्सव।
शनिवार व्रत एवं शनि पूजन: शनि देव की कृपा और शनि दोषों से मुक्ति हेतु विशेष पूजन एवं दीपदान।
आज का विशेष उपाय
चूंकि आज शनिवार का दिन है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर 'राधाष्टमी' व 'मासिक दुर्गाष्टमी' का दिव्य संयोग है, इसलिए जीवन में सभी प्रकार के कष्टों, शनि दोषों और भय से मुक्ति पाने के लिए प्रातःकाल स्नान के पश्चात मां दुर्गा और श्री राधा-कृष्ण का पूजन करें। राधाष्टमी के अवसर पर राधा जी को माखन-मिश्री का भोग लगाएं तथा 'ॐ श्री राधिकायै नमः' मंत्र का जाप करें। संध्या समय पीपल के वृक्ष के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसमें काले तिल डालें। आज नीले या काले वस्त्र धारण करना तथा जरूरतमंदों को काले चने या उड़द की दाल का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
हरि ॐ
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
Himachal News की ताजा खबरों और वीडियो अपडेट्स के लिए हमारे Himachal News को फॉलो और YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।
टिप्पणियाँ (0)