17 September 2026 ka Panchang: वैदिक शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों से बना है- तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है।

ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 17 सितंबर 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार आज गुरुवार है। गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। आज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, कन्या संक्रांति और शिल्पकला के देवता 'भगवान विश्वकर्मा जयंती' का पावन पर्व भी है। गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना करने से ज्ञान, धन, मान-सम्मान और पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

ज्योतिषाचार्य मणि पुरोहित (Mani Purohit) द्वारा प्रस्तुत यह पंचांग आपको आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास एवं पक्ष की सम्पूर्ण जानकारी देता है। पंचांग के अनुसार शुभ दिन, शुभ तारीख और शुभ समय पर कार्य आरंभ करने से किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो देखिए आज का पंचांग और जानें आज का शुभ और अशुभ मुहूर्त, और जानें कैसी रहेगी आज ग्रहों की चाल।

 

17 September 2026 ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र

शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)

विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)

मास: पूर्णिमांत- भाद्रपद, अमांत- भाद्रपद

पक्ष: शुक्ल

तिथि: षष्ठी (प्रातः 10:48 बजे तक), उपरांत सप्तमी तिथि प्रारंभ।

दिन: गुरुवार

नक्षत्र: अनुराधा (सायं 07:53 बजे तक), उपरांत ज्येष्ठा (गंडमूल) नक्षत्र प्रारंभ।

योग: विष्कुम्भ (दोपहर 12:49 बजे तक), उपरांत प्रीति योग प्रारंभ।

करण: तैतिल (प्रातः 10:48 बजे तक), गर (रात 11:52 बजे तक), उपरांत वणिज करण प्रारंभ।

प्रविष्टे: 01 आश्विन (कन्या संक्रांति

ऋतु: वैदिक ऋतु - वर्षा, द्रिक ऋतु - शरद

 

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति (शिमला, हिमाचल प्रदेश)

सूर्योदय: प्रातः 06:10 बजे

सूर्यास्त: सायं 06:21 बजे

चन्द्रोदय: दोपहर 12:03 बजे (17 सितंबर)

चन्द्रास्त: रात 10:00 बजे

चन्द्र राशि: चंद्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा (पूरा दिन-रात)।

सूर्य राशि: सूर्य देव प्रातः 07:49 बजे तक सिंह राशि में, उपरांत कन्या राशि में प्रवेश करेंगे (कन्या संक्रांति)।

 

आज के मुख्य शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:35 से 05:23 बजे तक।

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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 से दोपहर 12:40 बजे तक।

अमृत काल: प्रातः 08:23 से 10:09 बजे तक।

 

विशेष योग:

सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:10 बजे से सायं 07:53 बजे तक)।

अमृतसिद्धि योग (प्रातः 06:10 बजे समाप्त)।

आनन्दादि योग: आनन्द (सायं 07:53 बजे तक), उपरांत कालदण्ड योग।

 

राहुकाल और अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 01:30 से 03 बजे तक। (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।

यम गण्ड: प्रातः 06:10 से 07:42 बजे तक।

कुलिक: सुबह 09:13 से 10:44 बजे तक।

दुर्मुहूर्त: सुबह 10:14 से 11:02 बजे तक एवं दोपहर बाद 03:06 से शाम 03:54 बजे तक।

वर्ज्यम्: देर रात 02:09 से तड़के 03:56 बजे (18 सितंबर) तक।

भद्रा: आज भद्रा का प्रभाव नहीं है।

गंडमूल नक्षत्र: सायं 07:53 बजे से अगले दिन (18 सितंबर) रात 10:44 बजे तक (ज्येष्ठा नक्षत्र)।

 

आज के प्रमुख व्रत और पर्व

विश्वकर्मा जयंती: निर्माण, यंत्र और शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा का पूजनोत्सव एवं मशीनों व औजारों की पूजा।

कन्या संक्रांति: सूर्य देव का सिंह राशि से कन्या राशि में महागोचर।

गुरुवार व्रत एवं विष्णु पूजन: सुख-समृद्धि, ज्ञान और भाग्य वृद्धि के लिए भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन।

 

आज का विशेष उपाय

चूंकि आज गुरुवार का दिन है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि, कन्या संक्रांति व विश्वकर्मा जयंती का शुभ संयोग है, इसलिए जीवन में मान-सम्मान, करियर में सफलता और आर्थिक उन्नति के लिए प्रातःकाल स्नान के पश्चात पीले वस्त्र धारण करें। भगवान श्री हरि विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाएं, उन्हें चने की दाल, गुड़ और पीले पुष्प अर्पित करें। इसके साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जाप करें। विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर अपने कार्यस्थल, औजारों और वाहनों का पूजन करना अत्यंत कल्याणकारी व समृद्धिदायक माना जाता है।

हरि ॐ

 

अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।

 

प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़

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