CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सीजेपी प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, दिल्ली में पाबंदियां हटाने और मेट्रो सेवाएं बहाल करने के दिए निर्देश
CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। राजधानी दिल्ली में व्यापक स्तर पर लगाई गई पाबंदियों, हिरासत और इंटरनेट ठप्प किए जाने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की विशेष पीठ ने रविवार को स्पष्ट निर्देश दिए कि दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जाएं, इंटरनेट सेवाएं बाधित न हों और आम जनता तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को गैर-कानूनी तरीके से न रोका जाए।
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी भी शांतिपूर्ण और निहत्थे नागरिक को हिरासत में न लिया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों के निष्पादन में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
गृह मंत्रालय और जिम्मेदार अधिकारियों को अवमानना का कारण बताओ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्तूबर के पूर्व आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किए जाने के आरोपों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। वरिष्ठ वकीलों ने अदालत को सूचित किया था कि 45 से अधिक मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था, नई दिल्ली व निजामुद्दीन जैसे बड़े रेलवे स्टेशन प्रभावित रहे और बिना किसी पूर्व ट्रैफिक एडवाइजरी के बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिया गया। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर बिना प्रक्रिया के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पाबंदियों को लेकर जारी मुख्य निर्देश
अदालत ने राजधानी में सामान्य जनजीवन की बहाली और कानून-व्यवस्था के संतुलन के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से संचालित की जाएंगी, जब तक कि अनुच्छेद 19(2) के तहत गंभीर सार्वजनिक व्यवस्था का संकट न हो।
ट्रैफिक नियमों के अधीन शहर में नागरिकों की सुचारू आवाजाही की अनुमति होगी तथा लगाए गए बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाएगी।
पूरे शहर में इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट और निर्बाध रूप से जारी रहेंगी।
धारा 163 लागू वाले क्षेत्रों के बाहर एकत्र होने वाले शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जाएगा।
सीजेपी का आरोप- नेताओं को किया गया किडनैप
दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली पुलिस और मुख्य चुनाव आयुक्त पर संगीन आरोप लगाए हैं। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका, सौरव दास और अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि उन्हें फ्लाइट से उतरते ही पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में ले लिया गया। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष कार्य करने के बजाय सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काला दिन करार देते हुए अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
पुलिस ने कहा- प्रदर्शन की नहीं थी अनुमति
वहीं, आरोपों पर पलटवार करते हुए दिल्ली पुलिस की डीसीपी पीआरओ नेहा यादव ने आधिकारिक बयान में कहा कि सीजेपी को प्रदर्शन करने की कोई वैधानिक अनुमति नहीं दी गई थी और आयोजकों ने कानून-व्यवस्था के नियमों का पालन नहीं किया। उन्होंने नेताओं के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने कानूनी दायरे में रहकर ही सुरक्षा के कदम उठाए हैं।
Himachal News की ताजा खबरों और वीडियो अपडेट्स के लिए हमारे Himachal News को फॉलो और YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।
टिप्पणियाँ (0)