Himachal News: शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ओगली में आयोजित होने वाली खंड स्तरीय अंडर-19 छात्र खेलकूद प्रतियोगिता को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। भाजपा शिमला ग्रामीण मंडल अध्यक्षा एवं जिला परिषद सदस्य शिवानी ठाकुर ने कांग्रेस सरकार और स्थानीय विधायक तथा कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर सरकारी कार्यक्रमों में चुने हुए जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं और जनता के जनादेश का अनादर करार दिया है।

शिवानी ठाकुर ने बताया कि 10 से 13 सितंबर तक ओगली स्कूल में जोनल अंडर-19 बॉयज स्पोर्ट्स टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इसके आधिकारिक निमंत्रण पत्र से संबंधित क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य का नाम ही नदारद है। उन्होंने कहा कि यह सवाल उनके व्यक्तिगत मान-सम्मान का नहीं बल्कि उन 26 पंचायतों की जनता के सम्मान का है, जिन्होंने उन्हें चुनकर भेजा है। किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि की उपेक्षा सीधे तौर पर क्षेत्र की जनता की अनदेखी है।

 

विक्रमादित्य सिंह के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल

शिवानी ठाकुर ने कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हर मंच पर जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और सम्मान की बातें करते हैं, लेकिन उनके अपने ही विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रमों से गायब किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल विपक्षी दल से जुड़े होने के कारण उनके साथ यह भेदभाव किया जा रहा है। मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके क्षेत्र में ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है और क्या सरकारी संस्थानों पर कोई राजनीतिक दबाव है।

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शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन से मांगा जवाब

भाजपा नेता ने स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षा विभाग से सार्वजनिक जवाब मांगते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि अतिथियों की सूची किसके निर्देशों पर बनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूल किसी राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं हैं, बल्कि जनता के टैक्स से चलते हैं। बच्चों की खेलकूद प्रतियोगिताओं को राजनीतिक खींचतान का जरिया बनाना बिल्कुल गलत है। यदि यह कोई प्रशासनिक भूल है तो इसे तुरंत सुधारा जाए, अन्यथा जानबूझकर की गई अनदेखी पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

 

खेल कार्यक्रमों में राजनीति बंद करने की मांग

शिवानी ठाकुर ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद खेल प्रतियोगिता में बाधा डालना नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों में निष्पक्षता कायम रखना है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का सम्मान किसी पार्टी विशेष का नहीं, बल्कि जनता के जनादेश का सम्मान होता है। सत्ता परिवर्तन के साथ सरकारी तंत्र का चरित्र नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि "व्यवस्था परिवर्तन" के नाम पर विपक्ष के प्रतिनिधियों को यूं ही बाहर रखा गया, तो कांग्रेस सरकार को इसका जवाब जनता के बीच देना पड़ेगा।