Rahu Kaal Time: हर दिन कब से कब तक रहता है राहुकाल, जानिए क्यों माना जाता है ये अशुभ समय
Rahu Kaal Time: सनातन संस्कृति और वैदिक पंचांग के अनुसार किसी भी नए या मांगलिक कार्य की शुरुआत से पूर्व शुभ मुहूर्त का विचार करने की समृद्ध परंपरा रही है। वैदिक शास्त्रों में राहु को एक छाया ग्रह माना गया है, जो मुख्य रूप से अशुभ फल प्रदान करता है। पंचांग के अनुसार प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे का समय राहुकाल के रूप में जाना जाता है, जिसमें किसी भी प्रकार के शुभ और मंगल कार्यों को आरंभ करने की मनाही होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ मुहूर्त में प्रारंभ किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना सर्वाधिक रहती है, जबकि अशुभ काल में किए गए कार्य अक्सर विघ्न-बाधाओं से घिर जाते हैं। राहुकाल का सटीक समय किसी भी स्थान विशेष के स्थानीय सूर्योदय और वार पर निर्भर करता है, जिसके कारण अलग-अलग शहरों में इसके समय में आंशिक भिन्नता हो सकती है।
राहुकाल का धार्मिक और खगोलीय महत्व
वैदिक ज्योतिष में राहु के आधिपत्य वाली इस 90 मिनट की समयावधि को अत्यंत संवेदनशील और प्रतिकूल माना गया है। इस कालखंड के दौरान नए व्यापार का शुभारंभ, गृह प्रवेश, विवाह संबंधी बातचीत, नया वाहन खरीदना या किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए यात्रा प्रारंभ करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि राहुकाल में शुरू किए गए कार्य बिना रुकावट के पूरे नहीं होते और उनमें मानसिक या प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
राहुकाल के दोष से बचाव के आसान उपाय
यदि किसी अति आवश्यक कार्य या यात्रा के लिए राहुकाल के दौरान ही घर से निकलना पड़े, तो ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कुछ विशेष शास्त्रीय उपायों का पालन करना चाहिए। यात्रा पर निकलने से पूर्व घर से थोड़ा दही, पान का पत्ता या कुछ मीठा खाकर निकलना शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त, घर के मुख्य द्वार से निकलने से पहले 10 कदम उल्टे चलकर फिर आगे बढ़ना भी राहु के प्रभाव को कम करता है। वहीं किसी भी अपरिहार्य मांगलिक कार्य को करने से पूर्व हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी रहता है।
जानिए किस वार को कब होता है राहुकाल
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वार |
राहुकाल का समय |
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सोमवार |
सुबह 07: 30 से 09:00 बजे तक। |
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मंगलवार |
दोपहर 03 से 04 : 30 बजे तक। |
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बुधवार |
दोपहर 12 से 01 : 30 बजे तक। |
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बृहस्पतिवार |
दोपहर 01 : 30 से 03 बजे तक। |
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शुक्रवार |
सुबह 10 : 30 से 12:00 बजे तक। |
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शनिवार |
सुबह 09 बजे से 10 : 30 बजे तक। |
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रविवार |
शाम 04 : 30 से 06:00 बजे तक। |
- हरि ॐ
सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:खभाग् भवेत।।
अस्वीकरण (Disclaimer): अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार तिथियों एवं समय में अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह अवश्य लें।
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