Agriculture News: हिमाचल प्रदेश में आगामी रबी सीजन की तैयारियों के बीच कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है। अब प्रदेश में किसानों को सरकारी डिपो से रासायनिक खाद प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण करवाकर अपनी कृषि भूमि का रिकॉर्ड डिजिटल कराना होगा। किसान की डिजिटल आईडी बनने के बाद उसी में दर्ज भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर खाद की मात्रा और कोटा तय किया जाएगा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए कृषि उपनिदेशक कांगड़ा डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक अपनी कृषि भूमि का विवरण एग्रीस्टैक पोर्टल पर दर्ज नहीं कराया है, वे जल्द से जल्द पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर लें। पंजीकरण न होने की स्थिति में भविष्य में किसानों को डिपो से खाद प्राप्त करने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

 

खसरा-खतौनी और पहचान पत्र अनिवार्य

कृषि उपनिदेशक ने स्पष्ट किया कि किसान आईडी बनवाने के लिए किसानों को अपनी कृषि भूमि का पूरा ब्यौरा डिजिटल रूप में दर्ज कराना होगा। इसके लिए भूमि का खसरा-खतौनी नंबर और अन्य संबंधित जानकारी देनी होगी। जमीन का संपूर्ण विवरण डिजिटल होने के बाद उसे संबंधित किसान की स्थायी डिजिटल आईडी से लिंक कर दिया जाएगा।

 

लोक मित्र केंद्रों पर मुफ्त होगा पंजीकरण

किसानों की सुविधा के लिए यह पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है। किसान अपने नजदीकी लोक मित्र केंद्र (CSC) में जाकर एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए किसानों को अपने साथ सरकारी पहचान पत्र, आधार कार्ड, पंजीकृत मोबाइल नंबर तथा भूमि का नवीनतम जमाबंदी या पर्चा लाना अनिवार्य होगा।

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कालाबाजारी और अनियमित खरीद पर लगेगी रोक

कृषि विभाग के अनुसार इस नई व्यवस्था को लागू करने का मुख्य उद्देश्य राज्य की खाद वितरण प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाना है। डिजिटल व्यवस्था से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि प्रत्येक किसान को उसकी वास्तविक जोत और कृषि भूमि के सटीक अनुपात में ही खाद की आपूर्ति हो। इसके अलावा, इस एकीकृत डिजिटल प्रणाली के माध्यम से उर्वरक की अनियमित खरीद, कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर भी कृषि विभाग और प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे वास्तविक और पात्र किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।


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