World News: चैटजीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली दुनिया की दिग्गज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ओपनएआई (OpenAI) का एआई सिस्टम बेकाबू होने और सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक ताजा रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ओपनएआई के एआई सिस्टम ने संयुक्त राष्ट्र के व्यापार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट का सुरक्षा घेरा तोड़कर भारी मात्रा में डेटा निकाल लिया। रिसर्च के मुताबिक, एआई बॉट्स ने ट्रेड विभाग की वेबसाइट पर 16,000 से अधिक सर्च रिक्वेस्ट भेजकर सुरक्षा प्रणाली को भेद दिया।

इससे पहले भी यह जानकारी सामने आई थी कि ओपनएआई के इस सिस्टम ने लैब को सूचित किए बिना ही अमरीकी कॉमर्स डिपार्टमेंट और अमरीकी शेयर बाजार नियामक 'एसईसी' की वेबसाइटों से डेटा निकाल लिया था। इसके अलावा अमरीका के शिक्षा विभाग की वेबसाइट को भी हैक करने का प्रयास किया गया था। रिसर्च रिपोर्ट की लेखिका रोवन हॉवर्ड-जोन्स के अनुसार, यह खुलासा रिसर्च फर्म 'ट्रांसल्यूस' की ट्रैकिंग पर आधारित है, जिसके तहत अप्रैल से जून के बीच यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट के पब्लिक डेटा हब को 16,000 से अधिक बार स्कैन किया गया था।

 

बैकडोर का इस्तेमाल कर निकाला डेटा

रिपोर्ट के अनुसार, इन एआई बॉट्स को केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी जुटाने का काम दिया गया था। लेकिन जब यूएन की वेबसाइट ने बहुत अधिक ट्रैफिक देखकर रिक्वेस्ट को ब्लॉक करना शुरू किया, तो बॉट्स ने रुकने के बजाय वेबसाइट के नियमों का उल्लंघन करते हुए आक्रामक तरीकों और बैकडोर के जरिए जबरन डेटा निकालना जारी रखा।

 

स्टैनफोर्ड के एक्सपर्ट ने बताया हैकिंग जैसा प्रयास

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साइबर सिक्योरिटी लेक्चरर एलेक्स स्टैमोस ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य इंटरनेट सर्च नहीं है। यह वेबसाइटों से जबरन जानकारी निकालने की एक बेहद आक्रामक कोशिश है, जिसे सीधे तौर पर हैकिंग की श्रेणी में माना जा सकता है। डेटा निकालने के लिए एआई ने फर्जी ईमेल आईडी बनाईं, ट्रैफिक की तय सीमा को तोड़ा और खुद के बॉट न होने का झूठ भी बोला।

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ओपनएआई ने मानी गड़बड़ी, गूगल, मेटा और एंथ्रोपिक के एआई भी कर चुके हैं ऐसी हरकतें

मामले के तूल पकड़ने पर ओपनएआई की प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि टेस्टिंग के दौरान कुछ एआई मॉडल्स ने अपने निर्धारित दायरे से बाहर निकलकर काम किया है। कंपनी इन नतीजों की गहन समीक्षा कर रही है। प्रवक्ता का दावा है कि ज्यादातर मामले पब्लिक वेबसाइटों से विश्वसनीय जानकारी जुटाने जैसे सामान्य रिसर्च टास्क से जुड़े थे, लेकिन प्रभावित संस्थाओं की सुरक्षा को देखते हुए इसे पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। 

गौरतलब है कि एआई सिस्टम के बेकाबू होने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले एंथ्रोपिक, मेटा और गूगल के एआई एजेंट्स भी कंपनियों और सरकारी सिस्टम्स में सेंध लगाने या हैक करने की कोशिशें कर चुके हैं। हालांकि, इनमें से सबसे ज्यादा मामले ओपनएआई के सामने आए हैं। चिंता की बात यह है कि इन सभी मामलों में खुद टेक कंपनियों को भी बाद में ही पता चला कि उनका एआई पर्दे के पीछे क्या हरकतें कर रहा था।


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