Navratri 2024 4th Day: 6 अक्टूबर को नवरात्रि का चौथा दिन है। शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल अशिवनी मास की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर को प्रातः 07:49 बजे से होगी जिसका समापन 7 अक्टूबर को प्रातः 09:47 बजे होगा।
नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित है। मां कुष्मांडा मां दुर्गा के नौ अवतारों में से एक हैं। जो साधक माता रानी के इस अवतार की पूजा करते हैं, उन्हें सूर्य जैसे तेज की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
कहा जाता है कि सूर्यदेव के ऊपर मां कुष्मांडा का आधिपत्य है। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। सूर्यदेव को दिशा और ऊर्जा मां कुष्मांडा ही प्रदान करती हैं। मां कुष्मांडा शेर की सवारी करती हैं और अपने हाथों में कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और माला धारण करती हैं। कहा जाता है कि जब सृष्टि का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तब इन्होंने ब्रह्मांड (Universe) की रचना की। इन्हीं से महासरस्वती, महाकाली और महालक्ष्मी उत्पन्न हुईं।
आदिशक्ति मां कुष्मांडा बेहद कोमल हृदय वाली हैं। वे भक्त द्वारा की गई अल्प भक्ति से भी प्रसन्न हो जाती हैं। माता की पूजा से रोग-शोक दूर हो जाते हैं और आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
Navratri 2024 4th Day: मां को क्यों कहते हैं कुष्मांडा
देवी कुष्मांडा की महिमा के बारे में भागवत पुराण में विस्तार से बताया गया है। मान्यता है कि जब सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था और चारों ओर सिर्फ अंधकार था तब मां कुष्माण्डा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से ही पूरे ब्रह्मांड की रचना की। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अंड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से पुकारा जाता है। सूरज की तपिश को सहने की शक्ति मां के अंदर है। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। ऐसा उल्लेख मिलता है कि, माता को कुम्हड़े की बलि बेहद प्रिय है। कुम्हड़े को संस्कृत में कुष्मांडा कहते हैं।
ऐसा भी माना जाता है कि देवी पार्वती ने सिद्धिदात्री का रूप धारण करने के बाद ऊर्जा और प्रकाश को संतुलित करने के लिए इस रूप को धारण किया था। मां कुष्मांडा को जहां बेहद कोमल हृदय वाली माना गया वहीं मां दुर्गा के सभी स्वरूपों में सबसे उग्र भी माना गया है।
Navratri 2024 4th Day: कैसा है मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां कुष्माण्डा की 8 भुजाएं हैं, इसलिए यह अष्टभुजा भी कहलाईं। इनमें से 7 हाथों में कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, कमण्डल और कुछ शस्त्र जैसे धनुष, बाण, चक्र तथा गदा हैं। जबकि, आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इनका वाहन सिंह है। मां कुष्मांडा का वास सूर्यमंडल के भीतर है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही चकीली है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। माता के इस स्वरूप में मंद और हल्की मुस्कान है।
Navratri 2024 4th Day: मां कुष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और पूजा की तैयारी कर लें मां कुष्मांडा का व्रत करने का संकल्प करें। पूजा के स्थान को सबसे पहले गंगाजल से पवित्र कर लें। लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करें। मां कुष्मांडा का स्मरण करें। पूजा में पीले वस्त्र फूल, फल, मिठाई, धूप, दीप, नैवेद्य, अक्षत आदि अर्पित करें। सारी सामिग्री अर्पित करने के बाद मां की आरती करें और भोग लगाएं। सबसे आखिर में क्षमा याचना करें और ध्यान लगाकर दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
Navratri 2024 4th Day: मां कुष्मांडा देवी का मंत्र
पूजा मंत्र: ऊं कुष्माण्डायै नम:
बीज मंत्र: कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
Navratri 2024 4th Day: माता कुष्मांडा की पूजा से मिलते हैं ये लाभ
ऐसा माना जाता है कि माता कुष्मांडा की पूजा से व्यक्ति को सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति मां कुष्माण्डा की आराधना करता है उसे उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु, सुख-समृद्धि और उन्नति की प्राप्ति होती है। मां की उपासना से सिद्धियों में निधियों को प्राप्त कर समस्त रोग-शोक दूर होकर आयु-यश में वृद्धि होती है।
Navratri 2024 4th Day: माता कुष्मांडा की आरती
कुष्मांडा जय जग सुखदानी। मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली। शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे। भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा। स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे। सुख पहुंचती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा। पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी। क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा। दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो। मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए। भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
Navratri 2024 4th Day: मां कुष्मांडा की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार जब सृष्टि का कोई अस्तित्व नहीं था, चारों ओर अंधकार ही अंधकार था, तब एक ऊर्जा, गोले के रूप में प्रकट हुई। इस गोले से बेहद तेज प्रकाश उत्पन्न हुआ और देखते ही देखते ये नारी के रूप में परिवर्तित हो गया। माता ने सबसे पहले तीन देवियों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को उत्पन्न किया।
महाकाली के शरीर से एक नर और नारी उत्पन्न हुए। नर के पांच सिर और दस हाथ थे, उनका नाम शिव रखा गया और नारी का एक सिर और चार हाथ थे, उनका नाम सरस्वती रखा गया। महालक्ष्मी के शरीर से एक नर और नारी का जन्म हुआ। नर के चार हाथ और चार सिर थे, उनका नाम ब्रह्मा रखा और नारी का नाम लक्ष्मी रखा गया। फिर महासरस्वती के शरीर से एक नर और एक नारी का जन्म हुआ। नर का एक सिर और चार हाथ थे, उनका नाम विष्णु रखा गया और महिला का एक सिर और चार हाथ थे, उनका नाम शक्ति रखा गया।
इसके बाद माता ने ही शिव को पत्नी के रूप में शक्ति, विष्णु को पत्नी के रूप में लक्ष्मी और ब्रह्मा को पत्नी के रूप में सरस्वती प्रदान कीं। ब्रह्मा को सृष्टि की रचना, विष्णु को पालन और शिव को संहार करने का जिम्मा सौंपा। इस तरह संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना मां कुष्मांडा ने की। ब्रह्मांड की रचना करने की शक्ति रखने वाली माता को कुष्मांडा के नाम से जाना गया।
Posted By: Himachal News
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। लेख में बताए गए उपाय, लाभ, सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।
