Himachal News: जिस युवा पीढ़ी को अक्सर शॉपिंग, ट्रैवल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया के प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है, उसी पीढ़ी का एक समूह अब हिमाचल प्रदेश के दूर-दराज गांवों में बदलाव की नई इबारत लिख रहा है। देश के विभिन्न राज्यों से आए युवाओं का यह दल गांवों को आर्थिक मदद से नहीं, बल्कि अपनी सोच, हुनर, समय और कार्य क्षमता के दम पर अपनाने का अनूठा मॉडल पेश कर रहा है। यहां गांव को गोद लेने का अर्थ पैसे बांटना नहीं, बल्कि समुदाय के साथ जुड़कर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में योगदान देना है।

चंडीगढ़ निवासी निखिल शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुई इस सराहनीय पहल के तहत युवाओं ने हाल ही में कुल्लू जिले की सैंज घाटी के मनयाशी, देहुरी और सराहन गांवों का रुख किया। 'ग्रीन और क्लीन हिमाचल' के संकल्प से प्रेरणा लेते हुए इन युवाओं ने स्कूली बच्चों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक प्रदूषण और रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन संवाद आयोजित किया।

 

पहाड़ों में सैर-सपाटे से आगे बढ़ी सोच

इस पहल ने युवाओं के दृष्टिकोण में आ रहे बड़े बदलाव को उजागर किया है। अब पहाड़ केवल फोटो खिंचवाने और रील्स बनाने का जरिया नहीं रहे, बल्कि युवाओं का एक वर्ग पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए स्थानीय समुदायों के साथ गहरा रिश्ता बना रहा है। सैंज वैली के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में युवाओं ने खेल-कूद, ड्राइंग और इंटरैक्टिव गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सिंगल यूज प्लास्टिक के खतरों, कचरे के सही निस्तारण और प्रकृति संरक्षण की बारीकियों से अवगत कराया।

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स्थानीय प्रधान व ग्रामीणों संग तलाशे समाधान

अभियान के दौरान युवाओं की टीम ने ग्राम पंचायत प्रधानों और स्थानीय लोगों के साथ बैठकर गांव की वास्तविक समस्याओं, जैसे वेस्ट डिस्पोजल और बुनियादी विकास की चुनौतियों को समझा। निखिल शर्मा ने बताया कि इससे पहले कांगड़ा जिले की धौलाधार श्रृंखलाओं में स्थित करैरी और त्रिउंड में भी ऐसा अभियान चलाया जा चुका है, जिसे भारी जनसमर्थन मिला था। अब इस सफल मॉडल को पूरे हिमाचल प्रदेश के अन्य ग्रामीण और जनजातीय इलाकों तक ले जाने की योजना बनाई जा रही है।


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