16 May 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप आज यानी 16 मई 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
ज्योतिषीय गणना: ग्रह और नक्षत्र
शक सम्वत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम सम्वत: 2083 (सिद्धार्थि)
तिथि: अमावस्या (रात 07:11 तक, तत्पश्चात ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा)
नक्षत्र: कृत्तिका (सुबह 11:15 तक, तत्पश्चात रोहिणी)
योग: शोभन (प्रातः 04:09 तक, फिर अतिगण्ड)
करण: चतुष्पाद (सुबह 08:11 तक), नाग (रात 07:11 तक)
दिन: शनिवार
प्रविष्टे: 02 ज्येष्ठ
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:27 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:11 बजे
चन्द्रोदय: चन्द्रोदय नहीं (अमावस्या)
चन्द्रास्त: सायं 06:40 बजे
चन्द्र राशि: चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य वृषभ राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:01 से 04:44 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:53 से 12:47 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:35 से 03:29 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:10 से 07:31 बजे तक।
अमृत काल: सुबह 08:42 से 10:12 तक।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 08:53 से 10:36 बजे तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 01:59 से सायं 03:42 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 05:27 से 06:21 बजे तक, फिर सुबह 06:21 से 07:16 बजे तक।
प्रमुख व्रत और पर्व: ज्येष्ठ अमावस्या (शनि जयंती / वट सावित्री व्रत)
आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या है। यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज शनि जयंती और वट सावित्री व्रत (अमावस्या पक्ष) मनाया जा रहा है। पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार है और शनि जयंती का पावन संयोग है, अतः शनि देव की कृपा पाने के लिए निम्न उपाय करें:
पीपल पूजन: आज सुबह या शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें।
शनि चालीसा का पाठ: शनि मंदिर जाकर शनि देव को नीले पुष्प और शमी पत्र अर्पित करें तथा शनि चालीसा का पाठ करें।
छाया दान: एक कटोरी में सरसों का तेल लेकर उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को किसी जरूरतमंद को या मंदिर में दान कर दें। इससे कुंडली के शनि दोष शांत होते हैं।
सावधानी: आज ‘अतिगण्ड’ योग होने के कारण वाद-विवाद से बचें। अमावस्या तिथि होने के कारण किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहना ही हितकर होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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