मेरा गांव

समुद्रतल से करीब 7,900 मीटर की ऊंचाई पर तोष गांव (Tosh Village) कुल्लू जिले में पार्वती वैली का आखिरी गांव है। गांव का कुदरत ने खूब हार-श्रृंगार किया है। यह गांव शोरगुल से कोसों दूर है। बड़े-बड़े देवदार, ढलानदार खेतों में उगीं जड़ी-बूटियां, जंगली फल, कल-कल बहते झरने, बर्फ से ढके पहाड़… यहां पहुंचते ही एहसास होता है कि शांति और सुकून की खोज पुरी हो गई है। यहां जीवनदायिनी जड़ी-बूटियों की सुगंध, करीब से दिखते बर्फ से लकदक पहाड़, बूढ़े देवदार और जवान सेब के पेड़ आपसे बतियाते दिखते हैं। कल-कल बहते झरने मन को हर लेंगे। तोष…

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हिमाचल के पहाड़ों पर बसे गांव खूबसूरती की मिसाल हैं। भोलापन, सादगी, कड़ी मेहनत, यह सब पहाड़ की जीवनशैली का हिस्सा है। पहाड़ों की तरह कठोर एवं जीवट यहां का जनजीवन है। प्रकृति ने पहाड़ों के आंचल में कई ऐसे खूबसूरत भू-खंड रचे हैं जहां की प्राकृतिक आभा किसी का मन न मोह लें यह…

पहाड़ खुद खूबसूरती की मिसाल हैं। भोलापन, सादगी, कड़ी मेहनत, यह सब पहाड़ की जीवनशैली का हिस्सा है। पहाड़ों की तरह कठोर एवं जीवट यहां का जनजीवन है। प्रकृति ने पहाड़ों के आंचल में कई ऐसे खूबसूरत भू-खंड रचे हैं जहां की प्राकृतिक आभा किसी का मन न मोह लें यह हो नहीं सकता। देवभूमि…