खेत-खलिहान

सिर्फ एक जंगली सब्जी नहीं, हिमाचल की महिलाओं के स्वावलंबन की कहानी है ‘लुंगडु’ स्वाद और सेहत के खजाने से लेकर बाजारों की रौनक तक… जानिए कैसे एक जंगली फर्न बदल रहा है ग्रामीण आर्थिकी की तस्वीर। 15 मई 2026 पहाड़ों में जब सर्दियां विदा लेती हैं और बर्फ पिघलने के बाद धरती फिर से हरी चादर ओढ़ती है, तब धौलाधार और पीर पंजाल की नम और छायादार घाटियों में एक जादुई हलचल शुरू होती है। यह हलचल है ‘लुंगडु’ के अंकुरित होने की। हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक थाली का यह सबसे अहम हिस्सा सिर्फ एक मौसमी सब्जी भर नहीं…

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Success Story: मसेरन गांव के दुनीचंद ने लिखी सफलता की नई इबारत हिमाचल न्यूज़: मंडी Success Story: कड़ी मेहनत एवं सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं से मंडी जिला के किसान सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। पधर उपमंडल के गांव मसेरन के दुनी चंद ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं को अपनाकर खेती से एक…

दीपिका वालिया: सुंदरनगर Himachal Pushp Kranti Yojana: पारम्परिक खेती को आधुनिक खेती में बदलने का संकल्प Himachal Pushp Kranti Yojana: खेतीबाड़ी में रूचि तथा पारम्परिक खेती से हटकर कार्य करने की पहल ने गोहर क्षेत्र के रविंद्र को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई। फूलों की खेती से हर व र्ष लाखों रुपए की आय के साथ…

किशन श्रीमान Agriculture News: नौकरियों के लिए घर से दूर जहां-तहां भटकने के बजाय अपनी पुश्तैनी जमीन पर ही नकदी फसलों की खेती करके भी रोजाना हजारों रुपये की आय प्राप्त की जा सकती है। प्रदेश सरकार ऐसे प्रगतिशील किसानों को हमेशा प्रोत्साहित करती है और कृषि विभाग तथा उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं के…

किशन श्रीमान: शिमला Himachal News: प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी योजनाएं व कार्यक्रम सफलतापूर्वक कार्यान्वित किए जा रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थिकी से जुड़े हितधारकों को सशक्त करने पर…

Agriculture News: खरीफ मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म का अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा है। इसका अधिक प्रकोप होने पर फसल को एक ही रात में भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इस कीट की व्यस्क मादा मोथ पौधों की पत्तियों और तनों पर अण्डे देती है। एक बार में मादा 50-200 अण्डे देती…

Agriculture News: आज के युग में जहां फल सब्जियों एवं खाद्यान्न में रसायनों का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। इसी कारण कैंसर, टीवी, ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का भी प्रकोप बढ़ रहा है। रसायनों के अधिक प्रयोग के दुष्प्रभावों को देखते हुए आज प्राकृतिक कृषि की आवश्यकता मसूसस की गई हैI सरकार ने जहां प्राकृतिक…

Agriculture News: एक कनाल जमीन की फसल के लिए देना होगा 48 रुपये प्रीमियम प्राकृतिक आपदा जैसे सूखा, बाढ़, जलभराव और ओलावृष्टि इत्यादि से फसलों को होने वाले नुक्सान की भरपाई के लिए आरंभ की गई फसल बीमा योजना का लाभ वर्तमान खरीफ मौसम के दौरान भी उठाया जा सकता है। जिला हमीरपुर में इसी…

Agriculture News: ऊना जिला के लोअर बढे़ड़ा निवासी 50 वर्षीय रघुवीर सिंह के लिए कृषि व पशुपालन आर्थिकी का अहम जरिया बना है। अर्धसैन्य बल सीआरपीएफ में लगभग 22 वर्षों तक देश सेवा करने के उपरान्त रघुवीर सिंह ने अपनी पुश्तैनी जमीन को संभाला तथा कृषि के साथ-साथ पशुपालन को भी आर्थिकी का आधार बनाया…

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में तैयार होने वाले किंग ऑफ विटामिन सी यानी छरमा (Sea buckthorn) के उत्पाद देश-विदेश में पसंद बन चुके हैं। वाइल्ड लाइफ डिविजन स्पीति के तहत विभिन्न स्वयं सहायता समूह छरमा के कई उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिसे खरीदने के लिए 2012 से 2015 बैच के भारतीय वन सेवा…

हिमाचल न्यूज़: बैजनाथ (कांगड़ा) Agriculture News: हिमाचल की दुर्गम चौहार घाटी मे आज भी प्राकृतिक रूप से परंपरागत तरीके से लाल चावल उगाया जाता है। आज के युग में केमीकल खेती ने जहां खाद्य पदार्थों की गुणवता पर सवालिया चिन्ह लगा दिए हैं वहीं प्रदेश में आज भी कुछ दुर्गम क्षेत्रों में परंपरागत खाद्यों पदार्थों…

मधुमक्खियों के 10 बक्सों के साथ शुरूआत करने वाले बंगाणा उपमंडल के तरेटा निवासी संजय कुमार आज जिला ऊना के अग्रणी मधुमक्खी पालक बनकर लाखों रुपए कमा रहे हैं। सरकार की योजना तथा अपने परिश्रम के नतीजों से उत्साहित संजय के पास अब 74 बॉक्स हो गए हैं। चार साल पहले संजय ने मधुमक्खी पालन…

सोमसी देष्टा: शिमला हिमाचल न्यूज़ | सुगंधित फूलों का नाम सुनते ही खुशबू का अहसास होने लगता है। जब फूलों की खेती से स्वरोजगार मिलने लगे तो चेहरे पर मुस्कान बरबस ही आ जाती है। ऐसा ही एक पौधा है लैवेंडर। जो महक के साथ-साथ आपकी कमाई का भी अच्छा जरिया बन सकता है। लैवेंडर…

हरिराम चौधरी: शिमला  हिमाचल न्यूज़ | भांग का नाम सुनते ही आमतौर पर हमें नशे वाला कोई पदार्थ ही दिमाग में आता है। लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है। वैश्विक स्तर पर भांग का इस्तेमाल जहाज से लेकर कागज तक बनाने में किया जाता है। भांग की खेती का इतिहास लगभग 12 हजार वर्ष पुराना…