24 मई: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 24 मई वर्ष का 144वां (लीप वर्ष में यह 145वां) दिन है। साल में अभी 221 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 24 मई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 24 मई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
24 मई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 24 May in History)
1956: इतिहास के पन्नों से अधिक प्राचीन है वाराणसी का इतिहास, आज ही के दिन मिली थी आधिकारिक मान्यता
अकसर ‘न आदि न अंत’ की मान्यता वाले शहर काशी के जन्मदिन को लेकर लोगों के मन में सवाल भी उठते रहे हैं। मगर 24 मई को मनाए जाने वाले जन्मदिन का आधार पौराणिक कतई नहीं है। जी हां, 24 मई को वाराणसी शहर का जन्मदिन मनाए जाने की परंपरा अधिक पुरानी नहीं है। गजेटियर में दर्ज वाराणसी शहर का आधिकारिक नाम 24 मई 1956 को स्वीकारने की जानकारी सार्वजनिक की गई है। इस लिहाज से वाराणसी का जन्मदिन 24 मई को मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
इसके पूर्व वाराणसी जिले का नाम स्थाई नहीं था। कोई इसे बनारस तो कोई काशी कहा करता था। मगर वरुणा और असि नदियों के नाम को साझा कर वाराणसी का नाम 24 मई को आधिकारिक करने की वजह से ही इस दिन वाराणसी में सामाजिक संस्थाएं और लोग शहर का जन्म दिन अब मनाने लगे हैं। इस ऐतिहासिक तथ्य को सबसे पहले जागरण की ओर से ही सामने लाया गया था। उसके बाद से ही यह दिन अब काशी में परंपरा और उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है।
दरअसल हर शहर का एक इतिहास और उसकी बायोग्राफी आजादी के बाद सहेजने की परंपरा के क्रम में वाराणसी शहर का भी गजेटियर बना और उसे दस्तावेजों में दर्ज किया गया। दस्तावेज में दर्ज होने के बाद आधिकारिक तौर पर वाराणसी के तौर पर इस जिले की मान्यता हो गई। हालांकि, आज भी काशी और बनारस का नाम लोगों की जुबान पर है। मगर जिले का आधिकारिक नाम वाराणसी ही है।
पुराणों से भी पुरानी नगरी होने की मान्यता वाराणसी जिले की है, पौराणिक मान्यता यह भी है कि इस शहर का न आदि है न अंत है और यह भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है। तीनों लोकों से न्यारी नगरी काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है। वाराणसी शहर को अविमुक्त, आनंदवन, रुद्रवास के नाम भी जाना प्राचीन काल में पहचाना जाता रहा है। इसके करीब 18 नाम – वाराणसी, काशी, फो लो – नाइ (फाह्यान द्वारा प्रदत्त नाम), पो लो – निसेस (ह्वेनसांग द्वारा प्रदत्त नाम), बनारस (मुस्लिमों द्वारा प्रयुक्त), बेनारस, अविमुक्त, आनन्दवन, रुद्रवास, महाश्मशान, जित्वरी, सुदर्शन, ब्रह्मवर्धन, रामनगर, मालिनी, पुष्पावती, आनंद कानन और मोहम्मदाबाद आदि नाम भी पुरातन काल से ही लोगों की जुबान पर रहे हैं।
देश की आजादी के बाद प्रशासनिक तौर पर ‘वाराणसी’ नाम की स्वीकार्यता राज्य सरकार की गजेटियर के अनुसार संस्तुति इसी दिन की गई थी। वाराणसी जिले की संस्तुति जब शासन स्तर पर हुई तब डा. संपूर्णानंद मुख्यमंत्री थे। खुद डा. संपूर्णानंद की निजी पृष्ठभूमि भी वाराणसी से थी और वो काशी विद्यापीठ में अध्यापन से भी लंबे समय से जुड़े रहे थे। इतिहासकार डा. पूनम पांडेय मानती हैं कि काशी को प्राचीन काल में आनंद कानन भी कहा जाता था, यह वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम का बड़ा केंद्र था।
देश के प्रमुख मार्गों से यह जुड़ा था और व्यापार का पड़ाव भी यहां मौजूद था। लिहाजा देश भर के लोग यहां आए और बस भी गए। लिहाजा मुस्लिमों ने यहां की सामाजिक समरसता को देखते हुए इसे बनारस शब्द का नाम दिया तो उनके बाद अंग्रेजों ने बेनारस भी कह दिया। अब एक बार फिर से वाराणसी का नाम चर्चा में है और यहां बाबा विश्वनाथ धाम के ठीक बगल ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही भी देश ही नहीं बल्कि विश्व भर की चर्चा के केंद्र में है।
1920: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना
भारत की बात करें तो यह दिन इसलिए अहम है कि देश में मुस्लिम शिक्षा का सबसे बड़ा और मुख्य केन्द्र माने जाने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना 1920 में 24 मई के दिन हुई थी। अपने समय के महान समाज सुधारक सर सैयद अहमद खान ने मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा प्रदान करने की जरूरत को महसूस करते हुए 1877 में एक स्कूल की स्थापना की थी जो बाद में मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कालेज बना। यही कॉलेज आगे जाकर 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना। यह आजादी के बाद देश के चार केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक था।
24 मई, 1985: तबाही का दिन, हजारों की मौत
24 मई का दिन किसी तबाही के दिन से कम नहीं है। 1985 को इसी दिन बांग्लादेश में विनाशकारी चक्रवाती तूफान आया था जिसमें दस हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।
देश-विदेश में 24 मई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1844: पहली टेलीग्राफ क्रांति- सैमुअल मोर्स ने वाशिंगटन से बाल्टीमोर के बीच दुनिया का पहला आधिकारिक टेलीग्राफ संदेश भेजा था। इस संदेश में लिखा था— “What hath God wrought” (ईश्वर ने क्या कर दिखाया है) ।
1915: थॉमस अल्वा एडिसन ने टेलीस्क्राइब का आविष्कार किया।
1931: पहली वातानुकूलित (AC) यात्री ट्रेन अमेरिका के वाल्टमोर ओहियो मार्ग पर चलाई गई।
1959: साम्राज्य दिवस का नाम बदलकर राष्ट्रमंडल दिवस किया गया।
1986: मार्गरेट थैचर इजरायल का दौरा करने वाली ब्रिटेन की पहली प्रधानमंत्री बनीं।
1994: न्यूयार्क सिटी में 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर बम हमला करने वाले चार आरोपियों में से प्रत्येक को 240 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई।
1994: मीना (सऊदी अरब) में हज से जुड़े एक समारोह के समय भगदड़ मच जाने से 250 लोगों से भी अधिक हाजियों की मृत्यु।
2000: इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान पर अपना 18 साल पुराना कब्जा समाप्त किया और वहां से उसकी सेना की वापसी हुई।
2001: नेपाल के 15 वर्षीय शेरपा तेंबा शेरी माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतह करने वाले सबसे कम उम्र के पर्वतारोही बने।
2004: उत्तर कोरिया ने मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाया।
2020: देश में कोविड-19 के 6,767 नये मामले सामने आए, जिससे संक्रमण के कुल मामले 1,31,868 तक जा पहुंचे जबकि मृतकों की संख्या 3,867 हुई।
24 मई को जन्मे व्यक्ति (Born on 24 May)
1819: महारानी विक्टोरिया – ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड की महारानी। 1837 ई. में ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड की महारानी के रूप में सिंहासन पर आरूढ़ हुई थीं। मात्र अठारह वर्ष की उम्र में ही विक्टोरिया राजगद्दी पर आसीन हो गई थीं। भारत का शासन प्रबन्ध 1858 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हाथ से लेकर ब्रिटिश राजसत्ता को सौंप दिया गया। 1877 ई. में उन्हें भारत की सम्राज्ञी घोषित किया गया था। अपने उदार विचारों के कारण ही वह भारतीय जनमानस में प्रसिद्ध हुई थीं। 22 जनवरी 1901 ई. में जब उनकी मृत्यु हुई, तो सारे भारत में शोक मनाया गया।
1896: करतार सिंह सराभा – भारत के महान क्रांतिकारी और ‘गदर पार्टी’ के प्रमुख नेता, जिन्होंने बेहद कम उम्र में देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भगत सिंह इन्हें अपना आदर्श मानते थे।
1899: काज़ी नज़रुल इस्लाम– प्रसिद्ध बांग्ला कवि, संगीतकार और दार्शनिक, जिन्हें ‘विद्रोही कवि’ के नाम से भी जाना जाता है।
1920: नीलमणि राउत्रे – उड़ीसा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।
1954: बछेंद्री पाल – माउंट एवरेस्ट पर फतह करने वाली पहली भारतीय महिला। उन्होंने 1984 में यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी।
1955: राजेश रोशन – हिंदी सिनेमा के दिग्गज संगीतकार और डायरेक्टर।
1969 – सुधीर कुमार वालिया – भारतीय थल सेना के जांबाज थे। तत्कालीन सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जनरल वी. पी. मलिक के ओडीसी रहते विशेष अनुमति प्राप्त करके कारगिल युद्ध के दौरान 29 अगस्त, 1999 को सुधीर कुमार वालिया ने जम्मू-कश्मीर में कुपवाड़ा जिले के हमुडा के जंगलों में हमला कर कुल 20 में से 9 आतंकवादियों को मार गिराने के बाद वीरगति पाई थी। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले मेजर सुधीर कुमार वालिया को मरणोपरांत 2000 में ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने दा जाट रेजिमेंट में कमीशन किया था। उन्हें विशेष पाठ्यक्रम के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका भी भेजा गया, जहां वे प्रथम रहे। सन 1994 में उन्हें ‘सेना पदक’ से भी सम्मानित किया गया था।
24 मई को हुए निधन (Died on 24 May)
1543: निकोलस कॉपरनिकस– पोलैंड के प्रसिद्ध खगोलविद और गणितज्ञ। उन्होंने दुनिया को ‘सूर्यकेन्द्रित सिद्धांत’ दिया था, जिसमें पहली बार बताया गया कि पृथ्वी नहीं, बल्कि सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र में है और पृथ्वी समेत सभी ग्रह उसके चक्कर लगाते हैं।
1999: गुरु हनुमान – भारत के महान् कुश्ती प्रशिक्षक (कोच) व पहलवान। गुरु हनुमान वास्तविक नाम विजय पाल यादव भारत के प्रख्यात कुश्ती प्रशिक्षक तो थे ही, स्वयं बहुत अच्छे पहलवान भी थे। उन्होंने सम्पूर्ण विश्व में भारतीय कुश्ती को महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। कुश्ती के क्षेत्र में विशेष उपलब्धियों के लिये उन्हें 1983 में पद्मश्री पुरस्कार मिला।
2000: मजरूह सुल्तानपुरी – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और शायर।
24 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 24 May)
राष्ट्रमंडल दिवस
भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में 24 मई को राष्ट्रमंडल दिवस मनाया जाता है। ऐसे सभी देश इस दिन को मनाते हैं, जहां कभी अंग्रजों को शासन हुआ करता था। भारत भी कॉमनवेल्थ देशों का हिस्सा है, इसलिए हर साल यहां भी राष्ट्रमंडल दिवस मनाया जाता है। इस दिन का महत्व यह है कि ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया का जन्म 24 मई 1819 को हुआ था। हालांकि, पहले इस दिन को एम्पायर डे के नाम पर जाना जाता था। साल 1916 से इसे रानी विक्टोरिया के जन्मदिन के रूप में मानाया जाने लगा। 1916 में यह साम्राज्य दिवस बनाया गया और 1958 में इसका नाम राष्ट्रमंडल दिवस हो गया।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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