कमला नेहरू अस्पताल (KNH) शिफ्टिंग मामले में सरकार को झटका, डेंटल कॉलेज के विस्तार पर भी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
शिमला | हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए प्रदेश उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार द्वारा अस्पताल की गायनी ओपीडी (Gynecology OPD) और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को आईजीएमसी (IGMC) स्थानांतरित करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले को सुक्खू सरकार के लिए एक बड़े कानूनी और राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने फालमा चौहान द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि केएनएच मात्र एक अस्पताल नहीं, बल्कि प्रदेश की महिलाओं के लिए स्वास्थ्य का एक प्रमुख केंद्र है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल शिफ्टिंग पर रोक लगाई, बल्कि डेंटल कॉलेज के प्रस्ताव पर भी यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में शपथ पत्र के जरिए विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
फिलहाल, अस्पताल में सभी सेवाएं पूर्ववत चलती रहेंगी और मरीजों को शिफ्टिंग की चिंता से राहत मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई में अदालत सरकार की दलीलों की समीक्षा करेगी।

डेंटल कॉलेज के नए प्रस्ताव पर भी रोक
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने फालमा चौहान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न केवल अस्पताल की शिफ्टिंग पर रोक लगाई, बल्कि डेंटल कॉलेज के नए प्रस्ताव को भी फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस शिफ्टिंग के पीछे का तर्क क्या है और इससे आम मरीजों को क्या लाभ होगा?
100 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को बचाने की मुहिम रंग लाई
102 साल पुराने इस अस्पताल के साथ शिमला के लोगों की भावनाएं और पीढ़ियों का इतिहास जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि पिछले कई हफ्तों से शिमला में केएनएच को बचाने के लिए जन आंदोलन छिड़ा हुआ था। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (AIDWA), माकपा (CPI-M) और कई स्थानीय संगठनों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के इस फैसले का विरोध किया था। विपक्षी दलों ने भी आरोप लगाया था कि सरकार एक ऐतिहासिक संस्थान को कमजोर कर उसे निजी हाथों में देने या उसकी पहचान मिटाने की साजिश रच रही है।
महिलाओं के लिए क्यों खास है KNH?
शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) का इतिहास 102 साल पुराना है। यह अस्पताल एक सदी से भी अधिक समय से महिलाओं और नवजातों के इलाज का सबसे भरोसेमंद केंद्र रहा है। केएनएच मुख्य रूप से प्रसूति एवं स्त्री रोग के लिए समर्पित है, जहां शिमला ही नहीं बल्कि ऊपरी हिमाचल (मंडी, किन्नौर, सिरमौर) से हजारों महिलाएं पहुंचती हैं।
क्या कहते हैं लोग
स्थानीय लोगों का मानना है कि आईजीएमसी में पहले से ही भारी दबाव है। केएनएच की सेवाओं को वहां शिफ्ट करने से मरीजों को लंबी लाइनों और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि केएनएच विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए समर्पित है और इसे शिफ्ट करने से दूर-दराज से आने वाली गर्भवती महिलाओं को भारी कठिनाई होगी।
फालमा चौहान
यह महिलाओं अधिकारों की नैतिक जीत है: फालमा चौहान
जनहित याचिका दायर करने वाली क्रांतिकारी नेता व अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव फालमा चौहान ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘न्याय की जीत’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला जनविरोधी था और इससे ऐतिहासिक संस्थान की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही थी। गायनी ओपीडी को शिफ्ट करना उन गर्भवती महिलाओं के साथ खिलवाड़ था जो दूर-दराज के इलाकों से यहां उम्मीद लेकर आती हैं। उच्च न्यायालय का फैसला यह साबित करता है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।
102 साल पुराना है कमला नेहरू अस्पताल शिमला का इतिहास

शिमला का कमला नेहरू अस्पताल का इतिहास एक सदी से भी पुराना है। कमला नेहरू अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं है, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश के इतिहास और महिला स्वास्थ्य सेवा के क्रमिक विकास का एक जीवंत प्रतीक है। 102 साल पुराने इस अस्पताल का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। इस अस्पताल की नींव ब्रिटिश काल के दौरान रखी गई थी। साल 1924 में भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रीडिंग की पत्नी, लेडी रीडिंग ने इस अस्पताल की शुरुआत की थी। उस समय इसका नाम “लेडी रीडिंग हॉस्पिटल” रखा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य शिमला और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की महिलाओं और बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना था।
ऐतिहासिक वास्तुकला: अस्पताल की मुख्य इमारत ब्रिटिश वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। उस दौर में इसे लकड़ी और पत्थरों के विशेष मेल से बनाया गया था, जो भूकंपरोधी होने के साथ-साथ पहाड़ों की ठंड के अनुकूल था। आज भी यह इमारत शिमला की हेरिटेज संपत्तियों में गिनी जाती है।
आजादी के बाद का बदलाव और नया नाम: भारत की आजादी के बाद, देश के कई संस्थानों के नाम बदले गए। 15 अगस्त 1947 के बाद इस अस्पताल का प्रबंधन राज्य सरकार के पास आया। साल 1982 में, भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की माता और स्वतंत्रता सेनानी कमला नेहरू की स्मृति में इसका नाम बदलकर “कमला नेहरू राज्य चिकित्सालय” (Kamla Nehru State Hospital) कर दिया गया।
‘मदर एंड चाइल्ड केयर‘ का मुख्य केंद्र: शुरुआत में यह एक छोटा अस्पताल था, लेकिन समय के साथ इसकी क्षमता बढ़ती गई। वर्तमान में यहाँ आधुनिक लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशुओं के लिए विशेष नर्सरी की सुविधा उपलब्ध है। दशकों से यह अस्पताल हिमाचल प्रदेश में Maternal and Child Health (MCH) का सबसे बड़ा और भरोसेमंद केंद्र बना हुआ है।
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