18 मई: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 18 मई वर्ष का 138वां (लीप वर्ष में यह 139वां) दिन है। साल में अभी 227 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 18 मई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 18 मई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
18 मई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 18 May in History)
2009: लिट्टे का खात्मा, इसी के आत्मघाती हमले ने ली थी राजीव गांधी की जान
साल 1991..भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी देशभर में चुनावी रैलियां कर रहे थे। इसी कड़ी में वो तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर पहुंचे। यहां उनकी रैली चल रही थी और एक महिला उन्हें हार पहनाने के लिए आगे बढ़ी। राजीव के सुरक्षाकर्मियों ने महिला को रोका, लेकिन राजीव ने खुद ही कहा कि उन्हें मत रोको, आने दो। वो महिला आगे बढ़ी, राजीव को हार पहनाया और उनके पांव छूने के लिए झुकी। इसी के साथ एक जोरदार धमाका हुआ। धमाके में राजीव गांधी की मौत हो गई। राजीव की मौत की जिम्मेदारी श्रीलंका के आतंकी संगठन लिट्टे ने ली।
श्रीलंका का ये अलगाववादी संगठन तमिलों के लिए अलग राष्ट्र की मांग के साथ बना था। इस संगठन का नेता वेलुपिल्लई प्रभाकरन था। 1976 में इस संगठन ने विलिकाडे में नरसंहार कर अपनी हिंसक और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। संगठन धीरे-धीरे अपनी पकड़ बढ़ाता गया। इस दौरान इस संगठन ने कई बार श्रीलंकाई नेताओं को अपना निशाना बनाया।
80 के दशक के बाद संगठन को अन्य देशों से भी सहयोग मिलने लगा और इसकी ताकत बढ़ने लगी। 1985 में श्रीलंका सरकार और तमिल विद्रोहियों के बीच शांति वार्ता की पहली कोशिश की गई जो नाकाम रही। श्रीलंका में गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए। 1987 में लिट्टे लड़ाकों से मुकाबले के लिए भारत ने भी अपनी सेना भेजी। भारत के इस कदम से लिट्टे भारत के खिलाफ हो गया और उसने बदला लेने की ठानी। राजीव गांधी की हत्या के साथ लिट्टे का बदला पूरा हुआ।
2009 में आज ही के दिन लिट्टे चीफ प्रभाकरन की मौत के साथ ही श्रीलंका सरकार ने लिट्टे के खात्मे की घोषणा की थी। इसके साथ ही तीन दशक तक श्रीलंका में आतंक की वजह रहे लिट्टे का खात्मा हो गया।
1974: पोखरण में बुद्ध मुस्कुराए
18 मई 1974 का दिन भारत के इतिहास का गौरवशाली दिन है। इस दिन भारत ने राजस्थान के पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण करके दुनिया के तमाम देशों को चकित कर दिया था। इस ऑपरेशन का नाम रखा गया था- स्माइलिंग बुद्धा।
भारत से पहले केवल 5 देशों ने ही परमाणु परीक्षण किया था। ये सभी देश संयुक्त राष्ट्र के स्थायी सदस्य थे। इस ऑपरेशन को बुद्ध जैसे शांतिप्रिय व्यक्तित्व का नाम देने की दो वजहें थीं। एक तो उस दिन बुद्ध पूर्णिमा थी, दूसरा भारत दुनिया को बताना चाहता था कि ये परीक्षण शांति के उद्देश्य से किया गया है।
1400 किलो वजनी न्यूक्लियर डिवाइस को आर्मी के बेस कैंप लाया गया। 18 मई 1974 को सुबह करीब 8 बजे विस्फोट किया गया। विस्फोट इतना तेज था कि जमीन में 45 से 75 मीटर गहरा गड्ढा हो गया था। आसपास के 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र में भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए थे।
दरअसल इस पूरे प्रोजेक्ट की नींव सालों पहले रखी जा चुकी थी। प्रोजेक्ट का जिम्मा भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के तत्कालीन अध्यक्ष राजा रमन्ना को दिया गया। उनके साथ मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम भी थे। करीब 75 वैज्ञानिकों की टीम कई सालों से लगातार प्रोजेक्ट पर लगी हुई थी। आखिरकार भारत का ये टेस्ट सफल हुआ। भारत की इस सफलता से बौखलाए अमेरिका ने भारत पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इन सब चुनौतियों को न सिर्फ नजरअंदाज किया, बल्कि टेस्ट के बाद पोखरण जाकर टेस्ट साइट का दौरा भी किया।
साल 1998 में 11 और 13 मई को भारत ने फिर से इसी जगह पर 5 और परमाणु परीक्षण किए। इसे पोखरण-2 नाम दिया गया। इसकी जिम्मेदारी अब्दुल कलाम के हाथों में थी। इस परीक्षण के सफल होने के बाद एक बार फिर भारत को तमाम तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा।
1991: हेलेन शर्मन ब्रिटेन की पहली अंतरिक्ष यात्री बनीं
आज ही के दिन 27 वर्षीय हेलेन शर्मन ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी। इसी के साथ हेलेन ब्रिटेन की पहली अंतरिक्ष यात्री बन गईं। हेलेन ने लंदन के बर्कबेक कॉलेज से केमिस्ट्री की पढ़ाई की थी। इसके बाद वे एक चॉकलेट फैक्ट्री में फूड केमिस्ट का काम करने लगीं।
एक दिन काम के बाद वो घर जा रही थीं, तभी रेडियो पर उन्होंने एक एडवर्टाइजमेंट सुना “एस्ट्रोनॉट चाहिए, कोई अनुभव जरूरी नहीं।” हेलेन ने अपनी एप्लिकेशन भेजी और 13 हजार लोगों में से वे चुनी गईं। हेलेन को अपनी यात्रा से पहले 18 महीने के कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। इनमें शारीरिक, मानसिक और भाषाई स्तर पर उनकी तैयारियां शामिल थीं।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आज ही के दिन उन्होंने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। इस मिशन के दौरान हेलेन ने स्पेस स्टेशन में मेडिकल और एग्रीकल्चर टेस्ट किए। 7 दिन, 21 घंटे और 13 मिनट अंतरिक्ष में बिताकर हेलेन 26 मई को धरती पर लौट आईं।
1912: पहली भारतीय फीचर फिल्म ‘श्री पुंडलिक’ रिलीज
दादा साहब फाल्के की ‘राजा हरिश्चंद्र’ (1913) से भी एक साल पहले, 18 मई 1912 को बॉम्बे (अब मुंबई) में पहली भारतीय फीचर-लेंथ फिल्म ‘श्री पुंडलिक’ रिलीज हुई थी। इसे रामचंद्र गोपाल तोरने (दादासाहब तोरने) ने बनाया था।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 18 मई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1703: डच और अंग्रेज सैनिकों ने जर्मनी के कोलोन शहर पर कब्जा किया।
1756: ग्रेट ब्रिटेन ने फ्रांस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1794: ट्रेकोइंग की लड़ाई- फ्रांसीसी सैनिकों ने ब्रिटिश सेना को हराया।
1804: फ्रेंच सीनेट ने नेपोलियन बोनापार्ट को फ्रांस का सम्राट (Emperor of the French) घोषित किया, जिससे यूरोपीय इतिहास की एक नई करवट शुरू हुई।
1848: जर्मनी में पहली नेशनल असेंबली का उद्घाटन हुआ।
1888: अमरीका में पहला ग्रामोफ़ोन रिकार्ड बजाकर दिखाया गया था।
1912: पहली भारतीय फीचर लेंथ फिल्म श्री पुंडालिक रिलीज हुई।
1940: जर्मनी की सेना ने ब्रूसेल्स पर कब्जा किया।
1950: अमेरिका और यूरोप की रक्षा के लिए 12 नाटो सदस्य देशों ने स्थाई संगठन बनाने पर सहमति जताई।
1974: राजस्थान के पोख़रण में अपने पहले भूमिगत परमाणु बम परीक्षण के साथ भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बना था। इस परीक्षण को ‘स्माइलिंग बुद्धा’ का नाम दिया गया था।
1980: स्ट्रैटोवोलकानो माउंट सेंट हेलेंस फटा। यह अमेरिकी इतिहास में सबसे अधिक आर्थिक रूप से विनाशकारी ज्वालामुखी घटना के रूप में गिना जाता है, जिसमें 57 लोग मारे गए। इसने 250 घरों, 47 पुलों, 24 किमी रेलवे, 298 किमी राजमार्गों को भी नष्ट कर दिया।
1991: सोमालीलैंड ने खुद को स्वतंत्र राज्य घोषित किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी अन्य देश या संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है।
1994: गाजा पट्टी क्षेत्र से अन्तिम इजराइली सैनिक टुकड़ी हटाए जाने के साथ ही क्षेत्र पर फिलिस्तीनी स्वायत्तशासी शासन लागू हुआ।
2004: इस्रायल के राफा विस्थापित कैम्प में इस्रायली सैनिकों ने 19 फ़िलिस्तीनियों को मौत के घाट उतारा।
2006: नेपाल नरेश को कर के दायरे में लाया गया।
2008: पार्श्वगायक नितिन मुकेश को मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किया।
2009: श्रीलंका की सरकार ने 25 साल से तमिल विद्रोहियों के साथ हो रही जंग के खत्म होने का एलान किया। सेना ने देश के उत्तरी हिस्से पर कब्जा किया और लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को मार डाला गया।
2012: सोशल नेटवर्किंग कंपनी फेसबुक इंक ने नास्डैक में ट्रेडिंग करना शुरू किया।
18 मई को जन्मे व्यक्ति (Born on 18 May)
1933: एच डी देवगौड़ा – इनका पूरा नाम हरदनहल्ली डोडेगौडा़ देवगौडा़ है। देवगौडा़ भारत के बारहवें प्रधानमंत्री रहे हैं। उनका कार्यकाल सन् 1096 से 1997 तक रहा। देवगौडा़ उस भारत के प्रधानमन्त्री बने जब अटल बिहारी वाजपेयी को 13 दिन सरकार चलाने के बाद प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था, क्योंकि वह बहुमत साबित करने की स्थिति में नहीं थे। देवगौडा़ संयुक्त मोर्चा सरकार के नेता के रूप में प्रधानमंत्री चयनित हुए। इन्होंने 1 जून, 1996 को शपथ ग्रहण की थी। लेकिन यह भी ज़्यादा समय तक प्रधानमंत्री नहीं रहे। लगभग 10 माह तक प्रधानमंत्री रहने के बाद इन्हें भी अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इसके पूर्व 1994 से 1996 तक वे कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे।
1951: जगदीप धनखड़ – भारत के 14वें उपराष्ट्रपति हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उन्होंने चंद्रशेखर मंत्रालय में संसदीय मामलों के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया।
18 मई को हुए निधन (Died on 18 May)
2012: जय गुरुदेव – प्रसिद्ध धार्मिक गुरु। जय गुरुदेव के भक्तों की संख्या देश-विदेश में 20 करोड़ से ज्यादा है और जो उनके एक इशारे पर दौड़े चले आते थे। गुरु के महत्व को सर्वोपरि रखने वाले बाबा जय गुरुदेव भी इसी नाम से प्रसिद्ध हो गए। बाबा की सोच व विचार गांव और ग़रीब दोनों से जुड़े थे। बाबा कहते थे- शरीर तो किराए की कोठरी है, इसके लिए 23 घंटे दो लेकिन इस मंदिर में बसने वाले देव यानी आत्मा के लिए कम से कम एक घंटा ज़रूर निकालो।
2017: रीमा लागू – हिन्दी फ़िल्मों की शानदार अभिनेत्री थीं।
18 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 18 May)
अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस
संग्रहालयों की विशेषता और उनके महत्व को समझते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 18 मई 1983 को ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय किया। इसका उद्देश्य आम जनता में संग्रहालयों के प्रति जागरुकता लाना और उन्हें संग्रहालयों में जाकर अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरुक बनाना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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