30 May 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप आज यानी 30 मई 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
ज्योतिषीय गणना: ग्रह और नक्षत्र
शक सम्वत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम सम्वत: 2083 (सिद्धार्थि)
तिथि: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी (सुबह 08:35 बजे तक, तत्पश्चात पूर्णिमा तिथि प्रारंभ)
नक्षत्र: विशाखा (शाम 04:36 बजे तक, तत्पश्चात अनुराधा नक्षत्र)
योग: परिघ (दोपहर 01:21 बजे तक, फिर शिव योग)
करण: वणिज (सुबह 08:35 बजे तक), विष्टि/भद्रा (शाम 07:44 बजे तक), फिर बव
दिन: शनिवार
प्रविष्टे: 16 ज्येष्ठ
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:24 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:13 बजे
चन्द्रोदय: शाम 06:17 बजे
चन्द्रास्त: प्रातः 04:55 बजे (31 मई की अल सुबह)
चन्द्र राशि: चंद्रमा दोपहर 11:42 बजे तक तुला राशि में संचार करेंगे, तत्पश्चात वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य वृषभ राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:52 से 04:38 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:35 से 03:30 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:12 से 07:34 बजे तक।
अमृत काल: सुबह 08:42 से 10:14 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 08:51 से 10:35 बजे तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 02:02 से 03:46 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: प्रातः 05:24 से 06:19 बजे तक, तत्पश्चात प्रातः 06:19 से 07:14 बजे तक।
भद्रा: सुबह 08:35 से शाम 07:44 बजे तक (मृत्यु लोक की भद्रा)।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी और पूर्णिमा तिथि का पावन संयोग है। आज के दिन सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व ‘वट सावित्री पूर्णिमा व्रत’ का मुख्य पूजन और ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की शुरुआत हो रही है (पूर्णिमा तिथि का चंद्रोदय व्यापिनी और रात्रिकालीन होना अत्यंत शुभ माना गया है)। सुहागिन महिलाओं के लिए यह अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना का महापर्व है। शनिवार और अनुराधा नक्षत्र का यह विशेष योग शनि देव की कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों के निवारण के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार का दिन है (जो न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है) और साथ ही ज्येष्ठ पूर्णिमा व वट सावित्री व्रत का महासंयोग है, अतः कष्टों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए आज ये विशेष उपाय करें:
वट वृक्ष का पूजन और परिक्रमा: आज सुहागिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करें, उसमें कच्चा सूत लपेटकर 7 या 108 बार परिक्रमा करें। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान: आज शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष के पास जाकर सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें। इससे शनि दोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
चंद्रदेव को अर्घ्य और दान: पूर्णिमा की रात को कच्चे दूध में गंगाजल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। ज्येष्ठ की गर्मी को देखते हुए आज किसी जरूरतमंद को जल, छतरी, चप्पल या सफेद खाद्य पदार्थों (जैसे चावल, चीनी) का दान करें। इससे मानसिक शांति और आर्थिक समृद्धि मिलती है।
सावधानी: आज शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहता है। यदि पूर्व दिशा की यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो आज सुबह घर से निकलने से पहले अदरक या उड़द के दाने खाकर और भगवान का स्मरण करके ही बाहर निकलें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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