दिल्ली के एक मंजर ने बदला जीवन का रास्ता, अब देवभूमि के लाचार बच्चों के लिए मसीहा बनी यह युवा शिक्षिका
सोसमी देष्टा: शिमला
समाज सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी समाज में सकारात्मक बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम बन रही है। इसी कड़ी में देवभूमि हिमाचल की एक युवा शिक्षिका पलवी शर्मा गरीब और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए एक सराहनीय मशाल बनकर उभरी हैं। वर्तमान में वह केएसडब्ल्यू फाउंडेशन से एक समर्पित शिक्षक के रूप में जुड़ी हुई हैं। पलवी न केवल इन बच्चों को किताबी ज्ञान दे रही हैं, बल्कि उन्हें एक बेहतर और उज्ज्वल भविष्य का सपना देखना भी सिखा रही हैं।
मेहनतकश परिवार की लाडली का सफर
9 नवंबर 2001 को मंडी जिला के धर्मपुर ब्लॉक के छोटे से गांव लवनपुर (बरोटी) में एक बेहद साधारण और मेहनतकश परिवार में पलवी का जन्म हुआ। पिता हरवंश लाल जो कि एक ढाबा चलाते हैं और माता जीवा देवी जो कि एक कुशल गृहणी हैं, उन्होंने अपनी बेटी को हमेशा ईमानदारी के संस्कार दिए। दादा-दादी, माता-पिता और एक भाई के भरे-पूरे परिवार में पली-बढ़ी पलवी की प्रारंभिक शिक्षा उनके अपने गांव बरोटी में ही हुई। इसके बाद उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई धर्मपुर से पूरी की और शिक्षक बनने के उद्देश्य से विजय मेमोरियल कॉलेज बगला नेरचौक से बीएड की डिग्री हासिल की।
दिल्ली का वो मंजर जिसने बदल दिया जीवन का रास्ता
पलवी हमेशा से ऐसी नहीं थीं। वह भी हिमाचल की अन्य आम लड़कियों की तरह अपनी पढ़ाई, सहेलियों और खेल-कूद की दुनिया में मस्त रहा करती थीं। लेकिन उनके जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनके सोचने का नजरिया हमेशा के लिए बदल दिया। पलवी बताती हैं कि जब वह महज छठी कक्षा में पढ़ती थीं, तब एक बार अपने चाचू से मिलने दिल्ली जा रही थीं। दिल्ली के बस स्टैंड पर उतरते ही उनके सामने भिखारियों की एक बहुत बड़ी भीड़ जमा हो गई, जिसमें मासूम बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा थी। भूख और लाचारी से बेहाल उन बच्चों का वो दृश्य 11 साल की पलवी को भीतर तक झकझोर गया। उन्होंने बिना कुछ सोचे अपने पास मौजूद सारे पैसे उन बच्चों को दे दिए। बस, वही वो ऐतिहासिक पल था जिसने पलवी के भीतर समाजसेवा के जज्बे को एक नया जन्म दिया।
जुनून और समाज सेवा की अनोखी जिद
दिल्ली से लौटने के बाद पलवी पूरी तरह बदल चुकी थीं। उनके सिर पर समाजसेवा का जुनून इस कदर हावी हुआ कि उन्होंने अपने सारे व्यक्तिगत शौक छोड़ दिए। घरवालों से मिलने वाली पॉकेट मनी को वह खुद पर खर्च करने के बजाय गरीब बच्चों में बांटने लगीं। शुरुआत में समाज और परिवार का पूरा साथ नहीं मिला। वह आगे की उच्च शिक्षा भी सोशल वर्क के क्षेत्र में करना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें बीएड की राह चुननी पड़ी। कुछ दोस्त आज भी उनके इस सेवा भाव को पागलपन का नाम देते हैं, जिसका पलवी को अफसोस तो होता है, लेकिन बहुत से सच्चे दोस्त उनके इस सफर में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े भी होते हैं।
जन्मदिन का जश्न और खुशियां बांटने का जुदा अंदाज

जहां आज के दौर के युवा अपने जन्मदिन पर महंगे होटलों और क्लबों में हजारों रुपये उड़ा देते हैं, वहीं पलवी शर्मा इस खास दिन को मनाने का एक अनोखा और प्रेरणादायी तरीका अपनाती हैं। वह अपना हर जन्मदिन इन जरूरतमंद बच्चों के बीच जाकर मनाती हैं। बच्चों के साथ केक काटना, उन्हें उपहार देना और उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना ही पलवी की जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल बन चुका है। पलवी का साफ मानना है कि इन मासूम बच्चों के चेहरों पर आने वाली एक छोटी सी मुस्कान दुनिया की किसी भी महंगी सुख-सुविधा और पार्टी से करोड़ों गुना बढ़कर है।
सोलह श्रृंगार के सपने और जीवनसाथी की अनूठी शर्त

एक आम भारतीय लड़की की तरह पलवी भी अपने सुनहरे भविष्य और वैवाहिक जीवन के खूबसूरत सपने संजोती हैं। वह सोलह श्रृंगार करने और एक सुंदर गृहस्थी बसाने की चाह तो रखती हैं, लेकिन इसके लिए उनकी एक बेहद अनूठी और नेक शर्त है। पलवी अपने जीवन में एक ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो उनके धन या रूप से नहीं, बल्कि उनके विचारों और समाजसेवा के इस पवित्र मिशन से प्यार करे। वह एक ऐसे हमसफर की तलाश में हैं जो उनके इस सेवा के मार्ग में कभी रुकावट न बने, बल्कि खुद उनके साथ इस राह पर हमकदम बनकर आगे बढ़े।
एनजीओ से पहाड़ों में बदलाव का बड़ा खाका

पलवी शर्मा का अंतिम लक्ष्य हिमाचल प्रदेश के कोने-कोने तक शिक्षा की अलख जगाना है। इसके लिए वह भविष्य में अपना एक स्वतंत्र एनजीओ स्थापित करने का सपना देख रही हैं। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से लाचार और बेसहारा बच्चों को मुफ्त शिक्षा, सही करियर मार्गदर्शन और हर संभव वित्तीय सहायता प्रदान करना होगा। पलवी का यह दृढ़ विश्वास है कि इस दुनिया में कोई भी बच्चा सिर्फ इसलिए अनपढ़ नहीं रहना चाहिए क्योंकि उसके माता-पिता के पास पैसे नहीं हैं।
पैसों की अंधी दौड़ के खिलाफ नशा मुक्ति का महासंकल्प

आज समाज में हर तरफ फैली पैसों की अंधी दौड़ और लोगों की भौतिकवादी सोच को देखकर पलवी का मन बेहद दुखी होता है। वह कहती हैं कि लोग केवल धन कमाने के पीछे भाग रहे हैं और मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। अपनी भविष्य की योजनाओं को लेकर वह बेहद स्पष्ट हैं। वह शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर काम करना चाहती हैं। उनका सबसे बड़ा संकल्प हिमाचल के युवाओं को गर्त में धकेल रहे नशे के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ना है। वह नशा निवारण के क्षेत्र में उतरकर युवाओं को एक नई दिशा देना चाहती हैं क्योंकि उनका मानना है कि शिक्षित और नशामुक्त युवा ही एक सशक्त समाज की असली नींव रख सकते हैं।
पलवी के ये विचार जो पैदा करते हैं समाजसेवा का जज्बा

पलवी के अनुसार बुजुर्गों की मुस्कान और आशीर्वाद ही उनका सबसे बड़ा सम्मान है। वह मानती हैं कि हर बच्चा शिक्षा का और हर बुजुर्ग सम्मान का हकदार है। जरूरतमंदों की मदद करना उनके लिए केवल सेवा नहीं, बल्कि इंसानियत का फर्ज है, जिससे मिलने वाली खुशी की तुलना किसी और चीज से नहीं की जा सकती। बेसहारा जानवरों, बच्चों और बुजुर्गों की निस्वार्थ सेवा को वह अपने दिल के करीब मानती हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक छोटा सा प्रयास भी किसी का जीवन बदल सकता है, और यदि हम सब मिलकर एक कदम बढ़ाएं, तो समाज में बहुत बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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