27 मई: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 27 मई वर्ष का 147वां (लीप वर्ष में यह 148वां) दिन है। साल में अभी 218 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 27 मई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 27 मई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
27 मई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 27 May in History)
1964: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का निधन, 5 दिन पहले ही उत्तराधिकारी का नाम पूछने पर कहा था- मुझे नहीं लगता कि मेरी मौत जल्दी होनी है
27 मई 1964 की दोपहर का वक्त, रेडियो पर दो बजे के समाचार में ये बताया गया कि देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं रहे। इसके बाद ये खबर आग की तरह पूरी दुनिया में फैल गई। महज दो घंटे बाद नेहरू सरकार के गृह मंत्री गुलजारी लाल नंदा को कार्यवाहक प्रधानमंत्री बना दिया गया। इसके बाद शुरू हुई पंडित नेहरू के उत्तराधिकारी की खोज, क्योंकि नेहरू खुद इस बारे में जीते जी कुछ नहीं कह गए थे। उनके उत्तराधिकारी की खोज का जिम्मा मिला उस वक्त कांग्रेस के अध्यक्ष के कामराज को। जो नाम सबसे पहले रेस में आया वो था मोरारजी देसाई का, लेकिन इस नाम पर सहमति नहीं बन पा रही थी। चार दिन की मशक्कत के बाद कांग्रेस ने लाल बहादुर शास्त्री को नेता चुना और इसके साथ ही वो देश के अगले प्रधानमंत्री बने।
पंडित नेहरू के निधन के 13 दिन बाद लाल बहादुर शास्त्री ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
नेहरू 16 साल 9 महीने और 12 दिन भारत के प्रधानमंत्री रहे। जो आज तक रिकॉर्ड है। इस दौरान उन्होंने कभी भी अपने उत्तराधिकारी के बारे में कोई संकेत नहीं दिए। यहां तक कि उनके निधन से 5 दिन पहले उनसे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया कि मैंने इस बारे में सोचना तो शुरू किया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि मेरी मौत इतनी जल्दी होने वाली है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के अगले दिन वो चार दिन के लिए देहरादून चले गए। दरअसल उसी साल जनवरी में पंडित नेहरू को हार्ट अटैक आया था। इसके बाद से उनकी सेहत खराब रहती थी। इसी वजह से वो चार दिन की छुट्टी पर देहरादून गए थे। 26 मई की रात करीब 8 बजे वो दिल्ली पहुंचे। यहां से सीधे प्रधानमंत्री हाउस गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस रात वो रातभर करवटें बदलते रहे। उन्हें पीठ और कंधे में दर्द था।
सुबह करीब 6.30 बजे उन्हें पहले पैरालिटिक अटैक आया और फिर हार्ट अटैक। इसके बाद वो अचेत हो गए। इंदिरा गांधी के फोन के बाद तीन डॉक्टर पीएम हाउस पहुंचे। उन्होंने पूरी कोशिश की, लेकिन पंडित नेहरू का शरीर रिस्पॉन्स नहीं कर रहा था। कई घंटों की कोशिश के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
दोपहर दो बजे के रेडियो समाचार में पंडित नेहरू के निधन की खबर दी गई। निधन की खबर फैलते ही पीएम आवास के बाहर लाखों लोगों की भीड़ जुट गई। कहते हैं कि उस दौर में भी करीब ढाई लाख लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए थे।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 27 मई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1153: मेलकॉलम-IV स्कॉटलैंड के राजा बने।
1199: जोन की इंग्लैंड का राजा के रूप में ताजपोशी की गई।
1703: जार पीटर ने नेवा नदी के शहर पर बसे रूस की सांस्कृतिक राजधानी सेंट पीटर्सबर्ग की नींव रखी। इसे 1917 की रूसी क्रांति के गवाह के तौर पर पहचान मिली। ये रूस का दूसरा सबसे बड़ा शहर है।
1813: अमेरिका ने फोर्ट जार्ज, कनाडा पर कब्जा किया।
1941: दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन जंगी जहाज बिस्मार्क को ब्रिटिश नौसेना ने डुबोया।
1948: आज ही के दिन महात्मा गांधी की हत्या का मुकदमा शुरू हुआ था। गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को की गई थी।
1994: रूसी मूल के उपन्यासकार अलेक्सांद्र सोलजेनित्सिन 20 साल तक अमेरिका में निर्वासित जीवन बिताने के बाद रूस वापस लौटे।
1999: बोत्सवाना की सुन्दरी पुले क्वेलागोव मिस यूनिवर्स चुनी गयीं।
1999: विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण पुरस्कार (सोफी पुरस्कार) डरमन हेली (सं.रा. अमेरिका) तथा थॉमस केयरी (भारत) को प्रदान किया गया।
2000: फिजी में महेन्द्र चौधरी सरकार बर्खास्त, राष्ट्रपति मारा ने प्रशासन सम्भाला।
2005: दक्षिण अफ़्रीका की राजधानी प्रिटोरिया का नाम बदलकर श्वाने करने का निर्णय लिया गया।
2006: इंडोनेशिया के जावा द्वीप में आए 6.4 तीव्रता के भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 5,700 से अधिक लोगों की जान चली गई और हजारों लोग घायल हुए।
2008: केन्द्र सरकार ने सीमेंट निर्यात पर लगाए गए प्रतिबन्ध को वापस लिया।
2010: भारत ने उड़ीसा के चांदीपुर में बालसोरा ज़िले में परमाणु तकनीक से लैस धनुष और पृथ्वी 2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। पृथ्वी 2 मिसाइल धरती से धरती पर मारक क्षमता वाली बेलिस्टिक मिसाइल है जिसकी रेंज 350 किमी है। जबकि धनुष पृथ्वी मिसाइल का नौसेना संस्करण है।
2010: रूस के दक्षिणी शहर स्टारवोपोल में एक बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हो गए।
2011: ग्लोबल इंटरनेट सर्च इंजन गूगल अब भारतीय शहरों की हर गली-नुक्कड़ की तस्वीरें इंटरनेट पर दिखाने जा रहा है। गूगल अर्थ के जरिए जहाँ अब तक आप धरती के विभिन्न हिस्सों की सैटलाइट तस्वीरें देख सकते थे, वहीं गूगल के नए फीचर स्ट्रीट व्यू से गली-नुक्कड़ तक को देखा जा सकेगा।
2016: शहीद हंगपन दादा का सर्वोच्च बलिदान– भारतीय सेना के जांबाज सैनिक हंगपन दादा उत्तर-पूर्वी भारत में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च शांति कालीन सैन्य सम्मान ‘अशोक चक्र‘ से सम्मानित किया गया।
27 मई को जन्मे व्यक्ति (Born on 27 May)
1894: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी– हिंदी के ख्यातिप्राप्त आलोचक और निबंधकार।
1957: नितिन गडकरी – नितिन गडकरी एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं तथा भारत सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग, जहाज़रानी, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री हैं। इससे पहले 2010-1013 तक वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। 52 वर्ष की आयु में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष बनने वाले वे इस पार्टी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष थे।
1962: रवि शास्त्री – भारत के प्रसिद्ध पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान समय में उम्दा कमेंटेटर हैं। इन्होंने बतौर क्रिकेट खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 1981 से 1992 तक टेस्ट क्रिकेट और एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला है। रवि शास्त्री ने अपने क्रिकेट कैरियर में धीमी गति के गेंदबाज और बल्लेबाज की भूमिका निभाई है। इस कारण इन्हें एक ऑल राउंडर के तौर पर जाना जाता था। रवि शास्त्री 15 जुलाई, 2017 से भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के पद पर हैं।
27 मई को हुए निधन (Died on 27 May)
1919: कंदुकूरी वीरेशलिंगम – तेलुगु भाषा के प्रसिद्ध विद्वान, जिन्हें आधुनिक तेलुगु साहित्य में ‘गद्य ब्रह्मा‘ के नाम से ख्याति मिली।
1986: अजय कुमार मुखर्जी – पश्चिम बंगाल के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे। उन्हें तीन बार प्रदेश का मुखिया बनने का गौरव प्राप्त हुआ। वह 1 मार्च, 1967 से 21 नवंबर, 1967 तक, इसके बाद 25 फ़रवरी, 1969 से 16 मार्च, 1970 तक और फिर 2 अप्रॅल, 1971 से 25 जून, 1971 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे।
2016: हंगपन दादा – भारतीय सेना के जांबाज सैनिक, जिन्होंने आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहादत प्राप्त की। वे 27 मई, 2016 को उत्तरी कश्मीर के शमसाबाड़ी में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए। वीरगति प्राप्त करने से पूर्व उन्होंने चार हथियारबंद आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। इस शौर्य के लिए 15 अगस्त, 2016 को उन्हें मरणोपरांत ‘अशोक चक्र‘ से सम्मानित किया गया। ‘अशोक चक्र‘ शांतिकाल में दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।
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हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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