Sonam Wangchuk Hunger Strike: देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार सुबह एक बार फिर सियासी और सामाजिक संग्राम का अखाड़ा बन गया। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद, छात्र आत्महत्याओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने तड़के जबरन धरनास्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इसके तुरंत बाद भारी पुलिस बल ने पूरे जंतर-मंतर को खाली कराते हुए छावनी में तब्दील कर दिया और वहां जाने वाले सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी है।
लद्दाख के ‘क्लाइमेट फास्ट’ के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था को बचाने के लिए वांगचुक का यह तीसरा बड़ा आंदोलन अब सफदरजंग अस्पताल से लेकर संसद के गलियारों तक गूंजने के लिए तैयार है। 20 जुलाई को होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।
इस बीच, सफदरजंग अस्पताल प्रशासन की ओर से जानकारी मिली है कि इमरजेंसी में भर्ती सोनम वांगचुक फिलहाल होश में हैं और उनके स्वास्थ्य मानकों को स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश और गिरती सेहत का हवाला
दिल्ली पुलिस और नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन सलाह पर की गई है। डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी दी थी कि 28 जून से भूखे बैठे 60 वर्षीय वांगचुक का वजन 9 किलोग्राम (लगभग 20%) गिर चुका है। फैट्स खत्म होने के बाद अब उनकी मांसपेशियां प्रभावित हो रही थीं और अंदरूनी अंगों पर खतरा मंडरा रहा था। फिलहाल उन्हें सफदरजंग अस्पताल की इमरजेंसी में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है, जहां उनके वाइटल्स स्थिर बताए जा रहे हैं।
“ये पुलिस नहीं, गुंडे हैं…” – CJP का मारपीट और लाठीचार्ज का आरोप
इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस पर बर्बरता के गंभीर आरोप लगाए हैं। सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने कहा कि सुबह 7 बजे पुलिस बल ने धरनास्थल पर धावा बोला और अनशन से बेहद कमजोर हो चुके सोनम सर को गालियां देते हुए घसीटकर ले गए। जब मैंने विरोध करना चाहा, तो पुलिस ने मेरे साथ भी सड़कों पर मारपीट की। यह लोकतंत्र की हत्या है। वहीं सीजेपी प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया कि देर रात से ही आंदोलन को कुचलने की कोशिशें जारी थीं और सुबह शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड़ा गया।
अगर 20 को मार्च सफल नहीं हुआ, तो भूत बनकर आऊंगा: सोनम वांगचुक
अस्पताल ले जाए जाने से चंद घंटे पहले शुक्रवार रात सोनम वांगचुक ने एक भावुक और दमदार वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने बेहद कमजोर आवाज में कहा कि “मेरा शरीर भले ही टूट रहा है, लेकिन हौसला चट्टान की तरह मजबूत है। मैं 20 जुलाई तक हर हाल में खुद को जिंदा रखूंगा ताकि करोड़ों छात्रों के भविष्य के लिए प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च का नेतृत्व कर सकूं। अगर सरकार ने हमें रोका और हमारा मार्च सफल नहीं हुआ, तो मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।”
वांगचुक ने तंज कसा कि यदि देश में प्याज की कीमतों पर सरकारें गिर सकती हैं और जवाबदेही तय हो सकती है, तो करोड़ों युवाओं के भविष्य और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्यों नहीं होना चाहिए?
विपक्ष हुआ लामबंद, केंद्र पर तीखे तीर
सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने की खबर फैलते ही सियासी पारा चढ़ गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा संसद संजय सिंह ने कहा कि “यह सरासर गुंडागर्दी और सत्ता का अहंकार है। मोदी जी, जिस युवा पर लट्ठ चला रहे हो, वही आपका तख्त उखाड़ेगा। 21 दिन से अनशन कर रहे व्यक्ति की मांग सुनने के बजाय उसे कैद किया जा रहा है।”
6 जून से शुरू हुई इस जंग की आखिर क्या हैं प्रमुख मांगें?
डिजिटल स्पेस के एक व्यंग्यात्मक अभियान से शुरू हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने 6 जून से जंतर-मंतर पर मोर्चा खोला था। 20 जून से यह अनिश्चितकालीन धरने में बदला और 9वें दिन सोनम वांगचुक महात्मा गांधी को राजघाट पर श्रद्धांजलि देकर इस अनशन में शामिल हुए थे।
आंदोलन की मुख्य मांगें
NEET, CBSE, CUET और SSC परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत इस्तीफा दें।
पेपर लीक और धांधली के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित न्याय और मुआवजा मिले।
देश की पूरी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी और व्यापक ढांचागत सुधार (Reforms) किए जाएं।
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