23 May 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप आज यानी 23 मई 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
ज्योतिषीय गणना: ग्रह और नक्षत्र
शक सम्वत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम सम्वत: 2083 (सिद्धार्थि)
तिथि: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी (सुबह 10:27 तक, तत्पश्चात अष्टमी)
नक्षत्र: मघा (सुबह 07:44 तक, तत्पश्चात पूर्वाफाल्गुनी)
योग: व्याघात (दोपहर 01:46 तक, फिर हर्षण)
करण: वणिज (सुबह 10:27 तक), विष्टि/भद्रा (रात 09:22 तक), फिर बव
दिन: शनिवार
प्रविष्टे: 09 ज्येष्ठ
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:22 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:15 बजे
चन्द्रोदय: प्रातः 11:27 बजे
चन्द्रास्त: रात 01:00 बजे (24 मई की मध्यरात्रि)
चन्द्र राशि: चंद्रमा पूरा दिन और रात सिंह राशि में संचार करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य वृषभ राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:54 से 04:38 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:36 से 03:31 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:14 से 07:36 बजे तक।
अमृत काल: रात 11:45 से 01:14 तक (24 मई की मध्यरात्रि)।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 09:00 से 10:43 बजे तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 02:07 से 03:50 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 05:22 से 06:17 बजे तक, तत्पश्चात सुबह 06:17 से 07:12 बजे तक।
भद्रा: सुबह 10:27 से रात 09:22 तक (अशुभ समय)।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
आज ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी व अष्टमी तिथि का योग है। आज के दिन मुख्य रूप से ‘मकर संक्रांति’ की तरह ही गंगा दशहारा की श्रृंखला में मां गंगा के पूजन का मानसिक संकल्प व पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। चूंकि आज सुबह 07:44 तक मघा नक्षत्र रहेगा, जो कि पितरों का नक्षत्र माना जाता है, इसलिए सुबह के समय किया गया तर्पण और दान विशेष फलदायी होगा। इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रारंभ होगा, जो सांसारिक सुखों और कलात्मक कार्यों के लिए उत्तम है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार का दिन है, जो न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनि देव को समर्पित है, अतः जीवन से संकटों की मुक्ति, ढैय्या-साढ़ेसाती के कुप्रभावों को कम करने और कार्यों में सफलता के लिए आज ये विशेष उपाय करें:
पीपल के वृक्ष में जल और दीपक: आज शाम के समय किसी पुराने पीपल के वृक्ष के पास जाएं। वहां जल अर्पित करें और सरसों के तेल का एक चौमुखा दीपक जलाएं। ओम शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करते हुए 7 बार परिक्रमा करें। इससे शनि दोष शांत होता है।
काले तिल और उड़द का दान: आज किसी जरूरतमंद, कुष्ठ रोगी या असहाय व्यक्ति को काले तिल, काली उड़द की दाल, सरसों का तेल या छाता दान करें। शनिवार के दिन किया गया यह दान राहु-केतु और शनि की अशुभता को दूर करता है।
हनुमान चालीसा का पाठ: शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए आज हनुमान जी के मंदिर जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं और बजरंग बाण या हनुमान चालीसा का पाठ करें। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान भक्तों को शनि देव कभी प्रताड़ित नहीं करते।
सावधानी: आज सुबह 10:27 से लेकर रात 09:22 तक ‘भद्रा’ का साया रहेगा। भद्रा काल में कोई भी नया व्यापारिक सौदा, गृह प्रवेश, मुंडन या मांगलिक कार्य करना पूर्णतः वर्जित माना गया है। अतः आज रात 09:22 के बाद ही कोई महत्वपूर्ण या नया कार्य संपन्न करें अथवा विद्वानों की सलाह लें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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