31 मई: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 31 मई वर्ष का 151वां (लीप वर्ष में यह 152वां) दिन है। साल में अभी 214 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 31 मई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 31 मई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
31 मई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 31 May in History)
कांग्रेस ने आज ही पार्टी के झंडे को दी थी अनौपचारिक मान्यता, कुछ बदलावों के बाद यही झंडा भारत का तिरंगा बना
1921 में आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक झंडे को अपने अनौपचारिक झंडे के तौर पर मान्यता दी थी। इस झंडे को पिंगली वेंकैया ने बनाया था। झंडे में लाल और हरा रंग था जो भारत के दो प्रमुख धर्मों का प्रतिनिधित्व करता था। पिंगली जब इस झंडे को लेकर गांधी जी के पास गए, तो उन्होंने झंडे में एक सफेद रंग और चरखे को भी लगाने की सलाह दी। सफेद रंग भारत के बाकी धर्मों और चरखा स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भर होने का प्रतिनिधित्व करता था।
1923 में नागपुर में एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों ने इस झंडे को अपने हाथों में थाम रखा था। सुभाष चंद्र बोस ने भी द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इस झंडे का इस्तेमाल किया था। इसी दौरान झंडे के रंगों को धर्मों से जोड़ने पर विवाद भी होने लगा। कई लोग झंडे में चरखे की जगह गदा भी जोड़ने की मांग करने लगे तो कई लोग झंडे में एक और गेरुआ रंग जोड़ने की मांग करने लगे। सिखों ने भी मांग की कि या तो झंडे में पीला रंग जोड़ा जाए या सभी तरह के धार्मिक प्रतीकों को हटाया जाए।
इस विवाद को सुलझाने के लिए 1931 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 7 लोगों की एक कमेटी बनाई। कमेटी ने सलाह दी कि झंडे को केवल एक ही रंग का बनाया जाए। कमेटी का ये सुझाव नहीं माना गया। इसी साल कांग्रेस ने पिंगली वेंकैया के बनाए झंडे को पार्टी के आधिकारिक झंडे के तौर पर मान्यता दी।
आजादी के बाद संविधान समिति ने कांग्रेस के इसी झंडे को कुछ बदलावों के साथ भारत देश का झंडा बनाने का फैसला लिया। इस झंडे में एक बड़ा बदलाव चरखे को लेकर था। झंडे के बीच में जो चरखा था, उसकी जगह अशोक चक्र लगाया गया। इस झंडे को पहली बार 22 जुलाई 1947 के दिन आधिकारिक तौर पर फहराया गया।
आजादी के बाद भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश बन चुका था। लिहाजा झंडे के रंगों की धर्म के आधार पर व्याख्या को बदला गया। कहा गया कि इस झंडे के रंगों का धर्मों से कोई लेना-देना नहीं है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इस झंडे के रंगों को लेकर कहा कि “केसरिया रंग त्याग या उदासीनता को दर्शाता है। हमारे नेताओं को भौतिक लाभ के प्रति उदासीन होना चाहिए और अपने काम के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए। झंडे के बीच में सफेद रंग एक प्रकाश है, जो हमारे आचरण के मार्गदर्शन के लिए सत्य का रास्ता है। हरा रंग मिट्टी और पर्यावरण से हमारे संबंध को दर्शाता है। झंडे के बीच में अशोक चक्र धर्म के नियम का पहिया है। इस झंडे के तले काम करने वाले लोगों का सिद्धांत सत्य होना चाहिए। साथ ही ये गति का प्रतीक भी है। गति ही जीवन है और ठहराव मृत्यु है। भारत को बदलाव का विरोध नहीं करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए।”
उसके बाद से अब तक भारत के झंडे में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि भारत के नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व के अलावा किसी भी दिन अपने घर और दुकानों में झंडा फहराने की छूट नहीं थी। 2002 में इंडियन फ्लैग कोड में बदलाव किए गए। आज हर भारतीय नागरिक किसी भी दिन अपने घर, दुकान, फैक्ट्री, ऑफिस में सम्मान के साथ झंडा फहरा सकता है।
1929: मिकी माउस को मिली थी आवाज
आज ही के दिन साल 1929 में बच्चों के पसंदीदा कार्टून मिकी माउस को आवाज मिली थी। डिज्नी ने कार्निवाल किड नाम से कार्टून रिलीज किया था जिसमें मिकी माउस ने अपना पहला शब्द ‘हॉट डॉग’ बोला था। इसी के साथ मिकी माउस दुनिया का पहला बोलता हुआ कार्टून कैरेक्टर बन गया। मिकी की इस आवाज के पीछे ओरिजनल आवाज कार्ल स्टर्लिंग की थी।
दर्शकों ने मिकी माउस को सबसे पहले 1928 में आई फिल्म ‘स्टीमबोट विली’ में देखा था। कहा जाता है कि मिकी माउस बनाने का आइडिया वॉल्ट डिज्नी को काम करने के दौरान अपनी डेस्क के पास घूम रहे एक चूहे को देखकर आया था। तब मिकी माउस केवल हंसता या सीटी बजाता था। आज मिकी माउस इतना फेमस है कि लोग डिज्नी को मिकी माउस से ही जानते हैं। 130 से भी ज्यादा फिल्मों में ये कार्टून कैरेक्टर नजर आ चुका है।
आज वर्ल्ड नो टोबैको डे
आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। तंबाकू के इस्तेमाल से होने वाली स्वास्थ्य परेशानियों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल आज ही के दिन इसे मनाया जाता है। 1987 में पहली बार WHO के सदस्य देशों ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। WHO ने एक प्रस्ताव पास कर 7 अप्रैल 1988 के दिन को वर्ल्ड नो स्मोकिंग डे के तौर पर मनाने की घोषणा की। इसी साल एक और प्रस्ताव पास कर हर साल 31 मई को वर्ल्ड नो टोबैको डे मनाने की घोषणा की गई। उसके बाद से ही हर साल 31 मई को दुनियाभर में इस दिन को मनाया जाता है। हर साल इस दिन को मनाने के लिए अलग-अलग थीम निर्धारित की जाती है। इस साल की थीम है ‘Quit tobacco to be a winner’ यानी ‘जीतने के लिए तंबाकू छोड़ें’।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 31 मई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1659: ‘रॉयल थिएटर’ की शुरुआत- ब्रिटेन के लंदन में मशहूर ‘थिएटर रॉयल’ (Theatre Royal, Drury Lane) में पहली बार किसी नाटक का मंचन हुआ। यह दुनिया के सबसे पुराने और आज भी संचालित होने वाले थिएटरों में से एक है।
1859: बिग बेन (Big Ben) ने काम शुरू किया- लंदन के संसद भवन (पैलेस ऑफ वेस्टमिंस्टर) के क्लॉक टॉवर में लगी प्रसिद्ध विशाल घड़ी ‘बिग बेन’ ने पहली बार समय बताना शुरू किया था। यह अपनी सटीकता और विशाल घंटे के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
1727: फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड ने पेरिस संधि पर हस्ताक्षर किये।
1759: अमेरिका के उत्तरपूर्वी प्रांत पेनसिल्वेनिया में सभी थियेटर के कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया।
1774: भारत में पहला डाक सेवा कार्यालय खोला गया।
1878: अमेरिकी कांग्रेस ने डॉलर के सर्कुलेशन को घटाया।
1907: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में पहली बार टैक्सी सेवा शुरू की गई।
1911: ‘टाइटैनिक’ जहाज का जलावतरण- उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में दुनिया के सबसे बड़े और भव्य यात्री जहाज आरएमएस टाइटैनिक (RMS Titanic) के ढांचे को पहली बार पानी में उतारा गया था, जिसे देखने के लिए 1 लाख से अधिक लोग जुटे थे। (इसकी पहली यात्रा 1912 में शुरू हुई थी)।
1921: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के झंडे को अंगीकार किया गया।
1927: कार निर्माता कंपनी फोर्ड ने अपनी प्रसिद्ध कार मॉडल T के उत्पादन पर रोक लगाई।
1935: पाकिस्तान के क्वेटा शहर में भीषण भूकंप से 50 हजार से अधिक लोगों की मौत।
1959: दलाई लामा को भारत में शरण- तिब्बत पर चीनी कब्जे के बाद, तिब्बतियों के आध्यात्मिक गुरु 14वें दलाई लामा (तेनज़िन ग्यात्सो) अपने अनुयायियों के साथ सीमा पार कर सुरक्षित भारत पहुंचे थे, जहां भारत सरकार ने उन्हें राजनीतिक शरण दी। इसके बाद से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला (मैक्लोडगंज) में रह रहे हैं।
1961: दक्षिण अफ्रीका स्वतंत्र देश बना।
1962: एडोल्फ आइकमन को इजराइल ने फांसी पर लटकाया। आइकमन ने हजारों यहूदियों की हत्या की थी।
1964: बंबई में इलेक्ट्रिक ट्राम अंतिम बार चली।
1970: पेरू का विनाशकारी भूकंप- पेरू में आए 7.9 तीव्रता के भीषण भूकंप और उसके बाद आए भूस्खलन (Avalanche) के कारण पूरा युंगे शहर दफन हो गया था, जिसमें लगभग 70,000 लोगों की जान चली गई थी।
1994: दक्षिण अफ़्रीका गूट निरपेक्ष आन्दोलन का 109वां सदस्य राष्ट्र बना।
2010: भारत में मान्यता प्राप्त हर प्राइवेट स्कूल में ग़रीब बच्चों के लिए 25 फ़ीसदी सीटें आरक्षित करने का क़ानून बनाया गया।
2012: भारत में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की गई।
2017: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत को प्रेफरेंशियल ट्रेडिंग लिस्ट से हटाया।
2025: पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और बाढ़ का कहर- असम के 21 से अधिक जिलों के 1,500 से ज्यादा गांव इस बाढ़ की चपेट में आए, जिससे 6 लाख 30 हजार से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए। असम में 12 लोगों की मौत हुई, जबकि पूरे पूर्वोत्तर (असम, अरुणाचल, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा) को मिलाकर 30 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई।
31 मई को जन्मे व्यक्ति (Born on 31 May)
1725: रानी अहिल्याबाई होलकर – भारत की वीरांगना। मल्हारराव होल्कर के पुत्र खंडेराव की पत्नी थीं। अहिल्याबाई किसी बड़े राज्य की रानी नहीं थीं, लेकिन अपने राज्य काल में उन्होंने जो कुछ किया वह आश्चर्यचकित करने वाला है। वह एक बहादुर योद्धा और कुशल तीरंदाज थीं। उन्होंने कई युद्धों में अपनी सेना का नेतृत्व किया और हाथी पर सवार होकर वीरता के साथ लड़ीं। वे भगवान शिव की भक्त थीं और इसलिए उन्होंने 1777 में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया। 13 अगस्त सन् 1795 को उनकी जीवन-लीला समाप्त हो गई। अहिल्याबाई के निधन के बाद तुकोजी इन्दौर की गद्दी पर बैठा।
1756: एब्बे फारिया – दुनिया का पहला व्यक्ति, जिसने सम्मोहन की कला को एक वैज्ञानिक आधार प्रदान किया और उसे अंधविश्वास तथा झाड़फूक की श्रेणी से बाहर निकाला। उसने इस विद्या का मनोवैज्ञानिक सिद्धांत भी तैयार किया। एब्बे फारिया नेपोलियन बोनापार्ट का विश्वासपात्र सलाहकार तथा अंतरंग दोस्त था। फारिया मूल रूप से भारतीय था, जो सम्मोहन और वशीकरण की कला में इतना पारंगत था कि उसने अपनी इस कला से विश्वविजेता नेपोलियन को भी वशीभूत कर लिया था।
1843: अण्णा साहेब किर्लोस्कर – उन्होंने नाटकों के कला पक्ष को समृद्ध किया और मराठी रंगमंच की आधुनिक तकनीक आंरभ की। उन्होंने अपने नाटकों के द्वारा भारतीय संस्कृति का पुनरुद्वार किया।
1899: लाला जगत नारायन – प्रसिद्ध पत्रकार तथा हिन्द समाचार समूह के संस्थापक। वे कांग्रेस और आर्य समाज के प्रसिद्ध कार्यकर्ता एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। लाला जगत नारायन छूआछूत के विरोधी और महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलें, इस बात के समर्थक थे। 80 के दशक में जब पूरा पंजाब आतंकी माहौल से सुलग रहा था, उस दौर में भी कलम के सिपाही एवं देश भावना से प्रेरित लाला जी ने अपने बिंदास लेखन से आतंकियों के मंसूबों को उजागर किया और राज्य में शांति कायम करने के भरसक प्रयास किए।
1925: राज खोसला – हिंदी फ़िल्मों में शीर्ष निर्देशक, निर्माणकर्ता और पटकथाकार।
1927: वनराज भाटिया – भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक।
1942: विनोद मेहता– आउटलुक के संस्थापक एवं प्रसिद्ध पत्रकार।
31 मई को हुए निधन (Died on 31 May)
1973: गुरनाम सिंह – पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री। गुरनाम सिंह दो बार पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री रहे- 8 मार्च, 1967 से 25 नवंबर, 1967 तक, 17 फ़रवरी, 1969 से 27 मार्च, 1970 तक। वह शिरोमणि अकाली दल के प्रथम राजनीतिज्ञ थे, जो पंजाब के मुख्यमंत्री बने। गुरनाम सिंह का निधन एक हवाई दुर्घटना में 31 मई, 1973 में हुआ।
1988: संतराम बी. ए.- समाज सुधारक और लेखक।
1988: द्वारका प्रसाद मिश्रा – भारत के प्रसिद्ध राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, साहित्यकार तथा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री। द्वारका प्रसाद मिश्रा 1937 और 1946 में केन्द्रीय मंत्री रहे। वे 30 सितंबर, 1963 से 8 मार्च, 1967 तक और फिर 9 मार्च, 1967 से 29 जुलाई, 1967 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।
1998: विचित्र नारायण शर्मा – स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिज्ञ।
1999: वीरेंद्र कुमार सकलेचा – मध्य प्रदेश के 10वें मुख्यमंत्री थे। वीरेंद्र कुमार का जन्म 4 मार्च, 1930 को आज़ादी से पूर्व मंदसौर में हुआ था। वे 18 जनवरी, 1978 से 19 जनवरी, 1980 तक मुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत रहे। उन्हें वर्ष 1984 में मूर्ति देवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2003: अनिल बिस्वास – प्रसिद्ध संगीतकार। हिन्दी फ़िल्मों के गीत-संगीत के स्वर्ण-युग के सारथी अनिल बिस्वास रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ अपने संगीत से फ़िल्म संगीत को शास्त्रीय, कलात्मक और मधुर बनाया बल्कि अनेक गायक-गायिकाओं को तराशकर हीरे-जवाहरात की तरह प्रस्तुत किया। इनमें तलत महमूद, मुकेश, लता मंगेशकर, सुरैया के नाम प्रमुखता से गिनाए जा सकते हैं।
2022: के. के. – प्रसिद्ध भारतीय पार्श्वगायक।
31 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 31 May)
विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा हर साल 31 मई को पूरी दुनिया में यह दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाले जानलेवा नुकसानों (जैसे कैंसर और हृदय रोग) के प्रति जागरूक करना और तंबाकू मुक्त समाज का निर्माण करना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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