14 July in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 14 जुलाई वर्ष का 195वां (लीप वर्ष में यह 196वां) दिन है। साल में अभी 170 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 14 जुलाई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 14 जुलाई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
14 जुलाई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 14 July in History)
1867: स्वीडन के अल्फ्रेड नोबेल ने डाइनामाइट से किए थे धमाके; आज इन्हीं के नाम पर है दुनिया का सबसे सम्मानित शांति पुरस्कार
आज दुनिया भर में शांति और विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला ‘नोबेल पुरस्कार’ सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है। लेकिन बेहद दिलचस्प बात यह है कि जिसके नाम पर यह पुरस्कार शुरू हुआ, उस महान वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल का पूरा जीवन बारूद और विस्फोटकों के इर्द-गिर्द बीता। आज ही के दिन यानी 14 जुलाई 1867 को अल्फ्रेड ने पहली बार दुनिया के सामने डायनामाइट का सफल परीक्षण किया था।
अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का जन्म 21 अक्टूबर 1833 को हुआ था। बचपन में ही पिता का काम ठप होने के कारण उन्हें नौ वर्ष की आयु में अपनी माँ के साथ ननिहाल सेंट पीट्सबर्ग जाना पड़ा। वहाँ उन्होंने रसायन शास्त्र की बारीकियों को समझा और पाँच भाषाओं पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। पेरिस में शोध के दौरान उनकी मुलाकात इतावली वैज्ञानिक अस्कानियो सोब्रेरो से हुई, जिन्होंने विस्फोटक तरल ‘नाइट्रोग्लिसरीन’ की खोज की थी। चूंकि यह लिक्विड बेहद खतरनाक था, इसलिए अल्फ्रेड ने इसे सुरक्षित और उपयोगी बनाने पर काम शुरू कर दिया।
वर्ष 1863 में स्वीडन लौटकर उन्होंने इस पर कई प्रयोग किए। इस दौरान एक भीषण धमाके में उनके छोटे भाई एमिल सहित कई लोग मारे गए, जिसके बाद सरकार ने इसके परीक्षण पर रोक लगा दी। इसके बावजूद अल्फ्रेड पीछे नहीं हटे और उन्होंने एक झील में तैरती नाव को ही अपनी लैब बना लिया। आखिरकार 1866 में उन्होंने नाइट्रोग्लिसरीन में सिलिका मिलाकर एक स्थिर और सुरक्षित मिश्रण तैयार करने में सफलता हासिल की।
14 जुलाई 1867 को इंग्लैंड के सरे की पहाड़ियों पर अल्फ्रेड ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस विस्फोटक का प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे पहाड़ी से नीचे फेंककर सुरक्षित धमाके की तीव्रता को नियंत्रित करके दिखाया। अगले वर्ष उन्हें इसका पेटेंट मिला, जिसे आज दुनिया ‘डायनामाइट’ के नाम से जानती है।
डायनामाइट की मांग निर्माण कार्यों में इतनी तेजी से बढ़ी कि अल्फ्रेड ने 20 से अधिक देशों में करीब 90 फैक्ट्रियां स्थापित कर लीं। लगातार दौरों पर रहने के कारण लोग उन्हें मजाक में ‘यूरोप का सबसे अमीर आवारा’ भी कहते थे। अल्फ्रेड के नाम कुल 355 पेटेंट दर्ज हैं। उन्होंने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा उन लोगों को पुरस्कार स्वरूप देने के लिए सुरक्षित रखा, जो मानवता की भलाई के लिए उत्कृष्ट कार्य करते हैं। इसी से आज के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की नींव पड़ी।
1850: पहली बार मशीन ने जमाकर दिखाई बर्फ
गर्मियों के दिनों में आज हमारे घरों को ठंडा रखने वाले एसी और फ्रिज का इतिहास बेहद दिलचस्प है। इस तकनीक की नींव रखने का श्रेय अमेरिका के फ्लोरिडा के एक डॉक्टर जॉन गोरी को जाता है। उन्होंने आज ही के दिन यानी 14 जुलाई को पहली बार दुनिया को इंसानों द्वारा बनाई गई बर्फ का स्वाद चखाया था।
बात वर्ष 1841 की है, जब फ्लोरिडा में ‘यलो फीवर’ (पीला बुखार) का भयंकर प्रकोप फैला हुआ था और हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे थे। डॉक्टर जॉन गोरी का मानना था कि अत्यधिक गर्मी इस बीमारी को फैलाने और मरीजों की हालत बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभा रही है। मरीजों को राहत देने के लिए उन्होंने एक अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने अपने क्लिनिक की खिड़की के पास एक बड़े बर्तन में बर्फ भरकर टांग दी। बाहर से आने वाली हवा इस बर्फ से टकराकर कमरे को ठंडा कर देती थी।
उस दौर में बर्फ मिलना बेहद कठिन और खर्चीला काम था। सर्दियों में ठंडी जगहों की झीलों से बर्फ काटकर जहाजों के जरिए गर्म इलाकों में भेजी जाती थी। डॉक्टर गोरी ने सोचा कि क्यों न खुद ही बर्फ बनाने वाली कोई मशीन तैयार की जाए। इससे पहले वर्ष 1755 में विलियम क्लेन ने वैक्यूम में ईथर को गर्म करके कृत्रिम बर्फ बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो सके। जॉन गोरी ने इसी तकनीक पर आगे काम शुरू किया और करीब चार साल की कड़ी मेहनत के बाद एक खास मशीन तैयार कर ली।
14 जुलाई 1850 को फ्रांस की आजादी के जश्न के मौके पर एक काउंसिल मेंबर रोसन ने डॉक्टर गोरी के सम्मान में एक शानदार पार्टी दी थी। पार्टी के दौरान अचानक ड्रिंक्स के लिए प्राकृतिक बर्फ खत्म हो गई। इस पर एक मेहमान ने निराश होकर कहा कि अब सबको गर्म वाइन ही पीनी पड़ेगी। तभी रोसन ने उठकर कहा कि फ्रांस की आजादी के जश्न में ऐसा बिल्कुल नहीं होगा। उनके बोलते ही वेटर ठंडी वाइन के साथ चमचमाती हुई बर्फ लेकर आ गए। यह वही कृत्रिम बर्फ थी, जिसे डॉक्टर गोरी ने अपनी नई मशीन से तैयार किया था। इस घटना ने दुनिया को कृत्रिम बर्फ की ताकत से रूबरू कराया।
2013: भारत में भेजा गया था आखिरी टेलीग्राम और हमेशा के लिए खामोश हो गई 163 साल पुरानी टेलीग्राम सेवा
आज ही के दिन यानी 14 जुलाई 2013 को भारत की संचार व्यवस्था के एक गौरवशाली युग का अंत हुआ था। इसी तारीख को देश में आखिरी टेलीग्राम (तार) भेजा गया था, जो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नाम था। इसके बाद 163 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक सेवा को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
भारत में टेलीग्राम सेवा का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। साल 1851 में पहली बार एक प्रयोग के तौर पर कलकत्ता (अब कोलकाता) से डायमंड हार्बर के बीच इस सेवा को शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में इसका उपयोग केवल ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी ही अपने संदेश भेजने के लिए करते थे। बाद में इसका विस्तार पूरे देश में हुआ और साल 1855 में इसे आम नागरिकों के लिए भी खोल दिया गया।
मोर्स कोड तकनीक पर आधारित यह सेवा एक समय में सबसे तीव्र गति से संदेश पहुंचाने का एकमात्र साधन हुआ करती थी। युद्ध, आपातकाल, खुशी या गम के संदेशों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में टेलीग्राम की भूमिका अतुलनीय थी। लेकिन समय बदलने के साथ मोबाइल, इंटरनेट और ईमेल जैसी आधुनिक तकनीकों के आने से यह सेवा धीरे-धीरे अपनी प्रासंगिकता खोने लगी।
तकनीकी बदलावों के कारण टेलीग्राम का उपयोग न के बराबर रह गया था, जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। इस सेवा को बनाए रखने के लिए भारत सरकार को हर साल करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे थे, जबकि इससे होने वाली सालाना कमाई महज 75 लाख रुपये रह गई थी। भारी घाटे और उपयोगिता खत्म होने के कारण सरकार ने 12 जून 2013 को इस सेवा को बंद करने का निर्णय लिया और 14 जुलाई 2013 को आखिरी संदेश के साथ इस पर हमेशा के लिए विराम लग गया।
साभार: दैनिक भास्कर
1945: जब नाकाम हो गया ऐतिहासिक शिमला सम्मेलन, वायसराय लॉर्ड वेवेल ने की थी भंग करने की घोषणा, जिन्ना की हठधर्मिता बनी थी विफलता की मुख्य वजह
आज ही के दिन यानी 14 जुलाई 1945 को भारत के राजनीतिक इतिहास के एक बेहद महत्वपूर्ण अध्याय का दुखद अंत हुआ था। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड वेवेल ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच पैदा हुए गतिरोध को दूर करने में असमर्थ रहने के बाद शिमला सम्मेलन को आधिकारिक रूप से भंग करने की घोषणा की थी। यह ऐतिहासिक सम्मेलन 25 जून 1945 से शिमला के वाइसरीज लॉज में आयोजित किया जा रहा था।
ब्रिटिश सरकार द्वारा बुलाए गए इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत में एक अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता साफ करना था। इसके तहत वायसराय की कार्यकारी परिषद का पुनर्गठन किया जाना था, जिसमें हिंदुओं और मुसलमानों को समान प्रतिनिधित्व देकर एक संतुलित और सर्वमान्य व्यवस्था बनाने पर सहमति जुटानी थी।
यह बातचीत पूरी तरह से मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना के अड़ियल रुख के कारण पटरी से उतर गई। जिन्ना की यह हठधर्मिता थी कि केवल मुस्लिम लीग ही देश के सभी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र संस्था है। उनका दावा था कि कार्यकारी परिषद में शामिल होने वाले सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन केवल और केवल उनकी पार्टी ही करेगी। कांग्रेस और अन्य गैर-लीगी मुस्लिम नेताओं को यह शर्त स्वीकार नहीं थी।
कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच पैदा हुए इस गतिरोध के कारण लॉर्ड वेवेल की यह योजना धरी की धरी रह गई। इस विफलता का परिणाम यह हुआ कि दोनों राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक खाई और चौड़ी हो गई। इस ऐतिहासिक असफलता ने दोनों पक्षों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन की नींव को और मजबूत करने का काम किया।
देश-विदेश में 14 जुलाई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1636: मुगल बादशाह शाहजहां ने औरंगजेब को दक्कन का वायसराय नियुक्त किया।
1789: फ्रांस के नाराज नागरिकों ने पेरिस में राजशाही और अत्याचार के प्रतीक ‘बास्टिल के किले’ (जो एक जेल भी था) पर धावा बोलकर उसे ढहा दिया था। इस घटना को फ्रांसीसी क्रांति की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
1798: अमेरिकी कांग्रेस ने ‘राजद्रोह एक्ट’ को मंजूरी दी। इसके बाद सरकार के खिलाफ गलत या भ्रम फैलाने वाली बात लिखना, छापना या बोलना अपराध बन गया।
1853: न्यूजीलैंड में पहले आम चुनाव हुए।
1861: रिचर्ड जॉर्डन गैटलिंग ने मशीनगन बनाई। पहले इसका नाम ‘गैटलिंग गन’ रखा गया जो हाथों से क्रैंक घुमाकर लगातार गोलियां चलाने वाली दुनिया की पहली सफल रैपिड-फायर मशीन गन थी।
1864: अमेरिका के मोन्टाना प्रांत की राजधानी हेलेना में सोने की खोज।
1951: सीबीएस चैनल पर घुड़दौड़ के रूप में किसी खेल कार्यक्रम का पहली बार रंगीन प्रसारण।
1965: मंगल के पास से गुजरने वाले नासा के अंतरिक्ष यान ने किसी दूसरे ग्रह की पहली क्लोज अप तस्वीरें खींची।
1969: जयपुर में मालगाड़ी और यात्री गाड़ी की टक्कर में 85 लोगों की मौत।
1969: अमेरिका के वित्त मंत्रालय और फेडरल रिजर्व सिस्टम ने 500, 1,000, 5,000 और 10,000 डॉलर के नोटों को बंद किया।
1987: ताइवान में 37 वर्षों के सैनिक शासन का अंत हुआ।
2008: वेनेजुएला की डायना मेंडोजा ने मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता।
2014: चर्च ऑफ इंग्लैंड की जनरल सिनोड ने ऐतिहासिक मतदान कर महिलाओं को बिशप बनाने के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, वर्ष 2015 में लिब्बी लेन चर्च ऑफ इंग्लैंड की पहली महिला बिशप बनीं।
2015: नासा का न्यू होराइजन प्लूटो ग्रह पर जाने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
2016: फ्रांस में बैस्टिल दिवस मना रहे लोगों पर एक आतंकवादी ने ट्रक चढ़ा दिया था, जिसमें 80 लोग मारे गए।
2023: भारत के मून मिशन चंद्रयान-3 श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
2020: रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय ने कोरोना वैक्सीन (जो बाद में ‘स्पुतनिक वी’ के नाम से जानी गई) के मानव परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया।
2021: लद्दाख कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक देने वाला देश का पहला केंद्र शासित प्रदेश बना।
14 जुलाई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति (Born on 14 July)
1856: गोपाल गणेश आगरकर – प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता।
1900: देशबंधु गुप्ता – भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं पत्रकार।
1902: चन्द्रभानु गुप्त – प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।
1909: ई. एम. एस. नमबूद्रिपद – प्रसिद्ध कम्युनिस्ट नेता और केरल के प्रथम मुख्यमंत्री।
1945: शिव नादर – टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज और देश के बड़े उद्योगपति, एचसीएल टेक्नॉलोजीज के अध्यक्ष एवं प्रमुख रणनीति अधिकारी।
14 जुलाई को हुए प्रमुख निधन (Died on 14 July)
1975: मदन मोहन – हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध 1950, 1960, और 1970 के दशक के बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक।
2003: लीला चिटनिस – प्रसिद्ध हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री।
1896: राजा लक्ष्मण सिंह – हिन्दी साहित्य के इतिहास से जुड़े सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे।
2008: ओलिव रिले – दुनिया की सबसे उम्रदराज़ ब्लॉगर 108 वर्ष की का देहांत। वे न्यू साउथ वेल्स (ऑस्ट्रेलिया) की रहने वाली थीं।
2025: फौजा सिंह– दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावकों में शुमार।
14 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 14 July)
शार्क जागरूकता दिवस
हर साल 14 जुलाई को दुनिया भर में ‘शार्क जागरूकता दिवस’ (Shark Awareness Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महासागरों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में शार्क मछलियों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में लोगों को जागरूक करना और उनके संरक्षण को बढ़ावा देना है।
विश्व चिंपैंजी दिवस
हर साल 14 जुलाई को विश्व चिंपैंजी दिवस (World Chimpanzee Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानवता के सबसे करीबी जीवित रिश्तेदारों (चिंपैंजी) के संरक्षण, उनके व्यवहार को समझने और उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2018 में जेन गुडॉल इंस्टीट्यूट और अन्य वन्यजीव संगठनों द्वारा की गई थी। यह तारीख 14 जुलाई 1960 की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाती है, जब प्रसिद्ध वैज्ञानिक और पर्यावरणविद् डॉ. जेन गुडॉल तंजानिया के गोम्बे स्ट्रीम नेशनल पार्क में जंगली चिंपैंजी पर अपना अभूतपूर्व शोध शुरू करने पहुंची थीं। उनके शोध ने ही दुनिया को बताया कि चिंपैंजी कितने बुद्धिमान, सामाजिक और संवेदनशील होते हैं।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
बाहरी कड़ियां
विकिपीडिया
bharatdiscovery.org
Posted By: Himachal News
Himachal News की ताजा खबरों और वीडियो अपडेट्स के लिए हमारे Himachal News को फॉलो और YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।
| जनवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| फरवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 |
| मार्च | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अप्रैल | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| मई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| जून | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| जुलाई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अगस्त | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| सितंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| अक्टूबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| नवंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| दिसंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |



