हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों की मतगणना को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने नए व कड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने स्पष्ट किया है कि मतगणना प्रक्रिया, रिकाउंटिंग (पुनर्मतगणना), सुरक्षा प्रबंधन और मतपत्रों की छंटनी को लेकर नियमों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार, मतगणना पूरी होते ही रिटर्निंग अधिकारी (RO) या सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) उम्मीदवारों को मिले वोटों की घोषणा करेंगे। इसके तुरंत बाद यदि किसी प्रत्याशी या उसके एजेंट को पुनर्मतगणना करवानी है, तो उन्हें सिर्फ 10 मिनट के भीतर लिखित में आवेदन देना होगा। मौखिक रूप से की गई कोई भी मांग स्वीकार नहीं होगी। रिटर्निंग अधिकारी के पास आवेदन को पूरी तरह स्वीकार, आंशिक स्वीकार या खारिज करने का अधिकार होगा। यदि आवेदन खारिज होता है, तो अधिकारी को इसका लिखित कारण बताना होगा।
‘टाई‘ होने पर भी मिलेगा एक ही मौका, अंतिम नतीजे के बाद कोई सुनवाई नहीं
आयोग ने साफ किया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी प्रत्याशी को रिकाउंटिंग का केवल एक ही अवसर मिलेगा। दिलचस्प बात यह है कि यदि दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला बराबरी (टाई) पर भी छूटता है, तब भी पुनर्मतगणना केवल एक ही बार की जाएगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में रिटर्निंग अधिकारी अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक बार अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद रिकाउंटिंग की कोई भी मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मतपत्रों की छंटनी: एक ही मतपेटी से निकलेंगे तीन रंग के बैलेट, बनेंगे 25-25 के बंडल
हिमाचल पंचायत चुनाव में एक ही मतपेटी (Ballot Box) में तीन अलग-अलग रंगों के मतपत्र डाले जाते हैं। नए नियमों के मुताबिक, मतपेटी खोलने के बाद सबसे पहले मतपत्रों को बिना खोले सिर्फ रंग के आधार पर अलग किया जाएगा और ‘मतपत्र लेखा’ से उनका मिलान होगा। इसके बाद सभी मतपत्रों को आपस में मिलाकर (मिक्स करके) प्रत्याशियों के पक्ष में पड़े वोटों के 25-25 के बंडल बनाए जाएंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि रंगों को अलग करते समय विशेष सावधानी बरती जाए ताकि किसी अन्य वार्ड के मतपत्र आपस में न मिलें।
तीसरी आंख का पहरा: सीसीटीवी और वीडियोग्राफी अनिवार्य, 3 महीने तक सुरक्षित रहेगी रिकॉर्डिंग
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने सभी मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे या वीडियोग्राफी अनिवार्य कर दी है। कैमरों की पोजिशन इस तरह तय होगी कि मतगणना टेबल और वहां मौजूद एजेंट स्पष्ट रूप से दिखाई दें। इस पूरी रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा। संवेदनशील और अति संवेदनशील केंद्रों पर लाइव वेब-कास्टिंग की व्यवस्था भी होगी। वहीं, मतदान की गोपनीयता बनाए रखने के लिए पोस्टल बैलेट (Postal Ballot) को निर्धारित समय पर प्राप्त कर, संबंधित पद के सामान्य मतपत्रों के साथ मिलाकर ही गिना जाएगा।
भीड़ नियंत्रण फॉर्मूला: सिर्फ संबंधित वार्ड के एजेंट को एंट्री, प्रधान-उपप्रधान को पूरी छूट
मतगणना कक्ष में भीड़ और हंगामे को रोकने के लिए आयोग ने सख्त घेराबंदी की है। नियमों के मुताबिक, जिस समय जिस वार्ड की मतगणना चल रही होगी, केवल उसी वार्ड के एजेंट को कमरे में बैठने की अनुमति मिलेगी। जैसे ही उस वार्ड की गिनती खत्म होगी, उन्हें बाहर जाना होगा। हालांकि, प्रधान और उपप्रधान पद के प्रत्याशी या उनके अधिकृत एजेंट पूरी मतगणना प्रक्रिया के दौरान कक्ष में मौजूद रह सकेंगे।
मतगणना का तय क्रम: पहले वार्ड सदस्य, फिर उप-प्रधान और अंत में चुना जाएगा प्रधान
राज्य निर्वाचन आयोग ने वोटों की गिनती का क्रम भी पूरी तरह निर्धारित कर दिया है। सबसे पहले वार्ड सदस्य पदों के मतों की गिनती होगी। जब तक सभी वार्ड सदस्यों की मतगणना पूरी नहीं हो जाती, तब तक उप-प्रधान और प्रधान पद के मतों का पिटारा नहीं खोला जाएगा। वार्ड सदस्यों के बाद उप-प्रधान और सबसे अंत में प्रधान पद के मतों की गिनती की जाएगी। यदि किसी वार्ड में सदस्य निर्विरोध चुन लिया गया है, तो बिना समय गंवाए अगले वार्ड की मतगणना शुरू कर दी जाएगी।
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