15 मई: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 15 मई वर्ष का 135वां (लीप वर्ष में यह 136वां) दिन है। साल में अभी 230 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 15 मई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 15 मई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
15 मई की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 15 May in History)
1907: महान क्रन्तिकारी सुखदेव का जन्मदिन
सुखदेव को भारत के उन प्रसिद्ध क्रांतिकारियों और बलिदानियों में गिना जाता है, जिन्होंने अल्पायु में ही देश के लिए बलिदान दिया। सुखदेव का पूरा नाम ‘सुखदेव थापर’ था। देश के और दो अन्य क्रांतिकारियों- भगत सिंह और राजगुरु के साथ उनका नाम जोड़ा जाता है। ये तीनों ही देशभक्त क्रांतिकारी आपस में अच्छे मित्र और देश की आजादी के लिए अपना सर्वत्र न्यौछावर कर देने वालों में से थे। 23 मार्च, 1931 को भारत के इन तीनों वीर नौजवानों को एक साथ फ़ाँसी दी गई।
सुखदेव का जन्म 15 मई, 1907 को गोपरा, लुधियाना, पंजाब में हुआ था। उनके पिता का नाम रामलाल थापर था, जो अपने व्यवसाय के कारण लायलपुर (वर्तमान फैसलाबाद, पाकिस्तान) में रहते थे। इनकी माता रल्ला देवी धार्मिक विचारों की महिला थीं। दुर्भाग्य से जब सुखदेव तीन वर्ष के थे, तभी इनके पिताजी का देहांत हो गया।
इनका लालन-पालन इनके ताऊ लाला अचिन्त राम ने किया। वे आर्य समाज से प्रभावित थे तथा समाज सेवा व देशभक्तिपूर्ण कार्यों में अग्रसर रहते थे। इसका प्रभाव बालक सुखदेव पर भी पड़ा। जब बच्चे गली-मोहल्ले में शाम को खेलते तो सुखदेव अस्पृश्य कहे जाने वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करते थे।
भगत सिंह से मित्रता: सन 1919 में हुए जलियाँवाला बाग़ के भीषण नरसंहार के कारण देश में भय तथा उत्तेजना का वातावरण बन गया था। इस समय सुखदेव 12 वर्ष के थे। पंजाब के प्रमुख नगरों में मार्शल लॉ लगा दिया गया था। स्कूलों तथा कालेजों में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों को भारतीय छात्रों को ‘सैल्यूट’ करना पड़ता था। लेकिन सुखदेव ने दृढ़तापूर्वक ऐसा करने से मना कर दिया, जिस कारण उन्हें मार भी खानी पड़ी। लायलपुर के सनातन धर्म हाईस्कूल से मैट्रिक पास कर सुखदेव ने लाहौर के नेशनल कालेज में प्रवेश लिया। यहाँ पर सुखदेव की भगत सिंह से भेंट हुई। दोनों एक ही राह के पथिक थे, अत: शीघ्र ही दोनों का परिचय गहरी दोस्ती में बदल गया। दोनों ही अत्यधिक कुशाग्र और देश की तत्कालीन समस्याओं पर विचार करने वाले थे। इन दोनों के इतिहास के प्राध्यापक ‘जयचन्द्र विद्यालंकार’ थे, जो कि इतिहास को बड़ी देशभक्तिपूर्ण भावना से पढ़ाते थे। विद्यालय के प्रबंधक भाई परमानन्द भी जाने-माने क्रांतिकारी थे। वे भी समय-समय पर विद्यालयों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करते थे। यह विद्यालय देश के प्रमुख विद्वानों के एकत्रित होने का केन्द्र था तथा उनके भी यहाँ भाषण होते रहते थे।
क्रांतिकारी जीवन: वर्ष 1926 में लाहौर में ‘नौजवान भारत सभा’ का गठन हुआ। इसके मुख्य योजक सुखदेव, भगत सिंह, यशपाल, भगवती चरण व जयचन्द्र विद्यालंकार थे। ‘असहयोग आन्दोलन’ की विफलता के पश्चात् ‘नौजवान भारत सभा’ ने देश के नवयुवकों का ध्यान आकृष्ट किया। प्रारम्भ में इनके कार्यक्रम नौतिक, साहित्यिक तथा सामाजिक विचारों पर विचार गोष्ठियाँ करना, स्वदेशी वस्तुओं, देश की एकता, सादा जीवन, शारीरिक व्यायाम तथा भारतीय संस्कृति तथा सभ्यता पर विचार आदि करना था। इसके प्रत्येक सदस्य को शपथ लेनी होती थी कि वह देश के हितों को सर्वोपरि स्थान देगा। परन्तु कुछ मतभेदों के कारण इसकी अधिक गतिविधि न हो सकी। अप्रैल, 1928 में इसका पुनर्गठन हुआ तथा इसका नाम ‘नौजवान भारत सभा’ ही रखा गया तथा इसका केन्द्र अमृतसर बनाया गया।
केंन्द्रीय समिति का निर्माण: सितम्बर, 1928 में ही दिल्ली के फ़िरोजशाह कोटला के खण्डहर में उत्तर भारत के प्रमुख क्रांतिकारियों की एक गुप्त बैठक हुई। इसमें एक केंन्द्रीय समिति का निर्माण हुआ। संगठन का नाम ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ रखा गया। सुखदेव को पंजाब के संगठन का उत्तरदायित्व दिया गया। सुखदेव के परम मित्र शिव वर्मा, जो प्यार में उन्हें ‘विलेजर’ कहते थे, के अनुसार भगत सिंह दल के राजनीतिक नेता थे और सुखदेव संगठनकर्ता, वे एक-एक ईंट रखकर इमारत खड़ी करने वाले थे। वे प्रत्येक सहयोगी की छोटी से छोटी आवश्यकता का भी पूरा ध्यान रखते थे। इस दल में अन्य प्रमुख व्यक्त थे- चन्द्रशेखर आज़ाद. राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त।
कुशल रणनीतिकार: ‘साइमन कमीशन’ के भारत आने पर हर ओर उसका तीव्र विरोध हुआ। पंजाब में इसका नेतृत्व लाला लाजपत राय कर रहे थे। 30 अक्तूबर को लाहौर में एक विशाल जुलूस का नेतृत्व करते समय वहाँ के डिप्टी सुपरिटेन्डेन्ट स्कार्ट के कहने पर सांडर्स ने लाठीचार्ज किया, जिसमें लालाजी घायल हो गए। पंजाब में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। 17 नवम्बर, 1928 को लाला जी का देहांत हो गया। उनके शोक में स्थान-स्थान पर सभाओं का आयोजन किया गया। सुखदेव और भगत सिंह ने एक शोक सभा में बदला लेने का निश्चय किया। एक महीने बाद ही स्कार्ट को मारने की योजना थी, परन्तु गलती से उसकी जगह सांडर्स मारा गया। इस सारी योजना के सूत्रधार सुखदेव ही थे। वस्तुत: सांडर्स की हत्या चितरंजन दास की विधवा बसन्ती देवी के कथन का सीधा उत्तर था, जिसमें उन्होंने कहा था, “क्या देश में कोई युवक नहीं रहा?” सांडर्स की हत्या के अगले ही दिन अंग्रेज़ी में एक पत्रक बांटा गया, जिसका भाव था “लाला लाजपत राय की हत्या का बदला ले किया गया।”
गिरफ्तारी: 8 अप्रैल, 1929 को भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने ब्रिटिश सरकार के बहरे कानों में आवाज़ पहुँचाने के लिए दिल्ली में केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंककर धमाका किया। स्वाभाविक रूप से चारों ओर गिरफ्तारी का दौर शुरू हुआ। लाहौर में एक बम बनाने की फैक्ट्री पकड़ी गई, जिसके फलस्वरूप 15 अप्रैल, 1929 को सुखदेव, किशोरी लाल तथा अन्य क्रांतिकारी भी पकड़े गए। सुखदेव चेहरे-मोहरे से जितने सरल लगते थे, उतने ही विचारों से दृढ़ व अनुशासित थे। उनका गांधी जी की अहिंसक नीति पर जरा भी भरोसा नहीं था। उन्होंने अपने ताऊजी को कई पत्र जेल से लिखे। इसके साथ ही महात्मा गांधी को जेल से लिखा उनका पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो न केवल देश की तत्कालीन स्थिति का विवेचन करता है, बल्कि कांग्रेस की मानसिकता को भी दर्शाता है। उस समय गांधी जी अहिंसा की दुहाई देकर क्रांतिकारी गतिविधियों की निंदा करते थे। इस पर कटाक्ष करते हुए सुखदेव ने लिखा, “मात्र भावुकता के आधार पर की गई अपीलों का क्रांतिकारी संघर्षों में कोई अधिक महत्व नहीं होता और न ही हो सकता है।”
सुखदेव ने तत्कालीन परिस्थितियों पर गांधी जी एक पत्र में लिखा, ‘आपने अपने समझौते के बाद अपना आन्दोलन (सविनय अवज्ञा आन्दोलन) वापस ले लिया है और फलस्वरूप आपके सभी बंदियों को रिहा कर दिया गया है, पर क्रांतिकारी बंदियों का क्या हुआ? 1915 से जेलों में बंद गदर पार्टी के दर्जनों क्रांतिकारी अब तक वहीं सड़ रहे हैं। बावजूद इस बात के कि वे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। मार्शल लॉ के तहत बन्दी बनाए गए अनेक लोग अब तक जीवित दफनाए गए से पड़े हैं। बब्बर अकालियों का भी यही हाल है। देवगढ़, काकोरी, महुआ बाज़ार और लाहौर षड्यंत्र केस के बंदी भी अन्य बंदियों के साथ जेलों में बंद है।….. एक दर्जन से अधिक बन्दी सचमुच फाँसी के फंदों के इन्तजार में हैं। इन सबके बारे में क्या हुआ?” सुखदेव ने यह भी लिखा, भावुकता के आधार पर ऐसी अपीलें करना, जिनसे उनमें पस्त-हिम्मती फैले, नितांत अविवेकपूर्ण और क्रांति विरोधी काम है। यह तो क्रांतिकारियों को कुचलने में सीधे सरकार की सहायता करना होगा।’ सुखदेव ने यह पत्र अपने कारावास के काल में लिखा। गांधी जी ने इस पत्र को उनके बलिदान के एक मास बाद 23 अप्रैल, 1931 को ‘यंग इंडिया’ में छापा।
बलिदान: ब्रिटिश सरकार ने सुखदेव, भगत सिंह और राजगुरु पर मुकदमे का नाटक रचा। 23 मार्च, 1931 को उन्हें ‘लाहौर सेंट्रल जेल’ में फाँसी दे दी गई। देशव्यापी रोष के भय से जेल के नियमों को तोड़कर शाम को साढ़े सात बजे इन तीनों क्रांतिकारियों को फाँसी पर लटकाया गया। भगत सिंह और सुखदेव दोनों एक ही सन में पैदा हुए और एक साथ ही अपना बलिदान दे गये।
1928: पर्दे पर पहली बार आया मिकी माउस
बच्चों का पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर मिकी माउस आज ही के दिन 1928 को पहली बार पर्दे पर आया था। 1928 में डिज्नी ने अपनी पहली शॉर्ट फिल्म ‘प्लेन क्रेजी’ की टेस्ट स्क्रीनिंग की थी। ये फिल्म चार्ल्स लिंडबर्ग की अटलांटिक के ऊपर से पहली उड़ान से प्रेरित थी। 6 मिनट की इस फिल्म में मिकी और दूसरे कैरेक्टर एक प्लेन को बनाने का प्रयास करते है। मिकी के साथ ही मिनी के कैरेक्टर को भी पहली बार इस फिल्म से ही दर्शकों के सामने लाया गया।
इसी साल डिज्नी ने ‘गलोपिन गाउचो’ नाम से दूसरी फिल्म का प्रीमियर भी किया था। ये दोनों फिल्म साइलेंट थी। दोनों फिल्मों को डिस्ट्रीब्यूटर नहीं मिला और ये बुरी तरह असफल रहीं, लेकिन इसी साल एक अक्टूबर से डिज्नी ने ‘स्टीमबोट विली’ नाम से फिल्म बनानी शुरू की। ये फिल्म रिलीज हुई। इसमें पहली बार साउंड का इस्तेमाल किया गया था और ये काफी फेमस हुई। ये फिल्म दो हफ्ते तक थिएटर में रही और डिज्नी को इससे 1 हजार डॉलर की कमाई हुई। इसके बाद डिज्नी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी फिल्म की शुरुआत के दिन 1 अक्टूबर को मिकी माउस का जन्मदिन मनाया जाता है।
कैसे बना मिकी माउस: एक दिन जब वॉल्ट डिज्नी अपनी डेस्क पर बैठे थे तो उन्हें एक चूहा नजर आया। उसकी एक्टिविटी उन्हें खूब मजेदार लगी और तब डिज्नी ने चूहे का पोट्रेट बनाया। पेट मोटा कर दिया और कान छोटे। हाथों में ग्लव्ज, पैरों में जूते और कपड़े भी पहना दिए। नाम रखा- मोर्टिमर। डिज्नी की पत्नी को यह नाम पसंद नहीं आया और उन्होंने उसका नाम रखा मिकी।
मिकी बोलने वाला पहला कार्टून था। इसकी सफलता के बाद वॉल्ट ने मिकी माउस क्लब और फैन क्लब फॉर चिल्ड्रेन दो कंपनियां खोलीं। डिज्नी ने मिकी के साथ कई कैरेक्टर बनाए, जो मिकी के दोस्त के रूप में सामने आए। पहली ही फिल्म में मिकी की गर्लफ्रेंड मिनी। फिर गूफी, प्लूटो और डोनाल्ड डक भी आए, जो लोकप्रिय हो गए।
दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स में से एक है डिज्नी: अब तक मिकी माउस पर 22 शॉर्ट फिल्म, 11 फिल्में और 6 कार्टून सीरीज आ चुकी है। 2020 में वॉल्ट डिज्नी का ग्लोबल रेवेन्यू 38.7 बिलियन डॉलर रहा। डिज्नी इस वक्त दुनिया के सबसे वैल्यूएबल ब्रांड में 7वें नंबर पर है। फोर्ब्स के मुताबिक इसकी ब्रांड वैल्यू 61.3 बिलियन डॉलर है। डिज्नी मीडिया बिजनेस नेटवर्क के पास डिज्नी चैनल, ईएसपीएन, हिस्ट्री, लाइफटाइम जैसे कई चैनल हैं। 8 मिलियन यूजर्स के साथ डिज्नी हॉट स्टार भारत का सबसे बड़ा OTT प्लेटफॉर्म है।
1957: थर्मो न्यूक्लियर पावर वाला तीसरा देश बना यूके
1957 में आज ही के दिन ब्रिटेन ने अपने पहले हाइड्रोजन बम का टेस्ट किया था। दक्षिणी प्रशांत महासागर के क्रिसमस आइलैंड पर 45 हजार फीट की ऊंचाई से बम को गिराया गया। ये टेस्ट ऑपरेशन ग्रेपल का हिस्सा था। इसी ऑपरेशन के तहत ब्रिटेन ने 1957 से 1958 तक कुल 9 परमाणु और हाइड्रोजन बम के टेस्ट किए। ऑपरेशन ग्रेपल के लिए माल्डन और क्रिसमस आइलैंड को चुना गया। ये दोनों ही आइलैंड 1979 तक ब्रिटिश कॉलोनी थे। इस ऑपरेशन के लिए यूके ने करीब 20 हजार सैनिकों को इन आइलैंड पर भेजा था। इसके बाद ब्रिटेन थर्मोन्यूक्लियर वेपन से लैस दुनिया का तीसरा देश बन गया।
1993: इंडियन आर्मी के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ के. एम. करियप्पा का निधन
साल 1965… भारत-पाकिस्तान का युद्ध। इस युद्ध में एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी इलाकों में घुसकर पाकिस्तान के टैंकों और कई एयरफील्ड को तबाह कर दिया था। इसी दौरान भारतीय वायुसेना के एक विमान को पाकिस्तान ने मार गिराया और उसके पायलट को युद्धबंदी बना लिया। उस पायलट का नाम था- एयर मार्शल नंदू करियप्पा।
जब पाकिस्तानी राष्ट्रपति को पता चला कि ये के एम करियप्पा के बेटे हैं, तो उन्होंने तुरंत पाकिस्तानी उच्चायुक्त से भारत फोन लगवाया और कहा कि अगर आप चाहें तो आपके बेटे को हम तुरंत वापस भेज सकते हैं। के एम करियप्पा ने जवाब दिया, “सभी भारतीय युद्धबंदी मेरे बेटे हैं, आप मेरे बेटे को उनके साथ ही छोड़िए”।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने ये पेशकश इसलिए की क्योंकि जब साल 1946 में करियप्पा को फ्रंटियर ब्रिगेड ग्रुप का ब्रिगेडियर बनाया गया, तब कर्नल अयूब खान ने भी उनके अंडर काम किया था। यही अयूब खान आगे चलकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। ये मौका अपने पूर्व ब्रिगेडियर को सम्मान जताने का था।
1949 में करियप्पा को भारत का पहला कमांडर इन चीफ बनाया गया था। ब्रिटिश शासन के बाद ये पहला मौका था, जब किसी भारतीय के हाथ में सेना की कमान सौंपी गई थी। इस दिन को ‘आर्मी डे’ के रूप में मनाया जाता है। 1994 में आज ही के दिन के एम करियप्पा का निधन हो गया।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 15 मई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1242: दिल्ली के सुलतान मुइजुद्दीन बहरम शाह की सेना ने विद्रोह कर दिया और सुलतान की हत्या कर दी।
1718: लंदन के वकील जेम्स पक्ले ने दुनिया की पहली मशीन गन को बनाया।
1730: रॉबर्ट वाल्पोल प्रभावी रूप से ब्रिटेन के प्रथम प्रधान मंत्री बनाये गए।
1849: लुईस हसलेट को आज ही के दिन गैस मास्क के लिए पहला अमेरिकी पेटेंट मिला था, जिसने औद्योगिक सुरक्षा और युद्ध क्षेत्र में रक्षा की नई राह खोली।
1878: टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की गयी।
1891: फिलिप्स एंड कंपनी को हॉलैंड में स्थापित किया गया।
1918: अमेरिका में पहली हवाई डाक सेवा की शुरुआत।
1930: विश्व की पहली महिला एयरहोस्टेस ऐलन चर्च ने आॅकलैंड–शिकागो फ्लाइट में उड़ान भरी।
1940: आज ही के दिन दुनिया की सबसे बड़ी फास्ट-फूड चेन मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s) की स्थापना रिचर्ड और मौरिस मैकडॉनल्ड्स ने कैलिफोर्निया के सैन बर्नार्डिनो में एक छोटे रेस्तरां के रूप में की थी।
1941: ब्रिटेन के पहले जेट इंजन वाले विमान, ग्लॉस्टर E.28/39, ने आज ही के दिन अपनी पहली सफल उड़ान भरी थी।
1948: अरब देशों ने इजराइल पर हमला किया। एक दिन पहले ही इजराइल ने अपनी आजादी की घोषणा की थी।
1948: पलायन का दिन ‘नकबा’ फिलिस्तीनी इतिहास में इसे ‘अल-नकबा’ (महाविनाश) के रूप में याद किया जाता है, जब इजरायल की स्थापना के समय लाखों फिलिस्तीनियों को विस्थापित होना पड़ा था।
1955: ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता- द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, मित्र राष्ट्रों और सोवियत संघ के बीच ‘ऑस्ट्रियाई राज्य संधि’ पर हस्ताक्षर हुए, जिससे ऑस्ट्रिया को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में फिर से मान्यता मिली।
1995: एलीसन गारग्रीब्स बिना आक्सीजन सिलीडंर के एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली पहली महिला बनीं।
1999: कुवैती सरकार द्वारा महिलाओं को संसदीय चुनावों में मताधिकार का हक प्रदत्त।
2001: इटली में दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत।
2002: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक पर प्रतिबंधों का अनुमोदन किया।
2003: इराक युद्ध में अमेरिकी सेनाओं के कमांडर टामी फ़्रैक्स के ख़िलाफ़ ब्रुसेल्स की अदालत में युद्ध सम्बन्धी मुकदमा दायर।
2005: 20 साल के बाद कनाडा में भारत का विमान उतरा।
2008: श्रीलंका सरकार ने आतंकवादी संगठन लिट्टे पर प्रतिबन्ध दो साल के लिए बढ़ाया।
2008: भारतीय मूल की मंजूला सूद ब्रिटेन में मेयर बनने वाली पहली एशियाई महिला बनीं।
2013: पेंटर गेर्हार्ड रिक्टर की एक पेंटिंग 37.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर में नीलाम हुई। ये किसी भी कलाकार के जीवित रहते उसकी कृति की नीलामी की सबसे बड़ी रकम है।
2014: भारतीय नौसेना का प्रसिद्ध युद्धपोत INS Iदिल्ली की सेवामुक्ति। यह उस समय का सबसे बड़ा और आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत था जिसे 1953 में शामिल किया गया था। बाद में इसके नाम से नई श्रेणियां बनीं।
2018: आंध्र प्रदेश में गोदावरी नदी में नाव डूबने से 40 लोगों की मौत। 20 लोगों को बचाया गया।
2018: वाराणसी में कैंट रेलवे स्टेशन के पास बनाए जा रहे फ्लाईओवर का एक हिस्सा अचानक गिर जाने से उसके नीचे दबकर 18 लोगों की मौत हो गई थी।
2024: केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पहली बार 14 लोगों को भारत की नागरिकता के प्रमाण पत्र सौंपे।
2024: फ्रांस में 77वें कांस फिल्म फेस्टिवल का आगाज हुआ।
2025: न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
2025: बुर्किना फासो में हमला- इस्लामी चरमपंथी समूह ‘जमात नसर अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन’ ने दावा किया कि उन्होंने एक सैन्य अड्डे पर हमला कर 200 सैनिकों को मार गिराया।
15 मई को जन्मे व्यक्ति (Born on 15 May)
1817: देवेन्द्रनाथ ठाकुर – प्रख्यात विद्वान् और धार्मिक नेता।
1859: पियरे क्यूरी– 1903 में इन्हें मैडम क्यूरी के साथ भौतिकी का नोबल पुरस्कार दिया गया था। मैडम क्यूरी इनकी पत्नी थीं और दोनों ने मिलकर रेडियम की खोज की थी।
1892: हरि विनायक पाटस्कर – भारतीय राजनीतिज्ञ तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
1897: अल्लूरी सीताराम राजू – प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय स्वतंत्रता सेनानी।
1923: जॉनी वॉकर – भारतीय हास्य अभिनेता।
1933: टी. एन. शेषन – भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त।
1965: माधुरी दीक्षित नेने – बालीवुड अभिनेत्री।
1957: सुशील चन्द्रा – भारत के 24वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
1991: एडिथ क्रेसन – फ़्रांस की पहली महिला प्रधानमंत्री।
15 मई को हुए निधन (Died on 15 May)
1958: यदुनाथ सरकार – प्रसिद्ध इतिहासकार।
1991: कालिंदी चरण पाणिग्रही – प्रसिद्ध उड़िया कवि, उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार और निबंधकार थे।
1998: राधिका रंजन गुप्ता – भारतीय राजनीतिक दल जनता पार्टी के राजनेता।
2010: भैरोंसिंह शेखावत – राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व भारत के उपराष्ट्रपति।
2017: सुब्रमण्यम रामास्वामी – भारतीय राज्य पुदुचेरी के भूतपूर्व चौथे मुख्यमंत्री थे।
2023: हेशू – दक्षिण कोरियाई गायिका का 29 वर्ष की आयु में निधन।
15 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 15 May)
विश्व परिवार दिवस (International Day of Families)
विश्व परिवार दिवस 15 मई को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। 1995 से यह सिलसिला जारी है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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