01 August 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 01 अगस्त 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
01 August 2026 Ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत- श्रावण, अमांत- श्रावण
तिथि: श्रावण मास (कृष्ण पक्ष) की तृतीया तिथि (शाम 05:07 बजे तक, तत्पश्चात चतुर्थी तिथि प्रारंभ)
नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र (शाम 06:01 बजे तक, तत्पश्चात पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ)
योग: शोभन योग (दोपहर 02:12 बजे तक, तत्पश्चात अतिगंड योग प्रारंभ)
करण: वणिज (शाम 05:07 बजे तक), तत्पश्चात विष्टि (भद्रा) प्रारंभ।
दिन: शनिवार
प्रविष्टे: 17 श्रावण
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:43 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:12 बजे
चन्द्रोदय: रात 09:25 बजे
चन्द्रास्त: प्रातः 09:34 बजे (2 अगस्त)
चन्द्र राशि: चन्द्रमा कुंभ राशि पर संचार करेगा।
सूर्य राशि: सूर्य देव कर्क राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:10 से 04:56 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 से 03:37 बजे तक।
गोधूलि बेला: सायं 07:11 से 07:32 बजे तक।
अमृत काल: सुबह 10:15 से 11:51 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 09:05 से 10:46 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 01:57 से 03:39 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 05:43 से 06:37 बजे तक एवं सुबह 06:37 से 07:31 बजे तक।
पंचक: पूरे दिन-रात पंचक का प्रभाव रहेगा।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
कजरी तीज: श्रावण कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन का विशेष महत्व है।
संकष्टी चतुर्थी व्रत: सायं 05:07 बजे चतुर्थी तिथि लगने के कारण आज रात भगवान श्री गणेश जी की प्रसन्नता के लिए संकष्टी चतुर्थी का अर्घ्य व पूजन किया जाएगा।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार का दिन है और कुंभ राशि के चंद्रमा तथा शतभिषा नक्षत्र के साथ संकष्टी चतुर्थी का शुभ संयोग बन रहा है, इसलिए शनि दोष से मुक्ति, संकटों के निवारण और भगवान गणेश व शनिदेव की कृपा पाने के लिए प्रातःकाल स्नान के बाद पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। संध्या समय भगवान गणेश जी को दूर्वा तथा मोदक या गुड़-तिल अर्पित करें और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ तथा ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्रों का जप करें। आज के दिन जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द की दाल, या सरसों के तेल का दान करना कार्य-सिद्धि और सफलता दिलाने वाला माना जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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