Himachal Tribal Development: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में विकास करना प्रशासनिक और भौगोलिक दृष्टि से हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है। लाहौल-स्पीति, किनौर, पांगी और भरमौर जैसे ऊंचे और दुर्गम इलाकों में कम आबादी, कठिन रास्ते और लंबे समय तक रहने वाली बर्फबारी के कारण सुविधाएं पहुंचाना आसान नहीं होता। इन सब चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने जनजातीय विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, आजीविका और सामाजिक कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है।
हिमाचल प्रदेश का लगभग 42.49 प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित क्षेत्रों में आता है, जहां सिर्फ 3.92 लाख लोग रहते हैं। यहां का जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किलोमीटर मात्र 7 व्यक्ति है, जबकि पूरे राज्य का औसत 123 है। इस बेहद कम आबादी और कठिन रास्तों के बाद भी राज्य सरकार ने सभी स्थायी और मौसमी जनजातीय बस्तियों में शत-प्रतिशत बिजली और सुरक्षित पेयजल पहुंचा दिया है। इसके अलावा, राज्य के औसत 972 के मुकाबले जनजातीय क्षेत्रों में लिंगानुपात 1,018 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष है, जो काफी बेहतर है।
राज्य सरकार ने अपनी जनजातीय उप-योजना (एसटीपी) के तहत वार्षिक विकास परिव्यय का 9 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा है, जो कि इन क्षेत्रों की आबादी के अनुपात से कहीं ज्यादा है। वर्ष 2024-25 के दौरान इस योजना के तहत 890.28 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि वर्ष 2025-26 के लिए अनुसूचित जनजाति घटक के तहत 638.73 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
वर्तमान सरकार जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है। वर्ष 2025-26 के दौरान 3,361 जनजातीय छात्रों को प्री-मैट्रिक, 5,693 को पोस्ट-मैट्रिक और 304 छात्रों को मेरिट स्कॉलरशिप का लाभ मिला है। प्रदेश में चल रहे चार एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, जिनमें 1,008 छात्र पढ़ रहे हैं, शानदार परिणाम दे रहे हैं। यहां के छात्र आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों और आईआईएसईआर जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में जगह बना रहे हैं। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में हॉस्टल, क्लासरूम, लाइब्रेरी और शिक्षकों के रहने के आवास भी बनाए जा रहे हैं।

आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों से सुदूर गांवों तक पहुंचीं आधुनिक चिकित्सा सेवाएं
जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क काफी मजबूत किया गया है। इस समय जनजातीय बेल्ट में 2 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उप-केंद्र काम कर रहे हैं। इसके साथ ही 568 आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए 5,084 लाभार्थियों को पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। सुक्खू सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि लाहौल-स्पीति और भरमौर में ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ स्थापित करना है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ एमआरआई, सीटी स्कैन और आधुनिक लैब की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई गई हैं।

खेती-बाड़ी और युवाओं के रोजगार पर विशेष फोकस
रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 197.05 लाख रुपये खर्च करके 9,000 क्विंटल प्रमाणित बीज और 3,200 मीट्रिक टन उर्वरक बांटे गए। पिछले तीन वर्षों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से 815 जनजातीय युवाओं को ट्रेनिंग दी गई, जिनमें से 577 युवाओं ने अपना रोजगार शुरू कर लिया है। वर्ष 2025-26 के दौरान रोजगार एक्सचेंजों में 6,576 जनजातीय युवाओं ने पंजीकरण कराया है।

लखपति दीदी और सुख सम्मान निधि से महिला सशक्तिकरण
जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 3,234 महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया गया है। इसके अलावा, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

इतिहास में पहली बार काजा में राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस
प्रशासन को जनता के बिल्कुल करीब ले जाने के संकल्प के साथ, राज्य के 75 साल के इतिहास में पहली बार स्पीति घाटी के काजा में राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस मनाया गया। यह फैसला दिखाता है कि सरकार दूरदराज के क्षेत्रों में समावेशी विकास के लिए कितनी गंभीर है। बुनियादी ढांचे के विकास के तहत शिक्षक आवासीय परिसरों, नागरिक अस्पतालों, जनजातीय संग्रहालयों और लादरचा में पर्यटन पार्क जैसी परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
होमस्टे और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारी सब्सिडी
सस्टेनेबल टूरिज्म और रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए सरकार जनजातीय क्षेत्रों में 5 करोड़ रुपये तक के होमस्टे निवेश पर 5 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दे रही है। इसी तरह, राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों में निजी भूमि पर 100 किलोवाट से 2 मेगावाट तक के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाने के लिए 5 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जा रही है।
पांगी घाटी बनी प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल
पांगी घाटी को हिमाचल प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है, जो सतत विकास का एक बेहतरीन मॉडल बन चुका है। 5 करोड़ रुपये के रिवाल्विंग फंड और प्राकृतिक रूप से उगाए गए जौ के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ, यह पहल इस क्षेत्र में रसायन मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रही है।
डिजिटल कनेक्टिविटी और इंटरनेट से बदले सुदूर गांव
डिजिटल कनेक्टिविटी के जरिए दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं को आसान बनाया गया है। भारतनेट योजना के तहत 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर 705 ग्राम पंचायतों को इंटरनेट से जोड़ा गया है। इससे स्थानीय लोगों को डिजिटल गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और बैंकिंग सेवाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से गांवों का कायाकल्प
केंद्र और राज्य के समन्वय से चल रहे ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत 10 जिलों के 270 गांवों को एकीकृत विकास के लिए चुना गया है। इसके तहत 17 मंत्रालयों के माध्यम से 25 तरह के विकास कार्य किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम ने हर घर नल से जल, भारतनेट कनेक्टिविटी और एलपीजी कवरेज को तेजी से बढ़ाया है। साथ ही, सरकार जनजातीय संस्कृति और धरोहर को बचाने के लिए संग्रहालयों और सांस्कृतिक केंद्रों का निर्माण कर रही है, ताकि विकास के साथ-साथ इन क्षेत्रों की अनूठी पहचान भी सुरक्षित रहे।
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