Andy Burnham: ब्रिटेन के राजनीतिक पटल से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। लेबर पार्टी के दिग्गज नेता एंडी बर्नहैम सोमवार को औपचारिक तौर पर देश के नए प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण करने जा रहे हैं। 56 वर्षीय बर्नहैम को लेबर पार्टी का निर्विरोध नेता चुना गया है, जिसके बाद वह निवर्तमान प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर की जगह देश की बागडोर अपने हाथों में लेंगे। अंतरराष्ट्रीय मामलों और रणनीतिक क्षेत्रों के जानकारों का दृढ़ विश्वास है कि बर्नहैम के नए नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के बीच सदियों पुराने रणनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और शैक्षणिक संबंधों की प्रगाढ़ता पहले की तरह ही मजबूत बनी रहेगी, बल्कि आने वाले दिनों में इसमें और अधिक तेजी देखने को मिल सकती है।
बीते एक साल के दौरान ग्रेटर मैनचेस्टर प्रशासन और एंडी बर्नहैम के साथ भारत का कामकाजी तालमेल बहुत शानदार रहा है। बर्नहैम ने विशेष रूप से उत्तरी इंग्लैंड और भारत के बीच व्यापारिक निवेश व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में अत्यंत सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्च 2025 में मैनचेस्टर के भीतर भारतीय महावाणिज्य दूतावास का खोला जाना दोनों लोकतांत्रिक देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक मील का पत्थर साबित हुआ था।
भारत के साथ Andy Burnham का जुड़ाव
ब्रिटेन के भावी प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम का भारत के साथ काफी पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने साल 2019 में भारत का एक सफल आधिकारिक दौरा किया था। इसके उपरांत, दिसंबर 2025 में उन्होंने तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी के साथ द्विपक्षीय मसलों पर उच्च स्तरीय चर्चा की थी। यही नहीं, मार्च 2026 में आयोजित हुए ‘इंडिया-नॉर्थ इंग्लैंड ऑपर्च्युनिटी समिट’ में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। बर्नहैम पूर्व में भी कई मंचों से यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि ग्रेटर मैनचेस्टर की अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीति में भारत सबसे प्रमुख और विश्वसनीय साझीदार देश है।
Andy Burnham: ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंचे भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय रिश्ते
पिछले एक दशक के इतिहास पर नजर डालें तो भारत और ब्रिटेन के आपसी संबंध वर्तमान में अपने सबसे सुनहरे और मजबूत दौर से गुजर रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के शीर्ष शासनाध्यक्षों के बीच हुए दौरों और हाल ही में प्रभावी रूप से लागू हुए व्यापक आर्थिक और व्यापारिक समझौते (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार, बड़े निवेश और औद्योगिक साझेदारी को एक नई रफ्तार और ऐतिहासिक दिशा दे दी है। बर्नहैम के आने से इस गति को और बल मिलेगा।
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