Lajpat Rai Water Works: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने घोषणा की है कि बीत क्षेत्र में वर्ष 1949 में स्थापित ऐतिहासिक ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ टाहलीवाल जलापूर्ति योजना को अब ‘वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक योजना के पंप हाउस, उसमें लगी विंटेज पम्पिंग मशीनरी, पुराने तकनीकी दस्तावेजों और जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी अन्य धरोहरों का पुनर्संरक्षण कर उन्हें सहेजा जाएगा। शनिवार को इस ऐतिहासिक स्थल का मुआयना करने के बाद उपमुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक पंप हाउस में आज भी देश की आजादी के दौर की विशाल विंटेज पम्पिंग मशीनें, फ्लाई-व्हील से संचालित होने वाले उपकरण और पुरानी मूल संरचना पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यह संरचना उस समय के बेहतरीन इंजीनियरिंग कौशल का एक अद्भुत उदाहरण पेश करती है। इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों को उनके मूल स्वरूप में ही संरक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग कोनों में मौजूद पुरानी और ऐतिहासिक जलापूर्ति से जुड़ी मशीनरी को भी यहां लाकर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि राज्य में पेयजल व्यवस्था के विकास की पूरी कहानी को एक ही छत के नीचे देखा जा सके।
साल 1949 में सर चंदूलाल एम. त्रिवेदी ने किया था उद्घाटन
इस ऐतिहासिक परियोजना के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इसका आधिकारिक उद्घाटन 6 दिसंबर 1949 को तत्कालीन पूर्वी पंजाब के राज्यपाल सर चंदूलाल एम. त्रिवेदी द्वारा किया गया था। उस दौरान इस पूरी योजना का नाम ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ रखा गया था। इसका निर्माण कार्य तत्कालीन लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य विभाग की देखरेख में पूरा हुआ था। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस वाटर वर्क्स में स्थापित की गई पूरी मशीनरी को उस दौर में विशेष रूप से इंग्लैंड से पानी के जहाजों के जरिए मंगवाया गया था।

31 गांवों की प्यास बुझाने के लिए तैयार हुई थी योजना
यह जलापूर्ति योजना अपने समय में बीत क्षेत्र के 31 गांवों की लगभग 20 हजार से ज्यादा आबादी को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए तैयार की गई थी। इस पंप हाउस में 156 हॉर्स पावर के दो बेहद शक्तिशाली रसटन डीजल इंजन लगाए गए थे। इन इंजनों के दम पर साल 1974 तक पूरे क्षेत्र में पेयजल की निरंतर आपूर्ति की जाती रही। इसके बाद के वर्षों में बिजली से चलने वाली आधुनिक पम्पिंग तकनीक की शुरुआत हुई, जिसके कारण यह पुराना सिस्टम बंद हो गया, लेकिन आज भी यह ऐतिहासिक पंप हाउस और इसकी मशीनें सही सलामत स्थिति में खड़ी हैं।

आजादी के बाद की तकनीकी दूरदर्शिता की अनूठी मिसाल
डिप्टी सीएम ने कहा कि देश की आजादी के ठीक बाद की कठिन परिस्थितियों और बेहद सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई यह परियोजना उस दौर के अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और दूरदर्शिता का एक जीवंत प्रमाण है। आज भले ही हिमाचल प्रदेश में पानी की बड़ी और बेहद आधुनिक पेयजल योजनाएं काम कर रही हैं, लेकिन यह ऐतिहासिक वाटर वर्क्स दशकों तक बीत क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा बना रहा। प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था की मजबूत बुनियाद खड़ी करने में इस केंद्र का बहुत बड़ा ऐतिहासिक योगदान रहा है।

नई पीढ़ी और शोधकर्ताओं को मिलेगा इतिहास जानने का मौका
मुकेश अग्निहोत्री ने विश्वास जताया कि हेरिटेज म्यूजियम के रूप में तैयार होने के बाद यह पूरा परिसर स्कूली बच्चों, युवा इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए ज्ञानवर्धन का एक बड़ा केंद्र साबित होगा। यहां पर पुराने पंप हाउस, विंटेज मशीनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के विकास से जुड़े दस्तावेजों को बेहद करीने से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाली नई पीढ़ियों को राज्य के विकास की ऐतिहासिक यात्रा और उस दौर के अधिकारियों व अभियंताओं के बेमिसाल योगदान को बहुत करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

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