Himachali Folk Singer Monika Bhardwaj: कहते हैं कि प्रतिभा कुदरत की अनमोल देन होती है। जब किसी को सही समय पर सही मंच मिल जाता है, तो वह अपनी कला से न केवल खुद को साबित करता है बल्कि अपने पूरे क्षेत्र और परिवार का नाम भी रोशन कर देता है। संगीत की दुनिया में इन दिनों एक ऐसा ही नाम तेजी से उभर रहा है और वह नाम है मोनिका भारद्वाज का।
सिरमौर जिले के दूरदराज इलाके शिलाई से ताल्लुक रखने वाली मोनिका अपनी जादुई और सुरीली आवाज के दम पर हिमाचली लोक संगीत जगत में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उनके गाए सिरमौरी गीत आज हिमाचल की वादियों में गूंज रहे हैं। फेसबुक और यूट्यूब पर उनके गानों को लाखों लोग बेहद पसंद कर रहे हैं।
इस होनहार लोक गायिका ने बहुत ही कम समय में अपनी विशेष गायकी से पूरे प्रदेश के लोगों के दिलों में जगह बना ली है। आज मोनिका हिमाचल प्रदेश के कई बड़े और भव्य सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी यादगार प्रस्तुतियां दे रही हैं। इन कार्यक्रमों में उन्हें लगातार सम्मानित भी किया जा रहा है, जिससे वह सिरमौर की समृद्ध लोक कला और संस्कृति का मान पूरे राज्य में बढ़ा रही हैं।
भटोड़ी गांव से नाहन तक का सफर और संगीत का बचपन
मोनिका भारद्वाज का जन्म सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र के भटोड़ी गांव में महेंद्र सिंह के घर हुआ। हालांकि, बचपन से ही वह नाहन में अपने चाचा-चाची के साथ रहीं और उनकी पूरी पढ़ाई-लिखाई भी नाहन में ही पूरी हुई। बचपन से ही संगीत के प्रति उनका झुकाव बहुत गहरा था। स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने नाहन में आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और हिमाचल दिवस जैसे बड़े राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेना शुरू कर दिया था।
गुरु धर्मदत्त सहगल से सीखे संगीत के सुर और ताल
स्कूली शिक्षा के दौरान मोनिका ने शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित होने वाली लगभग सभी संगीत प्रतियोगिताओं में हमेशा पहला स्थान हासिल किया। इस दौरान उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया। मोनिका संगीत के क्षेत्र में प्रसिद्ध संगीतकार धर्मदत्त सहगल को अपना गुरु मानती हैं। उन्हीं की देखरेख में मोनिका ने राग, गजल और पहाड़ी लोक गीतों को सही सुर और ताल पर गाने का कठिन अभ्यास किया और संगीत की बारीकियों को समझा।
संगीत में हासिल की मास्टर डिग्री और भविष्य के लक्ष्य
अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मोनिका ने डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय महाविद्यालय नाहन से संगीत विषय में स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री पूरी की। संगीत को ही अपना करियर और भविष्य बनाने के इरादे से वह आगे बढ़ीं और उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से संगीत में मास्टर डिग्री (एमए) भी हासिल की।
यूट्यूब पर शुभम और किरनेश के साथ मचाया धमाल
हाल ही में यूट्यूब पर मोनिका की एक नई पहाड़ी नॉन-स्टॉप गीतमाला रिलीज हुई है, जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इस एल्बम में शिलाई क्षेत्र के ही दो अन्य बेहतरीन उभरते कलाकारों, शुभम शर्मा और किरनेश पुंडीर ने भी अपनी आवाज दी है। इससे पहले भी इस युवा तिकड़ी के गाए ‘मेरे साजना’, ‘औतरुए’, ‘ओ नूपिए’, ‘भदरी’ और ‘जानकी को रासो’ जैसे सिरमौर के 57 सदाबहार लोक गीत यूट्यूब पर तहलका मचा चुके हैं।
प्रतिदिन कड़ा रियाज और पारंपरिक गीतों पर पीएचडी की तैयारी
मोनिका संगीत को लेकर पूरी तरह समर्पित हैं। अपनी आवाज को सुरीला बनाए रखने के लिए वह रोजाना सुबह और शाम एक-एक घंटा कड़ा रियाज करती हैं। उनका अगला लक्ष्य संगीत में पीएचडी करना है। वह हिमाचल प्रदेश और खासकर अपने गृह जिले सिरमौर के पारंपरिक और पुराने लोक गीतों पर रिसर्च करना चाहती हैं, ताकि लुप्त हो रही लोक संस्कृति को संगीत के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।

प्रतिष्ठित हिम गौरव सरोकार अवार्ड से की गईं सम्मानित
शास्त्रीय संगीत और पहाड़ी संस्कृति को अपने गीतों के जरिए जिंदा रखने और उसे सहेजने के बेहतरीन प्रयासों के लिए मोनिका को एक बड़ा सम्मान भी मिला है। हिमाचल प्रदेश यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स बद्दी द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित ‘हिम गौरव सरोकार अवार्ड’ से नवाजा गया है, जो उनके बढ़ते कदम और कला के प्रति समर्पण का जीता-जागता सबूत है।
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