06 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 218वां दिन (लीप वर्ष में 219वां दिन) है। साल में अभी और 147 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 06 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 06 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1945: 81 साल पहले दुनिया ने देखा परमाणु तबाही का खौफनाक मंजर, अमेरिकी हमले से तबाह हो गए थे जापान के 2 शहर
यह कहानी मानव इतिहास के उस सबसे भयावह और काले अध्याय की है, जिसने एक ही झटके में लाखों जिंदगियों को राख में बदल दिया और दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए परमाणु हथियार के खौफनाक दौर में धकेल दिया।
साल 1945 में दूसरे विश्वयुद्ध का अंत करीब था। जर्मनी के आत्मसमर्पण के बाद अब सिर्फ जापान ही मित्र देशों के सामने डटा हुआ था। जुलाई 1945 में जर्मनी के पोट्सडम शहर में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन के बीच बैठक हुई। ट्रूमैन और चर्चिल ने स्पष्ट कर दिया कि यदि जापान तुरंत और बिना शर्त आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसके खिलाफ अभूतपूर्व और कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
6 अगस्त की सुबह जापान के 7वें सबसे बड़े शहर और सैन्य मुख्यालयों वाले रणनीतिक केंद्र हिरोशिमा के लोग रोजमर्रा के कामों में जुटे थे। तभी सुबह 8 बजे आसमान में अमेरिकी लड़ाकू विमान ‘एनोला गे’ की गड़गड़ाहट गूंजी, जिसे कर्नल पॉल टिबेट्स उड़ा रहे थे। इस विमान में 20 हजार टन क्षमता वाला 4 टन का यूरेनियम बम ‘लिटिल बॉय’ लोड था।
सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर यह बम गिराया गया और ठीक 43 सेकेंड बाद शीमा क्लीनिक के ऊपर इसमें महाविस्फोट हुआ। पलक झपकते ही वहां का तापमान 10 लाख डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। बम के केंद्र में आने वाला हर इंसान और इमारत सेकेंडों में राख बन गई। चंद पलों में ही 80 हजार से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और पूरा शहर मलबे में तब्दील हो गया।
अभी जापान इस भीषण झटके से उबर भी नहीं पाया था कि 3 दिन बाद, 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने नागासाकी शहर पर ‘फैट मैन’ नामक दूसरा प्लूटोनियम परमाणु बम गिरा दिया। इन दोनों हमलों में अनुमानतः हिरोशिमा में 1.40 लाख और नागासाकी में करीब 70 हजार लोग मारे गए। परमाणु विकिरण के घातक प्रभावों के कारण आने वाली पीढ़ियां भी कैंसर और विकलांगता का शिकार बनीं।
1986: आज ही के दिन भारत में जन्मी पहली ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’, चिकित्सा विज्ञान में रचा गया नया इतिहास
6 अगस्त 1986 की भोर भारत के चिकित्सा विज्ञान और देश के लाखों निसंतान दंपतियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई। मुंबई के जसलोक अस्पताल में जब तड़के पहली किलकारी गूंजी, तो भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया जहां इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (IVF) यानी टेस्ट ट्यूब तकनीक से पहला सफल जन्म हुआ।

24 वर्ष की पार्ट-टाइम शिक्षिका मणिबेन चावड़ा और बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कार्यरत उनके पति शादी के कई वर्षों बाद भी माता-पिता बनने के लिए संघर्ष कर रहे थे। चिकित्सीय जटिलताओं के कारण जब प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव नहीं हो पा रहा था, तब उन्होंने मुंबई की प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. इंदिरा हिंदुजा से परामर्श लिया। डॉ. हिंदुजा ने दंपती को भारत में उस समय बेहद नई मानी जाने वाली IVF तकनीक अपनाने की सलाह दी। मणिबेन और उनके पति ने डॉक्टर पर पूरा भरोसा जताते हुए इस ऐतिहासिक प्रयोग के लिए अपनी सहमति दी। डॉ. इंदिरा हिंदुजा के कुशल नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने प्रयोगशाला में स्पर्म और एग का मिलन कराकर भ्रूण तैयार किया।
30 नवंबर 1985 को इस भ्रूण को मणिबेन के गर्भाशय में सफलतापूर्वक स्थानांतरित (Transfer) किया गया। इसके बाद 6 जनवरी 1986 को अल्ट्रासाउंड जांच में एक पूर्णतः स्वस्थ प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई।
आखिरकार 06 अगस्त 1986 को सुबह के 3 बजकर 30 मिनट पर मणिबेन ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया, जिसका नाम ‘हर्षा’ रखा गया। हर्षा का जन्म भारत में वैज्ञानिक रूप से प्रामाणिक पहला IVF प्रसव था।
हर्षा चावड़ा का जन्म सिर्फ एक बच्ची का आगमन नहीं था, बल्कि यह भारत में बांझपन के इलाज की दिशा में एक बहुत बड़ी क्रांति थी। इस सफलता ने समाज में निसंतानता से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ा और चिकित्सा क्षेत्र में शोध के नए रास्ते खोले। समय का खूबसूरत चक्र देखिए कि वर्ष 2016 में, भारत की यही पहली ‘टेस्ट ट्यूब बेबी’ हर्षा खुद प्राकृतिक रूप से एक स्वस्थ बेटे की मां बनीं।
1997: जब श्रीलंका ने भारत के खिलाफ बनाए थे 952 रन, जो आज तक है टेस्ट इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर
यह कहानी क्रिकेट इतिहास के उस ऐतिहासिक और रिकॉर्डतोड़ मुकाबले की है, जिसने टेस्ट क्रिकेट के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और एक ऐसा महारिकॉर्ड कायम किया जिसे आज 29 साल बाद भी दुनिया की कोई टीम नहीं तोड़ पाई है।
अगस्त 1997 में भारतीय टीम श्रीलंका के दौरे पर थी। 2 अगस्त 1997 को कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच शुरू हुआ। भारतीय कप्तान सचिन तेंदुलकर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। नवजोत सिंह सिद्धू (131), कप्तान सचिन तेंदुलकर (143) और मोहम्मद अजहरुद्दीन (126) के शानदार शतकों की बदौलत भारत ने अपनी पहली पारी 8 विकेट पर 537 रनों के विशाल स्कोर पर घोषित कर दी। भारत के इस मजबूत स्कोर को देखकर ऐसा लग रहा था कि मैच पर भारत की पकड़ मजबूत है।
जवाब में उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और ओपनर मार्वन अट्टापट्टू महज 39 रन के कुल योग पर 26 रन बनाकर आउट हो गए। लेकिन इसके बाद जो हुआ उसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या और मध्यक्रम के बल्लेबाज रोशन महानामा ने क्रीज पर खूंटा गाड़ दिया। दोनों ने भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस करते हुए दूसरे विकेट के लिए 576 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी कर डाली। सनथ जयसूर्या ने 340 रनों की ट्रिपल सेंचुरी जड़ी, वहीं रोशन महानामा ने भी 225 रनों की मैराथन पारी खेली।
06 अगस्त 1997 को श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में 6 विकेट खोकर 952 रनों का विशालकाय स्कोर खड़ा किया। इसी के साथ श्रीलंका ने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक पारी में सबसे बड़ा स्कोर बनाने का नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया। श्रीलंका ने इंग्लैंड का 59 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, जिसने 1938 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 903/7 रन बनाए थे। मैच में कुल 1,489 रन बने और यह मुकाबला अंततः ड्रॉ पर छूटा, लेकिन 6 अगस्त का दिन क्रिकेट इतिहास के पन्नों में श्रीलंका के इस अटूट महारिकॉर्ड के लिए हमेशा के लिए दर्ज हो गया।
1991: आज ही के दिन लाइव हुई दुनिया की पहली वेबसाइट
आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट पर करोड़ों वेबसाइट्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से हम घर बैठे दुनिया भर की जानकारी, वीडियो और सेवाएं हासिल करते हैं। लेकिन हमेशा से इंटरनेट ऐसा नहीं था। वेबसाइट्स के इस विशाल संसार की शुरुआत आज ही के दिन यानी 06 अगस्त 1991 को हुई थी, जब दुनिया की पहली आधिकारिक वेबसाइट इंटरनेट पर लाइव की गई थी।
वेबसाइट का यह सफर साल 1991 में लाइव होने से ठीक दो साल पहले, यानी 1989 में शुरू हुआ था। उस दौर में अलग-अलग कंप्यूटिंग डिवाइसेज और वैज्ञानिकों के बीच डिजिटल तरीके से सूचनाएं साझा करने का कोई सुलभ माध्यम नहीं था। इस समस्या को हल करने के लिए ब्रिटिश कंप्यूटर साइंटिस्ट टिम बर्नर्स-ली ने अपने मैनेजर के सामने एक ‘इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम’ का प्रस्ताव रखा, जो हाइपरटेक्स्ट के जरिए इंटरनेट से जुड़े कंप्यूटरों पर पड़े दस्तावेजों को आपस में जोड़ सके। शुरुआत में उनके मैनेजर ने इस आइडिया को खारिज कर दिया था, लेकिन ली हार मानने वालों में से नहीं थे। वे कुछ सुधारों के साथ दोबारा अपने मैनेजर के पास पहुंचे और इस बार उन्हें हरी झंडी मिल गई।
टिम बर्नर्स-ली ने अगले दो साल तक इस प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत की। उन्होंने वेबसाइट बनाने और उसे संचालित करने के लिए आवश्यक बुनियादी तकनीकें जैसे HTML (Hypertext Markup Language), HTTP (Hypertext Transfer Protocol) और URLs (Uniform Resource Locators) को खुद विकसित किया। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की पहली वेबसाइट को बनाने और कोडिंग का यह पूरा ऐतिहासिक काम दिग्गज टेक-लीडर स्टीव जॉब्स की कंपनी द्वारा तैयार किए गए ‘NeXT’ कंप्यूटर पर किया गया था।
6 अगस्त 1991 को टिम बर्नर्स-ली ने दुनिया की पहली वेबसाइट को यूरोपीय ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च (CERN) की प्रयोगशाला में आधिकारिक रूप से लाइव कर दिया। इस वेबसाइट का नाम info.cern.ch रखा गया था। आज की रंग-बिरंगी, तस्वीरों और वीडियो से भरी वेबसाइट्स के उलट, दुनिया की यह पहली वेबसाइट बेहद साधारण थी। इसमें न तो कोई इमेज थी, न ही कोई ग्राफ़िक्स; यह पूरी तरह से केवल टेक्स्ट (शब्दों) पर आधारित थी। इस वेबसाइट पर वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) प्रोजेक्ट, वेब पेज बनाने के तौर-तरीकों और हाइपरटेक्स्ट के इस्तेमाल के बारे में बुनियादी जानकारियां दी गई थीं।
लॉन्चिंग के कुछ समय बाद, उचित डिजिटल आर्काइव न होने के कारण यह ऐतिहासिक वेबसाइट इंटरनेट के सागर से कहीं गायब हो गई थी। इसके महत्व को समझते हुए, साल 2013 में CERN ने दुनिया की इस पहली वेबसाइट को फिर से रिस्टोर करने का एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया। इस सफल प्रयास की बदौलत यह वेबसाइट आज भी इंटरनेट पर पूरी तरह लाइव है।
दुनिया की पहली वेबसाइट आज भी लाइव है। अगर आप गूगल पर info.cern.ch सर्च करते हैं तो आपको चार ऑप्शन दिखेंगे। पहले ऑप्शन पर क्लिक कर आप दुनिया की पहली वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। इसी पेज पर आपको वेब की शुरुआत के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी।
देश-विदेश में 06 अगस्त को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1821: ‘कौरियर ऑफ पेज बास’ अखबार का पहला अंक प्रकाशित हुआ था। यह यूनाइटेड किंगडम ऑफ नीदरलैंड्स के समय दक्षिणी प्रांतों (विशेषकर ब्रुसेल्स) में उदारवादी विपक्ष की एक प्रमुख आवाज बना।
1825: बोलिविया ने स्पेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की।
1890: न्यूयॉर्क में विलियम केमलर को इलेक्ट्रिक चेयर में करंट से मौत की सजा दी गई। विलियम ने एक महिला की कुल्हाड़ी से हत्या की थी। ये पहला मामला था जब इलेक्ट्रिक चेयर के जरिए किसी को मौत की सजा दी गई थी।
1906: स्वतंत्रता सेनानी चित्तरंजन दास और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने मिलकर “वंदेमातरम” समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान जन-जागृति और देशभक्ति की भावना को प्रसारित करने में एक महत्वपूर्ण कदम था।
1926: अमेरिकी तैराक गेरट्रुड एडर्ल इंग्लिश चैनल को तैरकर पार करने वाली पहली महिला बनीं।
1962: जमैका आधिकारिक तौर पर यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्र हुआ।
1962: 300 साल बाद ब्रिटेन के शासन से मुक्त होकर जमैका स्वतंत्र राष्ट्र बना।
1964: अमेरिका के नेवादा में विश्व के सबसे प्राचीन वृक्ष ‘प्रोमेथियस’ नामक प्राचीन ब्रिसलकोन पाइन को एक शोध के दौरान काट दिया गया था। यह पेड़ लगभग 4,862 से 5,200 वर्ष पुराना था।
1990: कुवैत पर हमले की वजह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।
1990: पाकिस्तानी राष्ट्रपति गुलाम इसाक खान ने बेनजीर भुट्टो को प्रधानमंत्री पद से हटा दिया।
2004: वर्ष 2000 में फिजी के प्रधानमंत्री महेन्द्र चौधरी के ख़िलाफ़ तख्तापलट के मामले में उपराष्ट्रपति जोपे सेनीलोली को 4 वर्ष की जेल।
2007: हंगरी के वैज्ञानिकों ने लगभग 80 लाख साल पुराने देवदार के वृक्ष का जीवाश्म प्राप्त करने का दावा किया। विश्व इतिहास और विज्ञान के दृष्टिकोण से यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, जिससे प्राचीन वनस्पति और जलवायु के अध्ययन में मदद मिली।
2010: जम्मू-कश्मीर में अचानक आई बाढ़ से कम से 255 लोग मारे गए।
2012: नासा का क्यूरिओसिटी रोवर मंगल ग्रह पर पहुंचा, जिसने लाल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं की खोज में नए आयाम स्थापित किए।
2021: भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ का नाम बदलकर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ कर दिया था।
2022: जगदीप धनखड़ भारत के 14वें उपराष्ट्रपति चुने गए।
06 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1881: सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग– पेनिसिलिन (दुनिया की पहली एंटीबायोटिक दवा) के खोजकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता स्कॉटिश वैज्ञानिक।
1915: गुरदयाल सिंह ढिल्लों – भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय संसद की लोकसभा के 5वें अध्यक्ष।
1921: के. एम. चांडी – स्वतंत्रता सेनानी तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
1959: राजेन्द्र सिंह – भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता, जिन्हें भारत का “जल पुरुष” (Waterman of India) कहा जाता है। उन्हें रेमन मैगसेसे और स्टॉकहोम वॉटर प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है।
1962: मिशेल योह– मलेशियाई-हॉन्गकॉन्ग अभिनेत्री। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का एकेडमी (ऑस्कर) पुरस्कार जीतने वाली पहली एशियाई महिला।
1970: एम. नाइट श्यामलन -भारतीय मूल के बेहद प्रसिद्ध अमेरिकी फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता।
06 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
2019: सुषमा स्वराज – भारत की पूर्व विदेश मंत्री और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री।
06 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)

नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 01 से 07 अगस्त तक दुनिया भर में यह विशेष सप्ताह मनाया जाता है। इसकी शुरुआत डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के समर्थन से की गई थी।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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