02 August 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप 02 अगस्त 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
02 August 2026 Ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि)
मास: पूर्णिमांत- श्रावण, अमांत- श्रावण
तिथि: श्रावण मास (कृष्ण पक्ष) की चतुर्थी तिथि (शाम 05:28 बजे तक, तत्पश्चात पंचमी तिथि प्रारंभ)
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (शाम 06:05 बजे तक, तत्पश्चात उत्तराभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ)
योग: अतिगंड योग (दोपहर 02:02 बजे तक, तत्पश्चात सुकर्मा योग प्रारंभ)
करण: बव (सुबह 05:22 बजे तक), बालव (शाम 05:28 बजे तक), तत्पश्चात कौलव प्रारंभ।
दिन: रविवार
प्रविष्टे: 18 श्रावण
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:44 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:11 बजे
चन्द्रोदय: रात 10:00 बजे
चन्द्रास्त: प्रातः (3 अगस्त सुबह 10:38 बजे)
चन्द्र राशि: चंद्रमा दोपहर 12:28 बजे तक कुंभ राशि में रहने के बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य देव कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:11 से 04:57 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:43 से 03:37 बजे तक।
गोधूलि बेला: सायं 07:10 से 07:31 बजे तक।
अमृत काल: दोपहर 11:20 से 12:56 बजे तक।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सायं 05:30 से 07:11 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 12:28 से 02:09 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सायं 05:24 से 06:18 बजे तक।
भद्रा: सुबह 05:44 से 05:22 बजे तक (प्रातःकाल भद्रा की समाप्ति)।
पंचक: पूरे दिन-रात पंचक का प्रभाव रहेगा।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
संकष्टी चतुर्थी: श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना का विशेष संयोग।
नाग पंचमी: कई क्षेत्रों में श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि का मान होने से नाग देवता का पूजन किया जाता है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज रविवार का दिन है और भगवान सूर्य देव की उपासना का विशेष पर्व है, इसलिए आरोग्य, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए प्रातःकाल स्नान के पश्चात तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और गुड़ मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ करें। इसके साथ ही भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना और जरूरतमंदों को लाल वस्त्र, गेहूं या तांबे के बर्तन का दान करना अत्यंत शुभ और सर्वकार्य सिद्धिदायक माना जाता है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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