04 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 216वां दिन (लीप वर्ष में 217वां दिन) है। साल में अभी और 149 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 04 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 04 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1056: भारत में एशिया का पहला न्यूक्लियर रिएक्टर 15 महीने में बनकर हुआ था तैयार, जानिए ‘अप्सरा’ के नामकरण से लेकर ‘अप्सरा-यू’ बनने तक का सफर
यह कहानी भारत के परमाणु विज्ञान के उस स्वर्णिम अध्याय की है, जिसने देश को परमाणु ऊर्जा और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक मंच पर स्थापित किया और एशिया का पहला न्यूक्लियर रिसर्च रिएक्टर तैयार किया।

जनवरी 1954 में महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने ‘एटॉमिक एनर्जी इस्टैब्लिशमेंट ट्रॉम्बे’ (AEET – जिसे बाद में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर या BARC नाम दिया गया) की स्थापना की। डॉ. भाभा का लक्ष्य भारत में परमाणु ऊर्जा अनुसंधान को पंख देना था। इसके लिए देश भर से प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को ट्रॉम्बे बुलाया गया।
15 मार्च 1955 को भारत का पहला न्यूक्लियर रिसर्च रिएक्टर बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। तय किया गया कि यह रिएक्टर स्विमिंग पूल टाइप होगा और इसकी क्षमता 1 मेगावॉट थर्मल होगी। रिएक्टर के लिए आवश्यक यूरेनियम ईंधन की आपूर्ति के लिए ब्रिटेन के साथ समझौता किया गया।
भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दिन-रात एक करके महज 15 महीने के रिकॉर्ड समय में इस जटिल रिएक्टर का निर्माण पूरा कर लिया।
04 अगस्त 1956 को यह रिएक्टर पहली बार शुरू किया गया। यह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप का पहला न्यूक्लियर रिएक्टर था।
रिएक्टर के शुरू होते ही उससे निकलने वाली चेरेंकोव विकिरण की खूबसूरत नीली रोशनी को देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस रिएक्टर का नाम ‘अप्सरा’ रख दिया। अगले कई दशकों तक ‘अप्सरा’ का उपयोग रेडियोआइसोटोप उत्पादन, न्यूट्रॉन भौतिकी और परमाणु अनुसंधान में किया गया।
दशकों की निरंतर सेवा के बाद, क्षमता बढ़ाने और मेंटेनेंस के लिए साल 2009 में ‘अप्सरा’ को बंद कर दिया गया। इसके बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे स्वदेशी तकनीक से पूरी तरह अपग्रेड किया। क्षमता को 1 से बढ़ाकर 2 मेगावॉट थर्मल किया गया और ईंधन भी भारत में ही तैयार किया गया। 10 सितंबर 2018 को इस अपग्रेडेड रिएक्टर को दोबारा शुरू किया गया, जिसे ‘अप्सरा-यू’ नाम दिया गया।
1944: जब नाज़ी सैनिकों ने पकड़ी 15 साल की एनी फ्रैंक, जिसकी डायरी बनी हिटलर के अत्याचारों का इतिहास
यह कहानी इतिहास के उस काले पन्ने की है, जिसने एक मासूम बच्ची की कलम के जरिए द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए नाज़ी जुल्म और यहूदियों के दर्द को पूरी दुनिया के सामने लाकर खड़ा कर दिया।

12 जून 1929 को जर्मनी के एक यहूदी परिवार में जन्मी एनी फ्रैंक का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिटलर के अत्याचारों से बचने के लिए फ्रैंक परिवार नीदरलैंड के एम्स्टर्डम चला आया। लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब नीदरलैंड पर भी नाज़ी सेना का कब्जा हो गया, तो फ्रैंक परिवार के लिए खतरे की घंटी बज गई।
अपनी जान बचाने के लिए परिवार ने एम्स्टर्डम के प्रेंसिनग्राक्ट स्थित मकान नंबर 263 के एक गुप्त हिस्से को अपना ठिकाना बनाया। यहीं पर एनी फ्रैंक ने अपने 13वें जन्मदिन पर उपहार में मिली एक डायरी में अपने जीवन, डर, उम्मीदों और उस गुप्त ठिकाने की हर छोटी-बड़ी घटना को दर्ज करना शुरू किया।
एनी फ्रैंक ने अपनी डायरी में आखिरी बार 1 अगस्त 1944 को लिखा था। इसके ठीक तीन दिन बाद, 04 अगस्त 1944 को नाज़ी सैनिकों को एक गुप्त मुखबिरी के जरिए इस मकान की जानकारी मिली। जर्मन सैनिकों ने तुरंत दबिश देकर पिछले 2 साल से छिपे बैठे एनी फ्रैंक और उनके परिवार सहित कुल 8 यहूदियों को गिरफ्तार कर लिया।
सभी को अमानवीय यातना शिविरों में भेज दिया गया, जहां टाइफस बीमारी और कठोर यातनाओं के कारण 1945 में महज 15 वर्ष की आयु में एनी फ्रैंक का निधन हो गया।
एनी फ्रैंक की मृत्यु के बाद, उनके पिता ऑटो फ्रैंक (जो इस त्रासदी में जीवित बचे इकलौते सदस्य थे) को वह डायरी मिली। उन्होंने एनी के सपने को पूरा करते हुए इसे प्रकाशित कराया। सबसे पहले 1947 में यह डायरी डच भाषा में छपी, जिसकी शुरुआती महीनों में ही हजारों प्रतियां बिक गईं।
वर्ष 1952 में इसका अंग्रेजी अनुवाद ‘द डायरी ऑफ अ यंग गर्ल’ नाम से प्रकाशित हुआ। आज यह किताब दुनिया की 70 से अधिक भाषाओं में मार्केट में है और इसकी करोड़ों प्रतियां बिक चुकी हैं। यह डायरी नाज़ी काल की क्रूरता का एक ऐतिहासिक और जीवंत दस्तावेज मानी जाती है।
1922: जब ग्राहम बेल की अंतिम विदाई में एक मिनट के लिए थम गए थे अमेरिका-कनाडा के सारे टेलीफोन
यह कहानी संचार क्रांति के उस महान जनक की है, जिसने इंसानी आवाज को तारों के जरिए एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाकर पूरी दुनिया की दूरी को मिटा दिया।

वर्ष 1876 में अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने अपने वैज्ञानिक परीक्षणों के दौरान एक ऐसा उपकरण तैयार किया जो आवाज की तरंगों को विद्युत तरंगों में बदलकर प्रसारित कर सकता था।
10 मार्च 1876 को ग्राहम बेल ने अपने असिस्टेंट थॉमस वॉटसन को फोन लगाकर पहला ऐतिहासिक वाक्य कहा: “मिस्टर वॉटसन! इधर आइए, मुझे आपकी जरूरत है।”
ये शब्द मानव इतिहास की पहली टेलीफोन कॉल के रूप में हमेशा के लिए अमर हो गए और इसने आधुनिक सूचना एवं संचार क्रांति की नींव रखी।
टेलीफोन के पेटेंट के बाद यह तकनीक रातों-रात लोकप्रिय हो गई। बेल ने इसके व्यावसायिक उत्पादन के लिए ‘बेल टेलीफोन कंपनी’ की स्थापना की। हालांकि, व्यावसायिक मामलों में रुचि न होने के कारण उन्होंने कंपनी बनने के महज दो साल बाद ही बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन नए आविष्कारों, गूंगे-बहरे लोगों की शिक्षा और सामाजिक कार्यों में समर्पित कर दिया।
टेलीफोन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगस्त 1922 तक अकेले अमेरिका में ही करीब 1.4 करोड़ टेलीफोन कनेक्शन चालू हो चुके थे।
2 अगस्त 1922 को 75 वर्ष की आयु में इस महान वैज्ञानिक का निधन हो गया। 04 अगस्त 1922 को जब उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही थी, तब उनके सम्मान में एक अभूतपूर्व श्रद्धांजलि दी गई। अमेरिका और कनाडा के लगभग 1.4 करोड़ से अधिक सभी टेलीफोन कनेक्शनों को एक मिनट के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया गया। एक मिनट के लिए टेलीफोन नेटवर्क का यह मौन उस वैज्ञानिक को दुनिया का सबसे अनोखा और ऐतिहासिक नमन था।
देश-विदेश में 04 अगस्त को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1181: चीनी और जापानी खगोलविदों द्वारा केस्सिओपिया में एक सुपरनोवा देखा गया और लगभग छह महीने तक दिखाई देता रहा। माना जाता है यह एक सफ़ेद बौने तारे पर थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुआ था।
1666: नीदरलैंड और इंग्लैंड के बीच समुद्री लड़ाई हुई। यह भयंकर नौसैनिक संघर्ष दोनों देशों के बीच व्यापार और औपनिवेशिक वर्चस्व को लेकर था।
1870: ब्रिटिश रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना हुई। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध के समय घायल सैनिकों की मदद करना और चिकित्सा सहायता प्रदान करना था।
1886: कोलंबिया ने संविधान अंगीकार किया।
1914: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1935: भारत शासन अधिनियम को ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किए जाने के बाद शाही स्वीकृति मिली। इससे प्रांतों में द्वैध शासन खत्म उन्हें स्वायत्तता दी गई। केंद्र में द्वैध शासन शुरू हुआ। एक संघीय न्यायालय बना। बर्मा (म्यंमार) भारत से अलग हुआ।
1954: पाकिस्तानी सरकार ने हफीज़ जालंधरी द्वारा लिखे गए गीत ‘पाक सरज़मीन’ (क़ौमी तराना) को राष्ट्रगान के रूप में अपनाने की आधिकारिक सहमति दी। इसे पहली बार 13 अगस्त 1954 को रेडियो पाकिस्तान पर प्रसारित किया गया था।
1967: तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर नागार्जुन सागर बांध का निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे लंबे चिनाई वाले बांधों में है, जो कृष्णा नदी पर बना है।
2004: नासा ने अपने सुपर कंप्यूटर ‘एल्टिक्स’ का नाम भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री ‘कल्पना चावला’ नाम दिया।
2007: अमेरिका ने स्पेस प्रोब फीनिक्स को लॉन्च किया। इसी मिशन ने मंगल की सतह के नीचे पानी और बर्फ होने का पता लगाया था।
2008: सरकार ने भारतीय जहाजरानी निगम (एससीआई) को नवरत्न का दर्जा प्रदान किया।
2018: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर एक लाइव टीवी इवेंट के दौरान ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि मादुरो इस हमले में बच निकले।
2020: लेबनान की राजधानी बेरूत के बंदरगाह पर हुआ आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा गैर-परमाणु विनाशकारी विस्फोट हुआ। इस त्रासदी में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई, 7,000 से अधिक घायल हुए और लगभग 3 लाख लोग बेघर हो गए।
2025: गुजरात के कांडला स्थित में दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत 1 मेगावॉट क्षमता वाले भारत के पहले स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का परिचालन शुरू किया गया।
04 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1522: राणा उदयसिंह – मेवाड़ के शासक, महान योद्धा महाराणा प्रताप के पिता और खूबसूरत शहर उदयपुर के संस्थापक।
1845: फ़िरोजशाह मेहता – स्वतंत्रता सेनानी, बॉम्बे नगर निगम के जनक और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्य।
1730: सदाशिवराव भाऊ – मराठा साम्राज्य के महान सेनापति, जिन्होंने पानीपत के तीसरे युद्ध में मराठा सेना का नेतृत्व किया था।
1906: यशवंत सिंह परमार – स्वतंत्रता सेनानी एवं हिमाचल प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री।
1929: किशोर कुमार– भारतीय सिनेमा के सबसे बहुमुखी गायक, अभिनेता, संगीतकार और निर्देशक।
1950: नटेसन कृष्णासामी रंगासामी (एन. रंगास्वामी) पुडुचेरी के मुख्यमंत्री।
1961: बराक ओबामा– अमेरिका के प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति रहे हैं।
1965: विशाल भारद्वाज– राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक, संगीतकार और पटकथा लेखक।
04 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1937: काशी प्रसाद जायसवाल – भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार एवं पुरातत्त्व के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान।
1981: परशुराम मिश्रा – पद्म श्री से सम्मानित भारत के प्रसिद्ध वनस्पतिशास्त्री और शिक्षाविद थे। । 2006: नंदिनी सत्पथी – उड़ीसा की महिला मुख्यमंत्री तथा लेखिका।
2020: इब्राहिम अल्काज़ी – भारतीय रंगमंच के प्रसिद्ध निदेशक और नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के पूर्व निदेशक थे।
2025: शिबु सोरेन – भारतीय राजनीतिज्ञ थे। वह झारखण्ड के तीसरे मुख्यमंत्री रहे थे।
04 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)

नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 01 से 07 अगस्त तक दुनिया भर में यह विशेष सप्ताह मनाया जाता है। इसकी शुरुआत डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के समर्थन से की गई थी।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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