4 जून: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 4 जून वर्ष का 155वां (लीप वर्ष में यह 156वां) दिन है। साल में अभी 210 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 4 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 4 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
4 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 4 June in History)
चीन ने लोकतंत्र समर्थक 10 हजार प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून डाला, टैंक लेकर पहुंची सेना ने निहत्थे लोगों का किया संहार
1989 में आज ही के दिन बीजिंग के थियानमेन चौक पर चीन ने अपने ही नागरिकों के खिलाफ सेना को उतार दिया था। ये प्रदर्शनकारी चीन में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे थे। सेना ने इन प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस घटनाक्रम में कम से कम 10 हजार लोग मारे गए। चीन ने कभी भी मरने वालों की सही संख्या को सार्वजनिक नहीं किया।
इस आंदोलन की शुरुआत छात्र आंदोलन के तौर पर हुई थी। दरअसल 80 के दशक में चीन बड़े-बड़े बदलावों से गुजर रहा था। चीन के कम्युनिस्ट नेता देंग शियाओपिंग ने अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसकी बदौलत देश में विदेशी निवेश बढ़ा और प्राइवेट कंपनियां आने लगीं। नतीजा ये हुआ कि चीन की अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ी और समाज में आर्थिक संपन्नता आने लगी, लेकिन विकास की बढ़ती रफ्तार के साथ भ्रष्टाचार, महंगाई और रोजगार में कमी जैसी समस्याएं भी सामने आईं। इसी दौरान चीन के लोग जब दूसरे लोकतांत्रिक देशों के संपर्क में आए तो उनमें भी लोकतंत्र के प्रति दिलचस्पी बढ़ने लगी।
इन सबका नतीजा ये हुआ कि चीनी नागरिकों के बीच एक आंदोलन जन्म लेने लगा। चीनी नेता देंग शियाओपिंग ने इस सबके के लिए कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव हू याओबांग को जिम्मेदार माना। हू याओबांग चीन में राजनीतिक सुधारों की पैरवी करते आए थे। अप्रैल में उनकी अचानक मौत हो गई, जिससे माहौल और गर्म हो गया। हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने बीजिंग के थियानमेन चौक पर इकट्ठा हुए। धीरे-धीरे प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा बढ़ता गया और इसी चौक पर ‘प्रजातंत्र की मूर्ति’ को स्थापित किया गया। हालात काबू से बाहर होते देख सरकार ने चीन में मार्शल लॉ लागू कर दिया। कई लोगों को जेलों में डाल दिया गया।
4 जून, 1989 के दिन थियानमेन चौक पर हजारों छात्र और लोग शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तभी हथियारों से लदे चीनी सैनिक अपने साथ टैंक लेकर आने लगे। सेना ने पूरे चौक को घेर लिया और गोली बरसानी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों को अनुमान नहीं था कि उनके ही देश की सेना उन पर इस तरह से गोलियां बरसाएगी।
सेना के इस नरसंहार में कितने लोग मारे गए, इसका सटीक आंकड़ा किसी के पास नहीं है। चीन सरकार ने 200 लोगों के मरने की पुष्टि की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम 10 हजार लोग इस नरसंहार में मारे गए। 5 जून की सुबह तक थियानमेन चौक पर प्रदर्शनकारियों की जगह सेना के टैंकों ने कब्जा कर लिया। चीन सरकार ने क्रूरता से इस नागरिक आंदोलन को दबा दिया था।
1783: हॉट एयर बैलून की पहली उड़ान
17वीं शताब्दी की शुरुआत में ही गुब्बारे में गर्म हवा भरकर उसे एक-जगह से दूसरी जगह उड़ाकर ले जाने की कोशिशें की जाने लगी थीं। इन तमाम कोशिशों को आज ही के दिन एक बड़ी सफलता मिली थी। दो भाईयों – जोसेफ माइकल और जैक एटीने मोंटगोल्फायर ने 1738 में आज ही के दिन गर्म हवा से गुब्बारे को उड़ाया था। उन्होंने एक बड़े पेपर बैग को गुब्बारे का आकार देकर उसके नीचे ऊन और लकड़ी की कतरन जलाकर गर्म हवा छोड़ी। इसके बाद गुब्बारा आकाश में करीब 1 हजार फीट की ऊंचाई पर 10 मिनट तक उड़ता रहा। 10 मिनट बाद जहां से गुब्बारा हवा में उड़ाया गया था, उस जगह से करीब आधा किलोमीटर दूर जाकर नीचे आया। इसके बाद दोनों भाईयों ने यूरोप की अलग-अलग जगहों पर इस गुब्बारे को लोगों के सामने उड़ाया।
उन्होंने गुब्बारे के नीचे एक डलिया बांधकर एक मुर्गा, बतख और भेड़ को एक साथ उड़ाने में भी सफलता पाई। ये गुब्बारा करीब 8 मिनट तक हवा में रहा। इसी साल 21 नवंबर के दिन 2 लोगों को बैठाकर इसी गुब्बारे को हवा में उड़ाया गया। ये हॉट एयर बैलून में इंसानों की पहली उड़ान थी।
1917: पहला पुलित्जर पुरस्कार दिया गया
अमेरिका के एक प्रतिष्ठित पत्रकार थे – जोसेफ पुलित्जर। उन्होंने सेंट लुइस पोस्ट डिस्पैच और न्यूयॉर्क वर्ल्ड अखबार की शुरुआत की थी। ये दोनों अखबार बेहतरीन पत्रकारिता का उदाहरण माने जाते थे। अपनी मौत से पहले उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी को करीब साढ़े छह करोड़ रुपए की राशि दान कर दी थी। इसी पैसे से बाद में उनके नाम पर साल 1917 से पुलित्जर पुरस्कार शुरू किया गया। यह अमेरिका का पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह पुरस्कार पत्रकारों, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों को दिया जाता है। इसकी कुल 21 कैटेगरी है और पुरस्कार देने का पूरा जिम्मा कोलंबिया यूनिवर्सिटी संभालती है।
4 जून, 1917 में पहला पुलित्जर अवॉर्ड दिया गया था। जुलिया वार्ड होवे की बायोग्राफी के लिए उनकी दो बेटियों रिचर्ड्स और मोड होवे इलियट को पुलित्जर पुरस्कार मिला था। जुलिया वार्ड होवे एक जानी-मानी महिला अधिकार कार्यकर्ता, कवयित्री और लेखिका थीं।
2001: ज्ञानेंद्र बने नेपाल के राजा
1 जून 2001 को नेपाल के क्राउन प्रिंस दीपेंद्र ने नशे में राजपरिवार के 9 लोगों की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में उनके पिता राजा बीरेंद्र, माता रानी ऐश्वर्या और राजपरिवार के 7 और लोग मारे गए थे। कहा जाता है कि प्रिंस दीपेंद्र अपनी पसंद से शादी करना चाहते थे, लेकिन राजपरिवार इसके लिए राजी नहीं था, यही इस हत्याकांड की वजह बना। राजपरिवार पर गोली बरसाने के बाद दीपेंद्र ने खुद पर भी गोली चलाई थी, जिस वजह से आज ही के दिन उनकी मौत हो गई। दीपेंद्र की मौत के बाद उनके चाचा ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह को नेपाल का राजा बनाया गया।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 4 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1039: हेनरी तृतीय रोम का सम्राट बने।
1845: मैक्सिकन-अमेरिका युद्ध शुरू हुआ।
1858: झांसी के युद्ध में शहादत: भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम (1857) के दौरान, रानी लक्ष्मीबाई की तोपची और करीबी सहयोगी मोती बाई और घुड़सेना के कमांडर खुदा बख्श झांसी के किले की रक्षा करते हुए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए आज ही के दिन शहीद हुए थे।
1784: ल्योन, फ्रांस में एलिजाबेथ थिबल, गर्म हवा के गुब्बारे में सवारी करने वाली महिला बनी।
1805: लंदन के हार्स गार्ड्स परेड में रंगमंच का पहला कार्यक्रम आयोजित किया किया।
1896: हेनरी फोर्ड की पहली कार: ऑटोमोबाइल कंपनी फोर्ड के मालिक प्रसिद्ध उद्योगपति हेनरी फोर्ड ने अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में अपनी बनाई पहली चार पहियों वाली गाड़ी का सफल परीक्षण किया था।
1919: अमेरिकी संविधान के 19वें संशोधन को सीनेट ने मंजूरी दी। इस संशोधन के द्वारा ही अमेरिका में महिलाओं को मताधिकार मिला।
1940: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की सेना ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रवेश किया।
1944: अमेरिकन आर्मी ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान रोम में प्रवेश किया।
1959: स्वतंत्र पार्टी की घोषणा: भारत के अंतिम गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने जवाहरलाल नेहरू की समाजवादी नीतियों के विरोध में ‘स्वतंत्र पार्टी’ बनाने की घोषणा की थी।
1970: ब्रिटेन से अलग होकर टोंगा एक स्वतंत्र देश बना।
1972: बांग्लादेश में 2 ट्रेनों की टक्कर में 76 लोगों की मौत हो गई।
1997: दूरसंचार उपग्रह 2डी कक्ष में पहुंचा।
1973: ATM के लिए डोन वेत्जल, टॉम बार्न्स और जॉर्ज चैस्टन को पेटेंट मिला।
2001: नेपाल में ज्ञानेंद्र वीर बिक्रम शाह ने अपने भाई और बेटे की मौत के बाद सत्ता संभाली।
2003: डोमीनिक गणराज्य की 18 वर्षीय सुन्दरी एमीलिया वेगा ‘मिस यूनीवर्स’ बनीं।
2005: लालकृष्ण आडवाणी का जिन्ना पर बयान: बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान कराची में मोहम्मद अली जिन्ना को एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) व्यक्ति बताया था, जिस पर भारत में काफी राजनीतिक विवाद हुआ था।
2006: यूगोस्लाविया के पूर्व गणराज्य मोंटेनेग्रो ने स्वतंत्रता की घोषणा की।
2010: एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने फ्लोरिडा से रॉकेट फाल्कन-9 को लॉन्च किया।
2011: मध्य इराक की एक मस्जिद और एक अस्पताल में बमों से किए गए हमले में 24 लोगों की मौत हो गई।
2015: घाना में एक पेट्रोल पंप पर लगी आग में 200 से अधिक लोगों की मौत।
2025: चिन्नास्वामी स्टेडियम (बेंगलुरु) में दुखद भगदड़: आईपीएल (IPL) में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की जीत के बाद बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर आयोजित विक्ट्री परेड के दौरान अचानक भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 1 महिला और 2 पुरुषों समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
4 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 4 June)
1936: बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस नूतन का जन्म
भारतीय सिनेमा जगत में नूतन को एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर याद किया जाता है जिन्होंने फ़िल्मों में अभिनेत्रियों के महज शोपीस के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की परंपरागत विचार धारा को बदलकर उन्हें अलग पहचान दिलाई। सुजाता, बंदिनी, मैं तुलसी तेरे आंगन की, सीमा, सरस्वती चंद्र, और मिलन जैसी कई फ़िल्मों में अपने उत्कृष्ट अभिनय से नूतन ने यह साबित किया कि नायिकाओं में भी अभिनय क्षमता है और अपने अभिनय की बदौलत वे दर्शकों को सिनेमा हॉल तक लाने में सक्षम हैं। नूतन की प्रतिभा केवल अभिनय तक ही नहीं सीमित थी वह गीत और ग़ज़ल लिखने में भी काफ़ी दिलचस्पी लिया करती थीं। हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सर्वाधिक फ़िल्म फेयर पुरस्कार प्राप्त करने का कीर्तिमान नूतन के नाम दर्ज है। नूतन को अपने सिने कैरियर में पांच बार (सुजाता, बंदिनी, मैं तुलसी तेरे आंगन की, सीमा, मिलन) फ़िल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नूतन को वर्ष 1974 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। लगभग चार दशक तक अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों के बीच ख़ास पहचान बनाने वाली यह महान् अभिनेत्री 21 फ़रवरी, 1991 को इस दुनिया से अलविदा कह गई।
1946: भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायक एसपी बालासुब्रमण्यम का जन्म
एस. पी. बालासुब्रमण्यम भारत के जाने माने पार्श्वगायक होने के साथ-साथ वह एक अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक और फ़िल्म निर्माता भी थे। पिछले 5 दशक में करीब 16 भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गाने वे गा चुके थे। उन्होंने छह बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए ‘राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार’ और आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा 25 बार तेलुगू सिनेमा में ‘नन्दी पुरस्कार’ जीता। वह अच्छे वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी थे। उन्होंने कमल हासन, रजनीकांत, सलमान ख़ान, शाहरुख ख़ान, अनिल कपूर, गिरीश कर्नाड और अर्जुन सरजा जैसे अभिनेताओं के लिए वॉइस ओवर किया। इतना ही नहीं फिल्म ‘दशावतारम्’ के तेलुगु वर्जन के लिए उन्होंने कमल हासन के सात किरदारों की आवाज़ का वॉइस ओवर भी किया। इसमें बूढ़ी औरत वाले किरदार की आवाज़ भी शामिल है। एस. पी. बालासुब्रमण्यम को भारत सरकार ने 2001 में पद्मश्री और 2011 में पद्म भूषण से नवाजा था। कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाने के कारण एस. पी. बालासुब्रमण्यम की मृत्यु 25 सितंबर, 2020 को चेन्नई में हुई।
1975: एंजेलिना जोली – अमेरिकी अभिनेत्री। इन्हें हॉलीवुड के एक्शन एक्ट्रेस के तौर पर भी जाना जाता है।
4 जून को हुए निधन (Died on 4 June)
2016: सुलभा देशपांडे – भारतीय अभिनेत्री।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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