6 जून: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 6 जून वर्ष का 157वां (लीप वर्ष में यह 158वां) दिन है। साल में अभी 208 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 6 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 6 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
6 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 6 June in History)
42 साल पहले बिहार में बागमती नदी में समा गई थी चलती ट्रेन, सैकड़ों लोगों की आज तक लाश भी नहीं मिली
6 जून 1981 को बिहार के मानसी स्टेशन से एक ट्रेन सहरसा जा रही थी। ट्रेन में 1 हजार से ज्यादा लोग सवार थे। रास्ते में बारिश होने लगी तो यात्रियों ने खिड़की-दरवाजे बंद कर लिए और ट्रेन के अंदर ही सफर खत्म होने का इंतजार करने लगे। ट्रेन बागमती नदी के पुल से गुजर रही थी तभी अचानक से एक झटका लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता ट्रेन के 7 डिब्बे पुल से नदी में जा गिरे।
बरसात की वजह से लबालब भरी बागमती ने सातों डिब्बों को अपने अंदर समा लिया। मरने वालों की सही संख्या आज तक पता नहीं है। कुछ लोग दबकर मर गए तो कुछ लोग डूबकर। जिन्हें तैरना आता था वे ट्रेन से बाहर ही नहीं आ पाए और जो बाहर आ पाए वो नदी के बहाव में बह गए। यानी मौत से बचने का कोई रास्ता ही नहीं था।
ट्रेन नदी में क्यों गिरी इसके पीछे 2 वजहें बताई जाती हैं। पहली ये कि ट्रेन के सामने गाय या भैंस आ गई थी, जिसे बचाने के लिए ड्राइवर ने ब्रेक लगाए। स्पीड में एकदम लगाए गए ब्रेक की वजह से डिब्बों का संतुलन बिगड़ा और डिब्बे नदी में गिर गए। दूसरी वजह ये कि ट्रेन के खिड़की-दरवाजे सब बंद थे, इसलिए तेज आंधी- तूफान का पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और ट्रेन नदी में गिर गई।
हादसे में कितने लोग मरे इसका भी कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। रेलवे ने बताया कि 500 लोगों की मौत हुई है। बाद में मरने वालों की संख्या 1 से 3 हजार बताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ये ट्रेन पैसेंजर थी, इसलिए ट्रेन में यात्री भी ज्यादा सवार थे। यानी मरने वालों का आंकड़ा भी ज्यादा ही होगा।
हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। गोताखोरों की मदद से 286 लाशें ही नदी में से बाहर आ पाईं। सैकड़ों लोगों की लाश का आज तक कोई पता नहीं चला।
1850: आज ही बनी थी पहली डेनिम जींस
टी-शर्ट, शर्ट, कुर्ता और लगभग सभी तरह के कपड़ों के साथ पहने जाने वाली जींस का इतिहास भी आज ही के दिन से जुड़ा है। 1850 में लीवाई स्ट्रॉस ने आज ही के दिन पहली जींस बनाई थी। स्ट्रॉस 1847 में जर्मनी से न्यूयॉर्क आए थे। न्यूयॉर्क में स्ट्रॉस के बड़े भाइयों का कपड़े का कारोबार था। स्ट्रॉस उन्हीं के कारोबार में हाथ बंटाने लगे।
1853 में स्ट्रॉस गोल्ड माइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए सैन फ्रांसिस्को चले गए। वहां जाकर स्ट्रॉस कपड़े बेचने का कारोबार करने लगे और अपनी दुकान को नाम दिया – लीवाई स्ट्रॉस एंड कंपनी।
इसी बीच उनके पास जैकब डेविस नाम का एक टेलर आया जिसने स्ट्रॉस से मजबूत डेनिम कपड़ा खरीदा। दरअसल इस टेलर के पास सोने की खदान में काम करने वाला एक युवक कपड़े सिलवाने आया था। उसने टेलर से ऐसी पैंट सिलने को कहा जो खदान में काम करने में भी न फटे और जिसमें सामान रखने के लिए ज्यादा जेबें हों। जैकब ने स्ट्रॉस से कपड़ा खरीदा और पैंट सिलनी शुरू की। पैंट में आसानी से फटने वाली जगह जैसे जेबों में मजबूती के लिए तांबे की कील लगाई गई।
जैकब का ये आइडिया चल निकला। पैंट की मजबूती की वजह से खदानों में काम करने वाले लोग इसे पसंद करने लगे। अब स्ट्रॉस और जैकब दोनों पार्टनर बन गए। दोनों ने मिलकर पैंट बनाने की फैक्ट्री खोली। इस तरह जींस का जन्म हुआ।
2017: मंदसौर गोलीकांड को 4 साल
6 जून 2017… मध्य प्रदेश के किसान इस दिन को काले दिन के तौर पर याद करते हैं। अफीम की खेती के लिए मशहूर मंदसौर में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई। पूरे देश में ये घटना मंदसौर गोलीकांड के नाम से जानी जाती है।
उस समय पूरे मध्यप्रदेश में किसान जगह-जगह अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर थे। किसानों के एजेंडे में कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर खरीदी जैसी 20 सूत्री मांगें शामिल थीं। सड़कों पर दूध बहाया जा रहा था, फल-सब्जियां फेंकी जा रही थीं। इसी दौरान मंदसौर के पिपलिया मंडी चौपाटी पर किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए। पुलिस ने फायरिंग की जिसमें 5 किसानों की मौके पर ही मौत हो गई। एक किसान ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
माना जाता है कि किसानों पर हुई इस कार्रवाई से पूरे राज्य के किसान शिवराज सरकार के खिलाफ हो गए थे, जिसका नतीजा ये हुआ कि अगले ही साल विधानसभा चुनावों में भाजपा हार गई।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 6 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1674: छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक- यह भारतीय इतिहास के सबसे गौरवशाली दिनों में से एक है। इसी दिन रायगढ़ के किले में महान मराठा योद्धा शिवाजी महाराज का औपचारिक राज्याभिषेक हुआ था और उन्होंने ‘छत्रपति’ की उपाधि धारण की थी। वाराणसी के प्रकांड पंडित गागा भट्ट ने इस ऐतिहासिक अनुष्ठान को संपन्न कराया था, जिससे ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की नींव मजबूत हुई।
1752: मोस्को में भयंकर आग लगने के कारण करीब 18,000 लोग जलकर राख हो गए थे।
1761: शुक्र का पारगमन हुआ जिसे पृथ्वी के 120 स्थानों से देखा जाता है।
1808: फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने भाई जोसेफ बोनापार्ट को स्पेन का राजा घोषित किया था।
1882: न्यूयॉर्क के हेनली सिली ने इलेक्ट्रिक प्रेस के लिए पेटेंट हासिल किया।
1916: महिलाओं को मिला वोटिंग का अधिकार- अमेरिका के ईस्ट क्लीवलैंड में महिलाओं को पहली बार मतदान (वोट) करने का कानूनी अधिकार दिया गया, जो महिला अधिकारों की दिशा में एक बड़ा कदम था।
1918: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेलेयू वुड के युद्ध में अमेरिका को पहली जीत मिली।
1944: डी-डे नॉर्मैंडी पर आक्रमण- द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों (Allied Forces) की सेनाओं ने नाजी जर्मनी के कब्जे वाले फ्रांस के नॉर्मैंडी तट पर हमला किया था। इसे ‘ऑपरेशन ओवरलॉर्ड’ या ‘D-Day’ कहा जाता है। यह इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री, जमीनी और हवाई सैन्य हमला था, जिसने एडॉल्फ हिटलर की हार का रास्ता साफ किया।
1966: अमरीका के मिसिसिपी विश्वविद्यालय में रंगभेद के ख़िलाफ आवाज़ उठाने वाले पहले अश्वेत मानवाधिकार कार्यकर्ता, जेम्स मेरिडिथ पर एक व्यक्ति ने गोलियां चलाईं।
1967: इजरायली सेना का गाजा पर कब्जा- ‘छह दिवसीय युद्ध’ (Six-Day War) के दौरान इजरायली सेना ने गाजा पट्टी (Gaza Strip) पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
1981: देश का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा- बिहार के मानसी से सहरसा जा रही एक यात्री ट्रेन के 9 में से 7 डिब्बे पटरी से उतरकर बागमती नदी में जा गिरे। इस भीषण दुर्घटना में करीब 800 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसे भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक रेल हादसा माना जाता है।
1984: ऑपरेशन ब्लू स्टार का समापन- अमृतसर के स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) परिसर को जरनैल सिंह भिंडरावाले और खालिस्तान समर्थक चरमपंथियों से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ आज ही के दिन समाप्त हुआ था। इस दौरान अकाल तख्त को भारी नुकसान पहुंचा और भारी खून-खराबा हुआ।
1984: पहली बार टेट्रिस गेम को रिलीज किया गया
1994: वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज ब्रायन लारा ने एजबेस्टन में वारविकशायर के खिलाफ मैच में प्रथम श्रेणी इतिहास की सर्वाधिक 501 रन की पारी खेली।
1995: पाकिस्तान में बाल अपराधियों को कोड़े मारने अथवा उनकी फ़ांसी की सज़ा प्रतिबंधित की गई।
1997: ‘बिम्सटेक’ की स्थापना- बैंकॉक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाईलैंड ने मिलकर एक आर्थिक सहयोग समूह का गठन किया था, जिसे शुरुआत में ‘बिस्टेक’ (BIST-EC) कहा गया। बाद में अन्य देशों के जुड़ने से यह BIMSTEC बना, जो दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक मजबूत कड़ी है।
1999: भारतीय टेनिस की पहली जोड़ी लिएंडर पेस तथा महेश भूपति ने टेनिस का ग्रैंड स्लैम जीता।
2004: तमिल को “शास्त्रीय भाषा” का दर्जा- भारत सरकार ने तमिल भाषा को देश की पहली ‘शास्त्रीय भाषा’ (Classical Language) के रूप में मान्यता देने की घोषणा की थी।
2024: उत्तराखंड हिमालय में बर्फबारी का हादसा- उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में आए अचानक आए भयानक बर्फीले तूफान (Blizzard) के कारण ट्रैकिंग पर गए 9 भारतीय ट्रैकर्स की मौत हो गई थी, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया।
2024: गाजा में संयुक्त राष्ट्र के स्कूल पर हवाई हमला- इजरायल-हमास संघर्ष के बीच, मध्य गाजा में शरणार्थियों को आश्रय दे रहे एक संयुक्त राष्ट्र के स्कूल पर भीषण हवाई हमला हुआ, जिसमें कई बच्चों सहित कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों और युद्धविराम की चर्चा को दोबारा गरमा दिया।
6 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 6 June)
1596: गुरु हरगोबिंद सिंह जी– सिखों के छठे गुरु, जिन्होंने सिख समुदाय को सैन्य रूप से संगठित किया।
1699: आलमगीर द्वितीय – 16वां मुग़ल बादशाह था, जिसने 1754 से 1759 ई. तक राज्य किया।
1881: गिरिधर शर्मा नवरत्न – हिंदी भाषा के साहित्यकार थे।
1890: गोपीनाथ बारदोलोई – असम के आधुनिक निर्माता और स्वतंत्रता सेनानी।
1884: शौक़ बहराइची – प्रसिद्ध शायर। जिनका लिखा शेयर ‘बर्बाद गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है, हर शाख पे उल्लू बैठें हैं अंजाम ऐ गुलिस्तां क्या होगा।’ नेताओं व ग़लत कार्यों में लिप्त व्यक्तियों पर कटाक्ष करने के लिए आज हर मंच पर बोला जाता है।
1919: राजेन्द्र कृष्ण – हिन्दी सिनेमा के एक प्रसिद्ध गीतकार। उन्होंने शिमला में नगरपालिका के कार्यालय में 1942 तक क्लर्क के रूप में काम किया था।
1929: सुनील दत्त – अभिनेता, राजनेता और समाजसेवक, जन्म पश्चिमी पंजाब के झेलम (वर्तमान पाकिस्तान) हुआ था।
1936: डी. रामानायडू – प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता। सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित हुए।
1939 : गुरबचन सिंह रंधावा – भारत के प्रसिद्ध एथलीट। उन्होंने अपने बेहतर प्रदर्शन से कई रिकॉर्डों को तोड़ा था। इन्हें 1961 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।
1968: अरविंद केजरीवाल – दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री हैं।
6 जून को हुए निधन (Died on 6 June)
1982: डी. देवराज अर्स – कर्नाटक के 8वें मुख्यमंत्री थे। वे 1978 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री चुने गए और 8 वर्षों तक इस पद पर रहे।
2020: बासु चटर्जी – हिंदी और बंगाली सिनेमा के जाने-माने पटकथा लेखक और निर्देशक थे।
6 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 6 June)
घल्लूघारा दिवस (पंजाब): क्यों मनाया जाता है घल्लूघारा दिवस? 6 जून को ऐसा क्या हुआ था पंजाब में?
6 जून 2022 को सिख संगठन घल्लूघारा दिवस मनाता है। घल्लूघारा दिवस ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी है। बात तब की है जब 1984 में खालिस्तानी आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में घुसे गए थे और पंजाब में गृह युद्ध जैसे हालात बन चुके थे और 5 जून 1984 को पंजाब के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना दाखिल हुई थी। जिसके बाद स्वर्ण मंदिर जंग का मैदान बन गया था, जिससे सिख समाज बहुत दुखी हुआ था।
घल्लूघारा का मतलब: घल्लूघारा एक पंजाबी शब्द है जिसका मतलब है बड़े पैमाने पर नरसंहार (Massacre) और इसका प्रयोग विशेष रूप से सिखों के साथ क्या हुआ, इसके संबंध में किया जाता है।
छोटा और वड्डा घल्लूघारा: छोटा घल्लूघारा मुगल साम्राज्य द्वारा 1746 में तत्कालीन पंजाब राज्य में रहने वाली सिख आबादी के एक महत्वपूर्ण अनुपात का नरसंहार था। मूगल सेना ने इन हमलों में अनुमानित 7000 सिखों को मार डाला था। वड्डा घल्लूघारा पंजाब क्षेत्र में अफगान सेना द्वारा निहत्थे सिखों की सहमति सामूहिक हत्या है और एक अनुमान के अनुसार इस दौरान 10,000 से 20,000 सिख मारे गए थे।
साभार: द लोकदूत
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