07 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 219वां दिन (लीप वर्ष में 220वां दिन) है। साल में अभी और 146 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 07 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 07 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1905 में आज ही के दिन शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन, अंग्रेजों के बंगाल विभाजन के फैसले के खिलाफ देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शन
यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस ऐतिहासिक मोड़ की है जिसने देश के जन-जन में राष्ट्रवाद की अलख जगाई। यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं था, बल्कि अंग्रेजों के आर्थिक साम्राज्य की चूलें हिलाने वाला भारत का पहला सबसे बड़ा जन-आंदोलन था।

20 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल के विभाजन की आधिकारिक घोषणा की थी। इस फैसले के पीछे अंग्रेजों की असली मंशा प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि उभरते राष्ट्रवाद को कुचलना और भारतीयों की अटूट हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ना था।
साजिश के तहत अंग्रेजों ने मुस्लिम-बहुल पूर्वी हिस्से को असम के साथ मिलाकर एक अलग प्रांत का रूप दे दिया। दूसरी तरफ, हिंदू-बहुल पश्चिमी हिस्से को बिहार और उड़ीसा के साथ मिलाकर ‘पश्चिम बंगाल’ बना दिया गया। इस विभाजन का मुख्य उद्देश्य दोनों ही प्रांतों में धर्म के आधार पर अलग-अलग बहुसंख्यकों की आबादी खड़ी करना था, ताकि भारतीय आपस में ही उलझते रहें।
लॉर्ड कर्जन के इस विभाजनकारी फैसले से पूरे भारत में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। इसी विरोध के तहत 07 अगस्त 1905 को कलकत्ता (अब कोलकाता) के टाउनहॉल में एक विशाल जनसभा का ऐतिहासिक आयोजन हुआ। इस सभा में लाखों की संख्या में देशभक्त उमड़ पड़े। इसी मंच से अंग्रेजों के खिलाफ ऐतिहासिक ‘बहाष्कार प्रस्ताव’ पास किया गया और इसी के साथ देश में ‘स्वदेशी आंदोलन’ की औपचारिक शुरुआत हुई।
नेताओं ने देशवासियों से पुरजोर अपील की कि वे ब्रिटिश सरकार की सेवाओं, उनके स्कूलों, न्यायालयों और सभी विदेशी सामानों का पूर्ण रूप से बहिष्कार करें। इसके साथ ही पूरी तरह से भारत में बनी स्वदेशी वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। इस तरह यह आंदोलन एक राजनीतिक विरोध के साथ-साथ एक मजबूत आर्थिक हथियार भी बन गया।
देखते ही देखते यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया। सड़कों पर जगह-जगह विदेशी कपड़ों की होली जलाई जाने लगी। लोग ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में नंगे पैर जुलूसों और प्रदर्शनों में भाग लेने लगे। इस बहिष्कार का असर यह हुआ कि भारतीय बाजारों में विदेशी वस्तुओं की बिक्री धड़ाम से गिर गई और स्वदेशी कुटीर उद्योगों व सामानों की मांग तेजी से बढ़ गई।
सांस्कृतिक मोर्चे पर भी यह आंदोलन बेहद अनूठा था। इसी दौर में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों के इस फैसले के विरोध में अपना प्रसिद्ध गीत ‘आमार शोनार बांग्ला’ लिखा, जिसे गाते हुए लोग गर्व से प्रदर्शनों में हिस्सा लेते थे (यही गीत आगे चलकर बांग्लादेश का राष्ट्रगान बना)। अंग्रेजों की बांटने वाली नीति को ठेंगा दिखाते हुए हिंदुओं और मुसलमानों ने अपनी अटूट एकता प्रदर्शित करने के लिए एक-दूसरे की कलाई पर राखियां बांधीं।
इतने व्यापक और अभूतपूर्व देशव्यापी विरोध के बावजूद अहंकारी ब्रिटिश सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। लॉर्ड कर्जन की पूर्व घोषणा के मुताबिक 16 अक्टूबर 1905 को बंगाल का विभाजन आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया। इस क्रूर फैसले से आहत होकर पूरे भारतवासियों ने 16 अक्टूबर के दिन को ‘राष्ट्रीय शोक दिवस’ के रूप में मनाया।
भले ही अंग्रेज बंगाल को दो हिस्सों में बांटने में सफल रहे, लेकिन 7 अगस्त को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की दशा और दिशा हमेशा के लिए बदल दी।
1944: हार्वर्ड एच. आइकेन के एक आइडिया ने रखी थी आधुनिक कंप्यूटर युग की नींव
आज हम अपनी जेब में स्मार्टफोन लेकर घूमते हैं, जो पलक झपकते ही दुनिया भर की गणनाएं कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कंप्यूटर युग की शुरुआत करने वाली पहली विशालकाय मशीन कैसी थी? आज ही के दिन यानी 07 अगस्त 1944 को इतिहास का पहला स्वचालित डिजिटल कंप्यूटर औपचारिक रूप से हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को सौंपा गया था, जिसे ‘हार्वर्ड मार्क वन’ नाम दिया गया।

इस ऐतिहासिक मशीन को बनाने का विचार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से थ्योरिटिकल फिजिक्स में ग्रेजुएशन करने वाले हार्वर्ड एच. आइकेन के दिमाग में आया था। अपनी पढ़ाई के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भौतिक विज्ञान से जुड़ी जटिल और लंबी गणनाओं को हल करने के लिए उनके पास कोई आधुनिक डिवाइस नहीं है। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने खुद एक डिजिटल कैलकुलेटर बनाने की ठानी।
वे अपने इस क्रांतिकारी आइडिया को लेकर उस समय की दिग्गज कंपनी IBM के प्रेसिडेंट थॉमस वॉटसन से मिले। वॉटसन को यह विचार बेहद पसंद आया और उन्होंने इसे तुरंत मंजूरी दे दी। इसके बाद IBM की एक कुशल टीम न्यूयॉर्क के एंडिकोट स्थित प्लांट में इस कैलकुलेटर को हकीकत में बदलने के काम में जुट गई।
जब इस मशीन पर काम चल ही रहा था, तभी दुनिया में दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ गया। युद्ध की वजह से कंपनी को कुछ समय के लिए इस प्रोजेक्ट के काम को रोकना पड़ा। तमाम रुकावटों और लेटलतीफी के बावजूद, आखिरकार फरवरी 1944 में यह विशालकाय कैलकुलेटर बनकर पूरी तरह तैयार हो गया। उस दौर में इस महा-प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कंपनी ने करीब 2 लाख डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च की थी।
7 अगस्त 1944 को जब इसे आधिकारिक तौर पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को सौंपा गया, तो इसकी विशालता और बनावट को देखकर हर कोई हैरान रह गया। यह आज के कंप्यूटरों जैसा बिल्कुल नहीं था। यह मशीन 51 फीट लंबी और 8 फीट ऊंची थी, और इसका कुल वजन 5 टन (लगभग 5000 किलोग्राम) था।
इस भीमकाय कैलकुलेटर को चलाने के लिए 78 छोटी-छोटी मशीनें आपस में जोड़ी गई थीं। इसमें 1 लाख 75 हजार ए़डॉप्टर और करीब 500 मील की लंबाई के बराबर तार (वायर्स) इस्तेमाल किए गए थे। इसमें डेटा एंट्री के लिए 24 स्विच के 60 सेट बनाए गए थे, जो एक बार में 72 संख्याओं को स्टोर करने की क्षमता रखते थे।
यह कैलकुलेटर एक सेकंड में केवल 3 जोड़ या घटाव कर सकता था। किसी संख्या का गुणा करने में इसे 6 सेकंड और भाग करने में 15 सेकंड का समय लगता था।
आज के समय के हिसाब से भले ही यह रफ्तार बेहद धीमी लगे, लेकिन 1944 के दौर में यह विज्ञान की दुनिया का एक चमत्कार था। ‘हार्वर्ड मार्क वन’ ने इंसानी श्रम को कम करके आधुनिक सुपरकंप्यूटरों और डिजिटल क्रांति का रास्ता साफ किया था।
देश-विदेश में 07 अगस्त को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1606: शेक्सपियर के नाटक मैक्बेथ का पहली बार मंचन किंग जेम्स प्रथम के लिए किया गया।
1906: स्वदेशी आंदोलन की पहली वर्षगांठ पर कलकत्ता के पारसी बागान स्क्वायर (ग्रीन पार्क) में पहली बार गैर-आधिकारिक रूप से भारत का राष्ट्रीय ध्वज (हरा, पीला और लाल रंग की पट्टियों वाला) फहराया गया था, जिसे सचिंद्र प्रसाद बोस और सुकुमार मित्रा ने डिजाइन किया था।
1972: युगांडा के नेता इदी अमीन ने एशियाई मूल के लोगों को 90 दिन के भीतर देश छोड़कर चले जाने का आदेश दिया।
1985: भारतीय बिलियर्ड्स प्लेयर गीत सेठी ने विश्व ऐमेटर बिलियर्ड्स चैंपियनशिप में ऑस्ट्रेलिया के बॉब मार्शल को हराकर जीत हासिल की।
1990: अमेरिका ने सऊदी अरब में सेना तैनात कर ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड शुरू किया।
1990: प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने संसद में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने की ऐतिहासिक घोषणा की, जिससे केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण मिला। इस कदम ने देश में सामाजिक न्याय की दिशा तय की, लेकिन इसके साथ ही व्यापक राजनीतिक उथल-पुथल और विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए।
1998: तंजानिया की राजधानी दारेसलाम और केन्या की राजधानी नैरोबी में अमेरिकी दूतावासों पर अल-कायदा द्वारा आत्मघाती ट्रक बम विस्फोट किए गए। इस आतंकी हमले में 220 से अधिक लोग मारे गए और 4,000 से अधिक घायल हुए थे।
2018: स्वीडन के मशहूर फर्नीचर ब्रांड आइकिया ने भारत में अपना पहला स्टोर शुरू किया।
2021: टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय एथलीट नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में 87.58 मीटर का ऐतिहासिक थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता।
07 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1702: मुहम्मदशाह रौशन अख़्तर – मुग़ल वंश का 14वां बादशाह।
1925: एम. एस. स्वामीनाथन – भारत में ‘हरित क्रांति’ के जनक, प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक और पद्म विभूषण से सम्मानित व्यक्तित्व, जिन्होंने देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।
1933: गुरुदयाल सिंह– ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध पंजाबी लेखक और उपन्यासकार (उनके उपन्यास ‘मढ़ी दा दीवा’ पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म भी बनी)।
1955: सुरेश वाडेकर – ख्यातिप्राप्त भारतीय गायक।
07 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1941: रवींद्रनाथ टैगोर– महान कवि, दार्शनिक, चित्रकार और एशिया के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता (1913, साहित्य)। उन्होंने भारत के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश के राष्ट्रगान ‘अमार सोनार बांग्ला’ की रचना की।
2009: गुलशन बावरा – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार।
2018: एम. करुणानिधि– तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता।
07 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विश्व स्तनपान दिवस (सप्ताह)

नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिवर्ष 01 से 07 अगस्त तक दुनिया भर में यह विशेष सप्ताह मनाया जाता है। इसकी शुरुआत डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के समर्थन से की गई थी।
आज नेशनल हैंडलूम डे

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day)
भारत सरकार द्वारा 2015 से प्रतिवर्ष 07 अगस्त को यह दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में हथकरघा बुनकरों को सम्मानित करना और इस उद्योग को बढ़ावा देना है। यह तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन 1905 में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
बाहरी कड़ियां
विकिपीडिया
bharatdiscovery.org
Posted By: Himachal News
Himachal News की ताजा खबरों और वीडियो अपडेट्स के लिए हमारे Himachal News को फॉलो और YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।
| जनवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| फरवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 |
| मार्च | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अप्रैल | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| मई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| जून | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| जुलाई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अगस्त | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| सितंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| अक्टूबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| नवंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| दिसंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |



