21 July in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 202वां दिन (लीप वर्ष में 203वां दिन) है। साल में अभी और 163 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 21 जुलाई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 21 जुलाई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
आज का इतिहास:143 साल पहले हुई थी देश में थिएटर की शुरुआत, कोलकाता के स्टार थिएटर में हुआ था नाटक ‘दक्ष यज्ञ’ का मंचन
आज ही के दिन 1883 में कोलकाता के स्टार थिएटर की शुरुआत हुई थी। इसे भारत का पहला सार्वजनिक थिएटर माना जाता है। 21 जुलाई 1883 को इस थिएटर में ‘दक्ष यज्ञ’ नामक नाटक का मंचन हुआ था। इस नाटक को गिरीश चंद्र घोष ने लिखा था और उन्होंने ही इसमें मुख्य किरदार निभाया था। कोलकाता का स्टार थिएटर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय रंगमंच की धड़कन और क्रांति का गवाह है।
इस थिएटर की नींव के पीछे एक बेहद दिलचस्प और भावुक कहानी छिपी है। इसे गिरीश चंद्र घोष, अमृतलाल बसु और उस दौर की महान अभिनेत्री बिनोदिनी दासी ने मिलकर शुरू किया था। शुरुआत में इसका नाम बिनोदिनी के सम्मान में ‘बिनोदिनी थिएटर’ रखा जाना था। लेकिन अफसोस! उस रूढ़िवादी दौर में महिलाओं का अभिनय करना सभ्य नहीं माना जाता था। समाज के इसी विरोध के चलते, आखिरी वक्त पर इसका नाम बदलकर ‘स्टार थिएटर’ कर दिया गया।
थिएटर के लिए शुरुआती पैसा गुरुमुख रॉय ने दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे महज ₹11,000 में बेच दिया। 1888 में इसे अपनी वर्तमान जगह, बिधान सारणी में शिफ्ट किया गया। यह वही ऐतिहासिक जगह है जहाँ 1898 में स्वामी विवेकानंद ने सिस्टर निवेदिता का परिचय कराने के लिए जनसभा बुलाई थी। उस वक्त दर्शकों में श्री रामकृष्ण परमहंस और रबीन्द्रनाथ टैगोर जैसे युगपुरुष मौजूद थे। जब भारत में सिनेमा का दौर शुरू हुआ, तो हीरालाल सेन की बनाई शुरुआती फिल्में भी इसी स्क्रीन पर चमकीं।
आखिरी पर्दा: साल 1931 में मन्मथ रॉय के देशभक्ति से ओत-प्रोत नाटक ‘कारागार’ के मंचन के साथ ही इसके थिएटर युग का औपचारिक समापन हुआ। उत्तम कुमार, सौमित्र चटर्जी और गीता डे जैसी महान हस्तियों को तराशने वाला यह स्टार थिएटर आज एक सिनेमा हॉल में बदल चुका है। लेकिन आज भी इसकी दीवारों से गुजरे जमाने के तालियों की गूँज और कला की खुशबू आती है! हालांकि कभी-कभी नाटकों का मंचन भी होता है।
1884: लॉर्ड्स के मैदान पर पहला टेस्ट खेला गया
क्रिकेट की दुनिया में लॉर्ड्स के मैदान को ‘मक्का’ माना जाता है, जहां खेलना हर क्रिकेटर का ख्वाब होता है। इस ऐतिहासिक मैदान पर आज ही के दिन 1884 में पहला टेस्ट मैच खेला गया था। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए इस मैच को इंग्लैंड ने लॉर्ड हैरिस की कप्तानी में एक इनिंग और 5 रन से जीता था।
इस ऐतिहासिक मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 229 रनों पर सिमट गई, जिसमें टुप स्कॉट ने 75 और जॉर्ज जिफेन ने 63 रनों का जुझारू योगदान दिया। इंग्लैंड के गेंदबाज टीड पीट ने धारदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट चटकाए और कंगारू टीम को बैकफुट पर धकेल दिया। जवाब में मेजबान इंग्लैंड ने मैराथन बल्लेबाजी करते हुए 184.1 ओवरों में 379 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इंग्लैंड के मध्यक्रम के बल्लेबाज ऐलन स्टील ने 148 रनों की शानदार शतकीय पारी खेलकर मैच का रुख बदल दिया। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज जोय पॉल्मर ने भी हिम्मत दिखाते हुए 75 ओवर गेंदबाजी की और 6 विकेट झटके, लेकिन तब तक इंग्लैंड 150 रनों की मजबूत बढ़त हासिल कर चुका था।
दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई टीम दबाव नहीं झेल सकी और महज 145 रनों पर ढेर हो गई। इस पारी में इंग्लैंड के जॉर्ज उल्येट ने कातिलाना गेंदबाजी करते हुए 7 विकेट अपने नाम किए। तीन मैचों की इस टेस्ट सीरीज का यह दूसरा मुकाबला था, जिसे जीतकर इंग्लैंड ने सीरीज अपने नाम की, क्योंकि पहला और आखिरी मैच ड्रॉ रहा था।
यह मैच खेल भावना की एक अनूठी मिसाल के लिए भी अमर हो गया। मैच के दौरान इंग्लैंड का एक खिलाड़ी चोटिल हो गया, जिसके बाद उनकी जगह फील्डिंग करने के लिए खुद ऑस्ट्रेलियाई कप्तान बिली मर्डोक मैदान पर उतरे। कमाल की बात यह रही कि मर्डोक ने सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में अपनी ही टीम के बल्लेबाज टुप स्कॉट का कैच लपक लिया। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी विरोधी कप्तान ने अपनी ही टीम के खिलाड़ी को आउट करने में मदद की हो।
भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच 25 जून 1932 को लॉर्ड्स के मैदान में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। ये मैच इंग्लैंड ने 158 रन से जीता था।
1960: दुनिया को आज मिली थीं पहली महिला प्रधानमंत्री
21 जुलाई 1960 का दिन विश्व राजनीति के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गया। इसी दिन सीलोन (वर्तमान श्रीलंका) में सिरिमावो भंडारनायके ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने रूढ़ियों को तोड़कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने का एक नया मार्ग प्रशस्त किया।
17 अप्रैल 1916 को श्रीलंका के एक समृद्ध परिवार में जन्मीं सिरिमावो का जीवन साल 1940 में फ्रीडम पार्टी के नेता एस.डब्ल्यू.आर.डी. भंडारनायके से विवाह के बाद पूरी तरह बदल गया। विवाह के अगले ही साल वे देश की सबसे बड़ी महिला संस्था ‘लंका महिला समिति’ में शामिल हुईं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो गईं।
सिरिमावो ने 1952 के संसदीय चुनावों में अपने पति के लिए पूरे देश में घूम-घूमकर धुआंधार प्रचार किया। हालांकि, उस चुनाव में फ्रीडम पार्टी केवल 9 सीटें ही जीत सकी, लेकिन उनके पति संसद पहुंचे और विपक्ष के नेता बने। पति की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए, मई 1960 में सिरिमावो को सर्वसम्मति से फ्रीडम पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। उनके कुशल नेतृत्व में 1960 के आम चुनावों में पार्टी को प्रचंड जीत मिली और 21 जुलाई 1960 को भंडारनायके ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
देश-विदेश में 21 जुलाई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
356 ईसा पूर्व: हेरोस्ट्रेटस ने अपनी पहचान इतिहास में दर्ज कराने के लिए प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यों में शामिल आर्टिमिस के मंदिर की छत में आग लगा दी थी।
1773: पोप क्लेमेन्स XIV ने कैथोलिक चर्च की सबसे प्रभावशाली और सक्रिय संस्था, सोसाइटी ऑफ जीसस पर प्रतिबन्ध लगाया।
1831: बेल्जियम ने नीदरलैंड से स्वतंत्रता हासिल की और लियोपोल्ड प्रथम राजा बने।
1947: भारत की संविधान सभा ने तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में आधिकारिक स्वीकृति दी। स्वतंत्र भारत का यही ध्वज 15 अगस्त 1947 से राष्ट्रध्वज बना
1962: लद्दाख की चिप चाप घाटी में चीनी सेना ने पहली बार भारतीय सेना के गश्ती दल पर गोलीबारी की। यह घटना 1962 के पूर्ण युद्ध के मुख्य कारणों और पूर्व चेतावनी में से एक मानी जाती है।
1963: काशी विद्यापीठ को विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया।
1970: मिस्र में असवान हाई डैम पूरा किया गया।
1977: नीलम संजीव रेड्डी भारत के 6वें राष्ट्रपति चुने गए।
1983: रूस में अंटार्कटिका के वोस्टोक स्टेशन पर तापमान माइनस 89.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। धरती के किसी हिस्से पर ये अब तक का सबसे कम तापमान है।
1988: इंडियन नेशनल सैटेलाइट (INSAT-1C) लॉन्च किया गया, जिसने दूरसंचार और प्रसारण सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2007: वांशिगटन में चार दिनों तक चले विचार-विमर्श के बाद भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का प्रारूप तैयार किया गया।
2007: हैरी पॉटर सीरिज की आखिरी किताब ‘हैरी पॉटर एंड द डेवली हैलोज’ जारी की गई।
2007: प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं।
2008: नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारतीय मूल के रामबरन यादव को नेपाल का पहला राष्ट्रपति चुना गया।
2011: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के स्पेस शटल कार्यक्रम का अंतिम मिशन (STS-135, Atlantis) सफलतापूर्वक समाप्त हुआ।
2013: बेल्जियम के महाराज अल्बर्ट द्वितीय ने बेटे फिलिप की ताजपोशी के लिए राजगद्दी छोड़ी।
2022: द्रौपदी मुर्मू ने भारत की 15वें राष्ट्रपति के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और प्रतिभा पाटिल के बाद देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बनीं। उनका आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह 25 जुलाई 2022 को हुआ था।
21 जुलाई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1816: जूलियस राइटर– अंगरेजी समाचार एजेंसी राइटर के संस्थापक।
1911: उमाशंकर जोशी– ज्ञानपीठ पुरस्कार सम्मानित और प्रसिद्ध गुजराती साहित्यकार।
1930: आनंद बख़्शी– हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध लेखक और गीतकार। उन्होंने फिल्मों के लिए 3 हजार से भी ज्यादा गाने लिखे।
1934: चंदू बोर्डे – भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी।
1940: शंकरसिंह वाघेला – भारतीय राजनीतिज्ञ, गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।
1942: मल्लिकार्जुन खड़गे – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
1947: चेतन चौहान – भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी।
1951: रॉबिन विलियम्स – अमेरिकी हास्य अभिनेता।
1985: संग्राम सिंह- मशहूर भारतीय पेशेवर पहलवान, और टीवी हस्ती।
1993: संदेश झिंगन- भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के मजबूत डिफेंडर और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित खिलाड़ी।
21 जुलाई को हुए प्रमुख निधन
1906: व्योमेश चन्द्र बनर्जी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष।
1920: शारदा देवी (शारदा माँ)- श्री रामकृष्ण परमहंस की धर्मपत्नी एवं आध्यात्मिक उत्तराधिकारी।
1972: जिग्मे दोरजी वांग्चुक – भूटान के तीसरे राजा।
1995: सज्जाद हुसैन – भारतीय हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार थे।
2001: शिवाजी गणेशन – प्रसिद्ध तमिल अभिनेता।
2009: गंगूबाई हंगल – ‘भारतीय शास्त्रीय संगीत’ की प्रसिद्ध गायिका।
21 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
नेशनल जंक फूड डे
हर साल 21 जुलाई को दुनिया भर में ‘नेशनल जंक फूड डे’ (National Junk Food Day) मनाया जाता है। इस दिन लोग अपनी फिटनेस या डाइट की चिंता किए बिना बर्गर, पिज्जा, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे अपने पसंदीदा स्वादिष्ट स्नैक्स का बिना किसी गिल्ट के लुत्फ़ उठाते हैं।
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हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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