08 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 220वां दिन (लीप वर्ष में 221वां दिन) है। साल में अभी और 145 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 08 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 08 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
84 साल पहले हुई उस भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत, जिसने अंग्रेजों को हिन्दुस्तान को आजादी देने के लिए मजबूर किया
यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस सबसे निर्णायक और अंतिम महान जन-आंदोलन की है, जिसने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाकर रख दी थी। यह वह ऐतिहासिक मोड़ था जिसने यह साफ कर दिया था कि अब भारत पर विदेशियों का राज ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकता।

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रिटिश फौजों को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था और जापान मित्र देशों पर हावी होता जा रहा था। इस नाजुक स्थिति को देखते हुए मित्र देशों ने ब्रिटेन पर दबाव बनाया कि वह युद्ध में भारतीयों का सक्रिय समर्थन हासिल करने के लिए कोई ठोस पहल करे। दरअसल, ब्रिटेन ने बिना किसी भारतीय नेता या संस्था से मशविरा किए भारत को इस युद्ध में झोंक दिया था, जिससे कांग्रेस और ब्रिटिश सरकार के बीच गहरा गतिरोध पैदा हो गया था। इसी कड़वाहट को दूर करने के लिए मार्च 1942 में ब्रिटिश संसद के सदस्य सर स्टेफर्ड क्रिप्स को भारत भेजा गया, जिसे ‘क्रिप्स मिशन’ कहा जाता है। लेकिन इस मिशन के अधिकांश प्रस्ताव भारतीयों के हितों के खिलाफ थे, जिसके कारण यह पूरी तरह असफल रहा।
क्रिप्स मिशन के फ्लॉप होने के बाद कांग्रेस कमेटी ने 08 अगस्त 1942 को मुंबई के ऐतिहासिक गोवालिया टैंक मैदान में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। इस बैठक में एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें साफ कहा गया कि भारत की पूर्ण संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए अब ब्रिटिश शासन को देश से उखाड़ फेंकना बेहद जरूरी हो गया है। इसी सभा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देशवासियों को ‘करो या मरो’ का अमर नारा दिया, जिसका सीधा मतलब था कि इस आंदोलन के जरिए या तो हम देश को आजाद कराएंगे या फिर आजादी की वेदी पर अपनी जान न्योछावर कर देंगे। यह नारा देखते ही देखते हर भारतीय की जुबान और रगों में देशभक्ति का लहू बनकर दौड़ गया और इसी के साथ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की औपचारिक शुरुआत हुई।
आंदोलन की भनक लगते ही ब्रिटिश सरकार बौखला गई और उसने अगले ही दिन यानी 9 अगस्त की सुबह कांग्रेस के लगभग सभी शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। सरकार ने कांग्रेस पार्टी को अवैध घोषित करते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया और महात्मा गांधी को पुणे के आगा खान पैलेस में नजरबंद कर दिया। सरकार को लगा था कि नेतृत्व विहीन होने के बाद आंदोलन दम तोड़ देगा, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। शीर्ष नेताओं के जेल जाते ही देश की आम जनता ने खुद इस आंदोलन की कमान संभाल ली और पूरे देश में अभूतपूर्व हड़तालें और उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए।
कारखानों में काम करने वाले मजदूरों ने काम ठप कर दिया। ब्रिटिश हुकूमत ने इस जन-उबाल को दबाने के लिए क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए बड़े पैमाने पर दमन चक्र चलाया, जिससे भारतीयों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। कई जगहों पर आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया, जहां आक्रोशित जनता ने सरकारी संपत्तियों को फूंक दिया, रेलवे पटरियों को उखाड़ फेंका और कई स्थानों पर आम नागरिकों की पुलिस के साथ सीधी भिड़ंत हुई।
यद्यपि ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के तुरंत बाद भारत को आजादी नहीं मिल सकी, लेकिन इस राष्ट्रव्यापी क्रांति ने ब्रिटिश सरकार को यह भली-भांति समझा दिया था कि अब भारतीयों को गुलाम बनाकर रखना मुमकिन नहीं है और उन्हें भारत की आजादी पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यही वजह है कि इतिहास में इस आंदोलन को “भारत की आजादी का अंतिम महान प्रयास” भी कहा जाता है, जिसकी परिणति अंततः 15 अगस्त 1947 को देश की पूर्ण स्वतंत्रता के रूप में हुई।
1876: थॉमस अल्वा एडिसन को मिला ‘मिमियोग्राफ’ का पेटेंट, जिसने रखी आधुनिक फोटोकॉपी मशीन की नींव
दुनिया को बिजली का बल्ब और ग्रामोफोन जैसी महान खोजें देने वाले महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन के नाम 1 हजार से भी ज्यादा पेटेंट दर्ज हैं। आज ही के दिन यानी 08 अगस्त 1876 को एडिसन के नाम एक और क्रांतिकारी आविष्कार का पेटेंट दर्ज हुआ था, जिसे ‘मिमियोग्राफ’ कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह आज के दौर की आधुनिक फोटोकॉपी (ज़ेरॉक्स) मशीन का सबसे शुरुआती रूप था।

साल 1850 के आसपास थॉमस एडिसन प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी को बेहतर और सुलभ बनाने के काम में जुट गए थे। इस दौरान उन्होंने इलेक्ट्रिक पेन और हेक्टोग्राफ जैसी मशीनों का निर्माण भी किया था। लेकिन उस समय सबसे बड़ी समस्या यह आ रही थी कि प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान कागजों में छेद हो जाते थे, जिससे स्याही रिसकर नीचे रखे अन्य पेजों पर भी छप जाती थी और पूरा काम खराब हो जाता था। इसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए एडिसन ने अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाए और मिमियोग्राफ का आविष्कार किया।
मिमियोग्राफ की कार्यप्रणाली अपने समय के हिसाब से बेहद अनूठी और व्यावहारिक थी। इसमें मोम (वैक्स) से बने एक खास ‘मास्टर पेज’ का इस्तेमाल किया जाता था, जिस पर शब्द उभरे हुए होते थे। इस मास्टर पेज को एक इंक रोलर पर रोल किया जाता था। जब यह रोलर इंक पैड पर घूमता था, तो मास्टर पेज पर उभरे हुए शब्दों में स्याही लग जाती थी। इसके बाद जब प्रिंटिंग पेपर इस मशीन से होकर गुजरता था, तो वह स्याही कागज पर हूबहू छप जाती थी।
एडिसन द्वारा बनाए गए इस मिमियोग्राफ में दो ऐसे कमाल के फीचर्स थे जिन्होंने इसे बेहद लोकप्रिय बना दिया। पहला फीचर यह था कि यदि प्रिंटिंग के दौरान मास्टर पेज पर कोई गलती हो जाती थी, तो उसमें सुधार करना संभव था। इसके लिए मास्टर पेज पर एक स्पेशल फ्लूइड लगाया जाता था जिससे सुधार किया जा सके। दूसरा खास फीचर इसमें दिया गया ‘हैंड स्टाइलस’ था, जिसकी मदद से केवल अक्षर ही नहीं, बल्कि किसी के हस्ताक्षर और चित्र भी आसानी से प्रिंट किए जा सकते थे।
यह तकनीक न केवल क्रांतिकारी थी बल्कि बेहद किफायती भी थी। इसके एक सिंगल मास्टर पेज से 5 हजार तक प्रिंट निकाले जा सकते थे और काम पूरा होने के बाद उस मास्टर पेज को दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता था। समय और जरूरत के हिसाब से इस मशीन में कई महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए। इसके शुरुआती मॉडल्स को पूरी तरह हाथ से (मैनुअली) चलाया जाता था, लेकिन जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ी, बाद के मॉडल्स में हाथ की जगह इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया जाने लगा जिससे प्रिंटिंग की रफ्तार काफी बढ़ गई।
1908: जब विल्बर राइट ने फ्रांस के आसमान में भरी उड़ान, दुनिया ने माना राइट ब्रदर्स का लोहा
17 दिसंबर 1903 का वह ऐतिहासिक दिन तो पूरी दुनिया को याद है, जब राइट ब्रदर्स ने पहली बार सफलतापूर्वक अपने विमान से आसमान की उड़ान भरी थी। उस समय 12 सेकेंड की उस उड़ान में उन्होंने 120 फीट की ऊंचाई को छुआ था, जिसने समूची मानव सभ्यता के लिए आसमान में उड़ने का सपना हकीकत में बदल दिया था। लेकिन इस अद्भुत कामयाबी के बाद भी एक ऐसा दौर आया जब दुनिया ने उनके इस बड़े कारनामे पर भरोसा करने से साफ इनकार कर दिया था।

राइट ब्रदर्स की इस शुरुआती सफलता के बाद दुनिया भर के देशों में विमान बनाने और उड़ाने की प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ने लगी। आश्चर्य की बात यह थी कि कई यूरोपीय देशों ने तो राइट ब्रदर्स के इस ऐतिहासिक दावे पर यकीन करने से ही मना कर दिया था। इस अविश्वास में फ्रांस सबसे आगे खड़ा था। फ्रांस ने खुलेआम यह दावा कर दिया कि साल 1906 में वह पहली बार सार्वजनिक तौर पर पूरी दुनिया के सामने विमान को उड़ाकर दिखाएगा और वही असली विजेता होगा।
अपने ऊपर उठ रहे इन सवालों और आलोचनाओं का जवाब देने के लिए राइट ब्रदर्स ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि वे किसी बंद जगह पर नहीं, बल्कि आम लोगों के भारी हुजूम के बीच सार्वजनिक रूप से विमान उड़ाकर संशय दूर करेंगे। इसी कड़ी में 08 अगस्त 1908 को विल्बर राइट ने फ्रांस की धरती पर ही अपने विमान से आसमान में उड़ान भरी। वे 1 मिनट 45 सेकेंड तक हवा में तैरते रहे और उनके इस हैरतअंगेज प्रदर्शन ने वहां मौजूद सभी आलोचकों का मुंह हमेशा के लिए बंद कर दिया। इस सार्वजनिक प्रदर्शन ने पूरी दुनिया को यकीन दिला दिया कि इंसान ने सच में आसमान पर फतह पा ली है।
इस सफल सार्वजनिक प्रदर्शन के बाद राइट ब्रदर्स की लोकप्रियता रातों-रात सातवें आसमान पर पहुंच गई और वे पूरे यूरोप में बेहद प्रसिद्ध हो गए। लोगों का हुजूम उनकी एक झलक और उड़ते हुए विमान को देखने के लिए उमड़ पड़ता था। अपने इस दबदबे को बरकरार रखते हुए, अगले एक साल के भीतर दोनों भाइयों ने पूरे यूरोप का दौरा किया और आम जनता के सामने 200 से भी ज्यादा बार अपने विमान को सफलतापूर्वक उड़ाकर विमानन इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया।
देश-विदेश में 08 अगस्त को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1509: महाराज कृष्णदेव राय की विजय नगर सम्राज्य के सम्राट के रूप में ताजपोशी हुई। उनके शासनकाल को दक्षिण भारत के इतिहास में राजनीतिक शक्ति, सैन्य विजय और कला-साहित्य के स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है।
1771: इंग्लैंड के हॉर्शम में पहला शहरी क्रिकेट मैच खेला गया था। यह मैच केंट और सरे की टीमों के बीच हुआ था, जिसने आधुनिक क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित किया।
1786: अमेरिकी कांग्रेस ने चांदी के डॉलर और मुद्रा के लिए दशमलव प्रणाली को स्वीकार किया।
1864: जेनेवा में रेड क्रॉस की स्थापना हुई।
1899: ए.टी. मार्शल ने रेफ्रीजरेटर का पेटेंट कराया।
1919: रावलपिंडी संधि के तहत ब्रिटेन ने अफगानिस्तान की आजादी को मान्यता दी।
1947: पाकिस्तान ने अपने राष्ट्रीय ध्वज को मंजूरी दी।
1945: द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ ने जापान के खिलाफ आधिकारिक रूप से युद्ध की घोषणा की और अगले दिन मंचूरिया पर आक्रमण कर दिया। यह कदम ठीक अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने (6 अगस्त) के दो दिन बाद और नागासाकी पर बम गिराए जाने (9 अगस्त) से एक दिन पहले उठाया गया था, जिससे जापान का आत्मसमर्पण तय हो गया।
1945: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और सोवियत संघ ने लंदन एग्रीमेंट पर साइन किए। दुनियाभर के वॉर क्रिमिनल्स पर ट्रायल चलाने के लिए ये एंग्रीमेंट किया गया था।
1949: भारत और भूटान के बीच ऐतिहासिक मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
1959: ताइवान में आई विनाशकारी बाढ़ से 667 लोगों की मौत हुई।
1963: ग्लासगो से लंदन जा रही रॉयल मेल ट्रेन को हथियारबंद लुटेरों ने लूट लिया। लुटेरों ने 2.6 मिलियन यूरो की राशि लूटी। ब्रिटेन में इसे द ग्रेट ट्रेन रॉबरी कहा जाता है।
1967: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (ASEAN) की आधिकारिक स्थापना की गई थी। इस बैठक में पांच देशों (इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड) के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया था, जिन्हें ASEAN का संस्थापक सदस्य माना जाता है।
1991: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तरी और दक्षिण कोरिया की सदस्यता को मंजूरी दी।
2004: जापान ने चीन को पराजित करके एशिया कप फ़ुटबाल जीता। यह जापान का तीसरा एशियन कप था।
2008: चीन के बीजिंग में ओलिंपिक खेलों की शुरुआत हुई।
2010: तिब्बत के गंसू प्रांत में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से 1,400 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई तथा लगभग 2000 लोग लापता हो गए।
2010: भारत की तेजस्विनी सावंत म्युनिख ने जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित विश्व निशानेबाजी प्रतियोगिता की 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा और यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह प्रथम भारतीय महिला बनीं।
2023: हवाई (अमेरिका) के माउ द्वीप (विशेष रूप से ऐतिहासिक शहर लहाइना) में भीषण और विनाशकारी जंगल की आग भड़क उठी। इस आपदा में 100 से अधिक लोगों की मौत हुई और ऐतिहासिक शहर पूरी तरह खाक हो गया, जिसे अमेरिका के पिछले 100 वर्षों के इतिहास की सबसे भीषण जंगल की आग माना गया।
08 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1904: त्रिभुवन नारायण सिंह – उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री।
1908: सिद्धेश्वरी देवी – भारत की प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायिका। वे मुख्य रूप से ‘ठुमरी’ कला की मल्लिका के रूप में जानी जाती थीं और उन्हें पद्म श्री से नवाजा गया था।
1915: भीष्म साहनी – भारत के प्रसिद्ध हिंदी लेखक, नाटककार और अनुवादक। उनके कालजयी उपन्यास ‘तमस’ (जो भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर आधारित है) के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
1940: डेनिस टीटो – प्रथम अंतरिक्ष पर्यटक। उन्होने 28 अप्रैल से 6 मई 2006 के बीच अंतरिक्ष में रहकर किर्तिमान स्थापित किया।
1948: श्वेतलाना सेवित्स्काया – अंतरिक्ष में दो बार उड़ान भरने वाली विश्व की पहली महिला।
1981: रोजर फेडरर -स्विट्जरलैंड के महानतम टेनिस खिलाड़ी और 20 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता, जिन्हें खेल के इतिहास के सबसे गरिमापूर्ण एथलीटों में गिना जाता है।
08 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
117 (ई. पू.): ट्राजन – रोमन सम्राट। वे रोमन साम्राज्य के सबसे प्रभावशाली सम्राटों में गिने जाते हैं और उनके शासनकाल में रोमन साम्राज्य अपने सबसे बड़े क्षेत्रफल तक पहुंचा।
2000: एस. निजलिंगप्पा – भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (1968-1969) और आधुनिक कर्नाटक राज्य के निर्माता (प्रथम मुख्यमंत्री)।
2024: बुद्धदेव भट्टाचार्य– पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री। वे 2000 से 2011 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे।
08 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
अगस्त क्रांति दिवस

यह भारत के इतिहास का एक अत्यंत गौरवशाली दिन है। 08 अगस्त 1942 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का शिलान्यास किया था। इसी दिन उन्होंने देशवासियों को प्रसिद्ध नारा “करो या मरो” (Do or Die) दिया था। हर साल इस दिन को ‘अगस्त क्रांति दिवस’ के रूप में मनाकर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय बिल्ली दिवस

अंतरराष्ट्रीय बिल्ली दिवस (International Cat Day) हर साल 8 अगस्त को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2002 में ‘अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण कोष’ (IFAW) द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बिल्लियों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और उनकी देखरेख के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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