HP School Board Result Action: वाह! हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने क्या गजब का ‘मास्टरस्ट्रोक’ मारा है। अब स्कूलों में लगातार खराब रिजल्ट देने वाले गुरुजी लोगों की सालाना इन्क्रीमेंट पर कैंची चलेगी। सिर्फ कैंची ही नहीं चलेगी, बल्कि उनकी पवित्र ‘सर्विस बुक’ में लाल स्याही से बाकायदा एक ‘लव लेटर’ भी दर्ज किया जाएगा, जो उनके करियर की शोभा बढ़ाएगा।
पिछली बार तो विभाग ने “सुधर जाओ भाई” कहकर सिर्फ चेतावनी की एक हल्की सी थपकी देकर छोड़ दिया था। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग पूरे ‘सिंघम’ मूड में है। मार्च 2026 के बोर्ड परीक्षा परिणाम आते ही विभाग ने सीधे 10वीं और 12वीं के डेटा का ऐसा पोस्टमार्टम शुरू किया है कि प्रिंसिपलों, हेडमास्टरों और प्रवक्ताओं के माथे पर पसीना आ गया है।
सोचने वाली बात है: अब तक हमारे समाज में एक ही नियम था—बच्चा पढ़े या न पढ़े, रील बनाए या पबजी खेले, फेल होने पर कॉलर हमेशा शिक्षक का ही पकड़ा जाता था। अब विभाग ने इस पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।
अब गुरुजी क्लास में कबीर के दोहे पढ़ाएं या न पढ़ाएं, लेकिन सुबह-शाम ईश्वर से एक ही प्रार्थना करेंगे: “हे प्रभु! मुझे सद्बुद्धि भले मत दे, लेकिन मेरी क्लास के पप्पू को पास होने लायक नंबर जरूर दे देना।” आखिर मामला सीधे जेब से जो जुड़ गया है! अब शिक्षक महोदय बच्चों को सिर्फ पढ़ाएंगे नहीं, बल्कि परीक्षा के दिनों में उनके आगे-पीछे ग्लूकोज की बोतल लेकर घूमेंगे कि कहीं कोई छात्र बीमार होकर रिजल्ट खराब न कर दे।
देखा जाए तो यह विभाग की बेहतरीन दूरदर्शिता है। जब तक शिक्षक की जेब पर आंच नहीं आएगी, तब तक वे चमत्कारी जड़ी-बूटी कैसे खोजेंगे जिससे बिना पढ़े भी बच्चा मेरिट में आ जाए? अब देखना यह है कि इस ‘इन्क्रीमेंट रोको आंदोलन’ के बाद हिमाचल के सरकारी स्कूलों का रिजल्ट 100% आता है या फिर शिक्षक अपनी रुकी हुई इन्क्रीमेंट का दुख मनाने के लिए सामूहिक ‘शोक सभा’ आयोजित करते हैं। खैर, जो भी हो, गुरुजी… अब ‘चाक और डस्टर’ छोड़िए, और प्रार्थना का वॉल्यूम बढ़ाइए!
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