10 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 222वां दिन (लीप वर्ष में 223वां दिन) है। साल में अभी और 143 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 10 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 10 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
अंतरिक्ष में दूल्हा तो टेक्सास में थी दुल्हन, जानिए 10 अगस्त 2003 को हुई इतिहास की सबसे अनोखी शादी की पूरी कहानी
आज के दौर में आपने डेस्टिनेशन वेडिंग, विंटेज स्टाइल वेडिंग या क्रूज वेडिंग के बारे में तो खूब सुना होगा, लेकिन इतिहास में आज का दिन एक बेहद अजीब और अनूठी शादी के लिए याद किया जाता है। 10 अगस्त 2003 को रूस के एस्ट्रोनॉट यूरी मालेन्चेंको ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में रहते हुए शादी रचाई थी। ऐसा अनोखा कारनामा करने वाले वे दुनिया के पहले और इकलौते इंसान हैं।

इस अनोखी प्रेम कहानी की शुरुआत अप्रैल 2003 में हुई थी। 12 अप्रैल 1961 को रूस के यूरी गागरिन अंतरिक्ष में कदम रखने वाले दुनिया के पहले इंसान बने थे, और उनकी इसी ऐतिहासिक उपलब्धि की वर्षगांठ पर साल 2003 में एक शानदार पार्टी का आयोजन किया गया था। इसी पार्टी में कॉस्मोनॉट यूरी मालेन्चेंको अपनी प्रेमिका कैटरीना दमित्रिएव से आखिरी बार मिले थे।
इसके तुरंत बाद, अप्रैल 2003 में रूस ने ‘एक्सपेडिशन-7’ मिशन लॉन्च किया, जिसकी कमान यूरी मालेन्चेंको को सौंपी गई थी और उनके साथ एडवर्ड लू भी अंतरिक्ष रवाना हुए थे।
यह अंतरिक्ष मिशन अगस्त के पहले हफ्ते में पूरा होना था। मिशन से वापस लौटते ही यूरी और कैटरीना शादी के बंधन में बंधने वाले थे, और उनकी शादी की तारीख पहले ही 10 अगस्त तय की जा चुकी थी। हालांकि, तकनीकी वजहों से उनके इस मिशन की अवधि को बढ़ाकर अक्टूबर तक कर दिया गया।
चूंकि शादी की सभी तैयारियां पहले ही पूरी हो चुकी थीं और मेहमानों को आमंत्रण भेजा जा चुका था, इसलिए यूरी मालेन्चेंको ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया कि वे अपनी तय तारीख पर अंतरिक्ष से ही वीडियो लिंक के जरिए अपनी प्रेमिका से शादी करेंगे।

यूरी के इस फैसले के आगे सबसे बड़ी कानूनी अड़चन खड़ी हो गई। रूसी कानून के मुताबिक शादी के समय दूल्हा और दुल्हन दोनों का शारीरिक रूप से मौजूद होना अनिवार्य था, जिससे रूस में यह शादी मुमकिन नहीं थी। लेकिन अच्छी बात यह रही कि कैटरीना काफी समय से अमेरिका के टेक्सास शहर में रह रही थीं, और टेक्सास के स्थानीय कानून में ऐसी व्यवस्था थी कि शादी के समय दूल्हा-दुल्हन दोनों का एक साथ वहां होना जरूरी नहीं था।
दूसरी तरफ, रूसी और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसियों ने भी इस शादी पर सख्त ऐतराज जताया। नासा ने तर्क दिया कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन करोड़ों डॉलर का एक वैज्ञानिक प्लेटफॉर्म है और इसका इस्तेमाल इस तरह के निजी आयोजनों के लिए नहीं किया जा सकता। हालांकि, तब तक यह खबर पूरी दुनिया के मीडिया में फैल चुकी थी और आम लोग इस ‘स्पेस वेडिंग’ को लेकर बेहद उत्साहित थे। जनभावनाओं और मीडिया के भारी दबाव के आगे आखिरकार नासा को भी झुकना पड़ा और शादी की इजाजत देनी पड़ी।
इजाजत मिलने के बाद शादी की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हुईं और तय हुआ कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शादी की तमाम रस्में पूरी की जाएंगी। चूंकि यूरी शादी समारोह में खुद उपस्थित नहीं हो सकते थे, इसलिए टेक्सास में शादी स्थल पर उनका एक आदमकद (लाइफ-साइज) कार्डबोर्ड कटआउट लगाया गया। कैटरीना ने सफेद रंग का खूबसूरत वेडिंग गाउन पहना और दूल्हे के इसी कटआउट के साथ शादी की सभी रस्में पूरी कीं।
उधर अंतरिक्ष में, यूरी ने भी अपने स्टैंडर्ड स्पेस सूट के ऊपर बाकायदा टाई पहनी। यह पूरी शादी करीब 25 मिनट तक चली वीडियो कॉल के जरिए संपन्न हुई, और अंतरिक्ष में गूंजती तालियों के साथ दोनों हमेशा के लिए एक-दूसरे के हो गए।
इस तरह अंतरिक्ष में रहते हुए दुनिया की पहली ‘स्पेस वेडिंग’ संपन्न हुई। यह इतिहास की पहली और आखिरी शादी भी साबित हुई, क्योंकि इस अनोखी घटना के तुरंत बाद नासा और दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों ने कड़े नियम बनाते हुए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का इस्तेमाल शादी या किसी भी तरह के व्यक्तिगत आयोजनों के लिए करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
1966: पहले अमेरिकी मून सैटेलाइट की लॉन्चिंग, जब नासा के 68 किलो के कोडक कैमरे ने बदलकर रख दिया था अंतरिक्ष इतिहास
अंतरिक्ष की दुनिया में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चल रही ‘स्पेस रेस’ के दौर में 10 अगस्त का दिन बेहद ऐतिहासिक माना जाता है। आज ही के दिन यानी 10 अगस्त 1966 को नासा ने अपना ऐतिहासिक स्पेसक्राफ्ट ‘लूनर ऑर्बिटर-1’ सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। चंद्रमा की कक्षा में चक्कर लगाने और अध्ययन करने वाला यह दुनिया का पहला अमेरिकी स्पेसक्राफ्ट बना, जिसने दुनिया भर के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

1960 के दशक की शुरुआत में अमेरिका ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘अपोलो मिशन’ की घोषणा की थी, जिसका मुख्य मकसद पहली बार किसी इंसान को सुरक्षित रूप से चांद की सतह पर उतारना था। लेकिन वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि उनके पास चंद्रमा की सतह की सटीक और हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें मौजूद नहीं थीं। इंसानों को चांद पर उतारने के लिए सुरक्षित ‘लैंडिंग साइट्स’ की पहचान करना बेहद जरूरी था।
इसी चुनौती से निपटने के लिए नासा ने विशेष रूप से 3 ‘लूनर ऑर्बिटर’ स्पेसक्राफ्ट तैयार किए। प्रत्येक स्पेसक्राफ्ट को बहुत आधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया था, जिसमें एक मेन इंजन, 4 सोलर पैनल्स और करीब 68 किलोग्राम वजनी विशेष ‘कोडक इमेजिंग सिस्टम’ (Kodak Imaging System) फिट किया गया था। इस सिस्टम का मुख्य काम अलग-अलग एंगल से चंद्रमा की सतह के कोने-कोने की तस्वीरें लेना था।
योजना के मुताबिक 10 अगस्त 1966 को तीनों में से पहला स्पेसक्राफ्ट ‘लूनर ऑर्बिटर-1’ अंतरिक्ष की ओर रवाना किया गया। यह लॉन्चिंग पूरी तरह से सफल रही और स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा की कक्षा में पहुंचकर अपना काम शुरू कर दिया। 28 अगस्त तक इस स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा की सतह की कुल 205 अद्भुत और स्पष्ट तस्वीरें धरती पर भेजीं, जिनका विश्लेषण करके वैज्ञानिकों ने भविष्य के अपोलो अभियानों के लिए सुरक्षित उतरने की जगहें तय कीं।
इस मिशन की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि 23 अगस्त 1966 को दर्ज हुई, जब ‘लूनर ऑर्बिटर-1’ ने चंद्रमा के ऑर्बिट में घूमते हुए पृथ्वी की एक अद्भुत तस्वीर खींची। यह मानव इतिहास में पहली बार था जब चांद की कक्षा से धरती की कोई तस्वीर ली गई थी। अंतरिक्ष के काले कैनवास पर चमकती हुई हमारी धरती की इस पहली ऐतिहासिक तस्वीर ने पूरी दुनिया को रोमांचित कर दिया था और नासा के नाम स्पेस रेस में एक और बड़ी कामयाबी दर्ज करा दी थी।
10 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1628: स्वीडन का विशाल युद्धपोत Vasa अपनी पहली समुद्री यात्रा के दौरान स्टॉकहोम बंदरगाह में डूब गया। जहाज लगभग 1,300 मीटर ही चला था। इस दुर्घटना में जहाज पर सवार लगभग 30 लोगों की मौत हो गई थी। 333 साल तक समुद्र के तल पर रहने के बाद, इसे 1961 में सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। वर्तमान में यह स्टॉकहोम के Vasa Museum में रखा गया है और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध समुद्री आकर्षणों में से एक है।
1675: इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय ने लंदन में रॉयल ग्रीनविच ऑब्जर्वेटरी (Royal Greenwich Observatory) की आधारशिला रखी। यहीं से दुनिया भर का समय (GMT) तय हुआ।
1787: तुर्की ने रूस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। यह युद्ध क्रीमिया पर नियंत्रण और ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर लड़ा गया था।
1793: पेरिस के प्रसिद्ध लूवर म्यूजियम को सार्वजनिक तौर पर शुरू किया गया। 200 साल पुराने पश्चिमी कला इतिहास इस संग्रहालय में दर्ज है और इनमें से एक है मोनालीसा।
1809: इक्वाडोर ने स्पेन से स्वतंत्रता हासिल की।
1822: सीरिया में आये विनाशकारी भूकंप से 20,000 लोगों की मौत हुई।
1831: कैरेबियाई द्वीप समूह बारबाडोस में चक्रवाती तूफान से डेढ़ हजार लोगों की मौत हुई और भारी मात्रा में संपत्ति का नुकसान हुआ।
1962: मार्वल कॉमिक्स की ‘अमेजिंग फैंटेसी’ बुक में बच्चों के चहेता स्पाइडर-मैन पहली बार दुनिया के सामने आया था।
1945: द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में जापान के आत्मसमर्पण के बाद, कोरियाई प्रायद्वीप को 38वीं समानांतर रेखा के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया था। उत्तरी भाग पर सोवियत संघ (रूस) की सेना का और दक्षिणी भाग पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण स्थापित हुआ, जिससे आगे चलकर शीत युद्ध के कारण उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का स्थाई विभाजन हुआ।
1979: श्रीहरिकोटा से भारत के पहले प्रायोगिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (SLV-3) की पहली उड़ान का प्रक्षेपण किया गया था। रोहिणी टेक्नोलॉजी पेलोड ले जाने वाला यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण आंशिक रूप से सफल रहा था, जिससे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को भविष्य के सफल अभियानों के लिए अमूल्य तकनीकी अनुभव मिला।
2000: संसद ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी दी थी, जिससे भारत के नए पहाड़ी राज्य ‘उत्तरांचल’ (अब उत्तराखंड) के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
2006: श्रीलंका के जाफना प्रायद्वीप में तमिल विद्रोहियों (LTTE) के खिलाफ श्रीलंकाई सेना की सैन्य कार्रवाई के दौरान एक राहत शिविर और स्थानीय क्षेत्रों पर हुई गोलाबारी में लगभग 50 नागरिक मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे।
2008: चेन्नई के एक लैब में एंटी एड्स बैक्सीन का सफल परीक्षण किया गया।
2010: गाजा शहर के अल-दाराज जिले में अल-ताबाई स्कूल पर हुए इजरायली हवाई हमले में 100 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए थे। आईडीएफ ने दावा किया कि स्कूल का इस्तेमाल हमास कमांड सेंटर के रूप में हो रहा था, जबकि स्थानीय अधिकारियों के अनुसार वहां विस्थापित नागरिक शरण लिए हुए थे।
2010: ISRO और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित उपग्रह-आधारित संवर्द्धन प्रणाली गगन (GAGAN) का सफल परीक्षण किया था। इससे खराब मौसम में भी विमानों की लैंडिंग सुरक्षित और आसान होती है।
10 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1860: विष्णुनारायण भातखंडे – ‘हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत’ के विद्वान। उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नया जीवन देने दिया।
1894: वी. वी. गिरि (वाराहगिरि वेंकट गिरि)– भारत के चौथे राष्ट्रपति (1969 से 1974), स्वतंत्रता सेनानी और महान श्रम नेता। वे देश के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति थे जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते थे। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया गया था।
1909: लियो फेंडर – प्रसिद्ध अमेरिकी आविष्कारक जिन्होंने फेंडर इलेक्ट्रिक गिटार (जैसे स्ट्रैटोकास्टर और टेलीकास्टर) का आविष्कार किया, जिसने आधुनिक रॉक और पॉप संगीत की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया।
1963: फूलन देवी– भारतीय इतिहास में ‘बैंडिट क्वीन’ के नाम से चर्चित डाकू, जिन्होंने बाद में आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा की राजनीति में आकर मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से लोकसभा सांसद चुनी गईं।
1986: सौरव घोषाल – भारत के सबसे सफल और शीर्ष अंतरराष्ट्रीय स्क्वाश (Squash) खिलाड़ियों में से एक। उन्होंने कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में भारत के लिए कई पदक जीते हैं।
1975: हेमन्त सोरेन – झारखंड के 5वें और वर्तमान (2024 – अब तक) मुख्यमंत्री।
10 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1942: विनोद किनारीवाला– भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के युवा सेनानी, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अहमदाबाद में तिरंगा फहराने का प्रयास किया और ब्रिटिश पुलिस की गोलीबारी में शहीद हो गए। मृत्यु समय उनकी आयु केवल 18 वर्ष थी।
1977: श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’– झण्डा गीत ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ के रचयिता, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, पत्रकार और समाजसेवी।
1980: सरस्वती देवी (वास्तविक नाम खुर्शीद मिनोखर होमजी) – भारत की पहली महिला संगीतकार। उन्होंने ‘अछूत कन्या’, ‘बंधन’ और ‘नया संसार’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया।
1980: आग़ा मुहम्मद याह्या ख़ान– पाकिस्तान के तीसरे राष्ट्रपति (1969-1971) 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में हार और बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद उन्होंने 20 दिसंबर 1971 को इस्तीफा दे दिया था।
1986: जनरल अरुण कुमार श्रीधर वैद्य – भारतीय सेना के 13वें थल सेनाध्यक्ष। वर्ष 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के दौरान वे भारतीय सेना के प्रमुख थे। 10 अगस्त 1986 को सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद पुणे में आतंकवादियों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। उन्हें उनकी वीरता के लिए दो बार ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था।
1995: हरिशंकर परसाई– हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार और लेखक, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक विसंगतियों, भ्रष्टाचार तथा पाखंड पर तीखे प्रहार किए। उनकी चर्चित कृति ‘विकलांग श्रद्धा का दौर’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
1999: आचार्य बलदेव उपाध्याय – जिन्हें पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान, लेखक और शिक्षक, जिन्होंने संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
2018: अनंत बजाज – बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक। उन्हें भारत में विद्युत उपकरणों और घरेलू उपकरणों के क्षेत्र में आईओटी (IoT) और डिजिटल बदलाव की शुरुआत करने वाले एक दूरदर्शी और नवप्रवर्तक उद्योगपति के रूप में जाना जाता है।
2021: बालाजी ताम्बे – भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य योग विशेषज्ञ और आध्यात्मिक गुरु। वे भारत के सबसे बड़े आयुर्वेदिक उपचार केंद्र, आत्मसंतुलना विलेज के संस्थापक हैं।
2024: नटवर सिंह – भारत के पूर्व विदेश मंत्री (2004-2005), राजनयिक, लेखक।
10 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
आज वर्ल्ड बायो फ्यूल डे
दुनियाभर में हर साल 10 अगस्त को विश्व जैव ईंधन दिवस (World Biofuel Day) मनाया जाता है। दुनियाभर में बायो फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए इसकी शुरुआत हुई। बायो फ्यूल यानी स्टार्च, शुगर और वेजिटेबल ऑयल के फर्मेन्टेशन से बनने वाला फ्यूल। ये सस्ता होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है।
फिलहाल पेट्रोलियम प्रोडक्ट में भी एक निश्चित अनुपात में बायो फ्यूल को मिक्स किया जाता है। भारत सरकार बायो फ्यूल को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाओं पर काम कर रही है। साल 2018 में सरकार ने बायोफ्यूल्स को लेकर एक नेशनल पॉलिसी को भी मंजूरी दी। इस पॉलिसी का लक्ष्य 2030 तक पेट्रोल में 20% और डीजल में 5% तक बायो फ्यूल के इस्तेमाल को बढ़ाना है।
साथ ही सरकार ने बायो फ्यूल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की है। इससे किसानों को फायदा होगा। साल 2015 में सबसे पहले पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। हर साल अलग-अलग थीम पर इस दिन को मनाया जाता है।
विश्व शेर दिवस
शेरों (Lions) के संरक्षण, उनकी घटती वैश्विक आबादी और उनके प्राकृतिक आवासों (Habitats) को बचाने के प्रति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता लाने के लिए हर साल 10 अगस्त को विश्व शेर दिवस (World Lion Day) मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2013 में ‘बिग कैट इनिशिएटिव’ और नेशनल जियोग्राफिक के वन्यजीव संरक्षणवादियों द्वारा की गई थी। यह दिन वन्यजीव प्रेमियों को शेरों के अवैध शिकार और उनके पारिस्थितिकी तंत्र में महत्व के प्रति सचेत करता है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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