11 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 223वां दिन (लीप वर्ष में 224वां दिन) है। साल में अभी और 142 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 11 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 11 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1908: हाथ में ‘गीता’ थामे हंसते-हंसते देश के सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस ने चूमा था फांसी का फंदा, महज 18 साल 8 महीने और 8 दिन की उम्र में हुए थे शहीद
यह कहानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस सबसे युवा और जांबाज महानायक की है, जिसकी शहादत ने देश के करोड़ों युवाओं की रगों में देशभक्ति का उबाल ला दिया था। मात्र 18 साल की उम्र में जब आम युवा अपने भविष्य के ताने-बाने बुनते हैं, तब इस वीर सपूत ने देश की माटी के लिए फांसी के फंदे को चूमकर इतिहास रच दिया था।

कोलकाता (तब कलकत्ता) में तैनात चीफ प्रेसिडेंसी जज किंग्सफोर्ड अपनी क्रूरता के लिए कुख्यात था। वह पूरे बंगाल में भारतीय क्रांतिकारियों को बेहद अमानवीय और कठोर सजाएं देने के लिए जाना जाता था। उसकी इसी निर्दयता के कारण वह भारतीय क्रांतिकारियों की आंखों की किरकिरी बन चुका था और उन्होंने किंग्सफोर्ड को सजा-ए-मौत देने का फैसला कर लिया। इस बीच ब्रिटिश हुकूमत को भी भनक लग गई कि किंग्सफोर्ड की जान को खतरा है, जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से उसका तबादला कोलकाता से बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कर दिया गया।
किंग्सफोर्ड को ठिकाने लगाने की यह बेहद खतरनाक जिम्मेदारी दो युवा क्रांतिकारियों को सौंपी गई- खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी। दोनों क्रांतिकारी किंग्सफोर्ड के पीछे-पीछे मुजफ्फरपुर पहुंच गए और वहां रहकर उसकी दिनचर्या की बारीकी से रेकी करने लगे। रेकी के दौरान उन्होंने देखा कि जज किंग्सफोर्ड रोजाना शाम को मुजफ्फरपुर के यूरोपियन क्लब जाता था और वहां से एक बग्घी में सवार होकर वापस निकलता था। दोनों ने योजना बनाई कि जैसे ही किंग्सफोर्ड क्लब से बाहर निकलेगा, उसकी बग्घी पर बम फेंककर उसे विस्फोट से उड़ा दिया जाएगा।

योजना को अंजाम देने के लिए 30 अप्रैल 1908 का दिन तय हुआ। दोनों वीर क्रांतिकारी हाथ में बम थामे क्लब के बाहर घात लगाकर बैठ गए। नियत समय पर क्लब से एक बग्घी बाहर निकली और दोनों ने बिना एक पल गंवाए अचूक निशाने के साथ उस पर बम फेंक दिया। एक जोरदार धमाका हुआ और बग्घी के परखच्चे उड़ गए।
लेकिन किस्मत से उस दिन उस बग्घी में जज किंग्सफोर्ड सवार नहीं था, बल्कि उसमें दो यूरोपीय महिलाएं बैठी हुई थीं। इस धमाके में उन दोनों महिलाओं की मौत हो गई और किंग्सफोर्ड को मारने का प्लान अधूरा रह गया। इस भीषण धमाके के बाद मुजफ्फरपुर में हड़कंप मच गया और दोनों क्रांतिकारी वहां से तुरंत भाग निकले।
पुलिस के बड़े सर्च ऑपरेशन से बचने के लिए दोनों क्रांतिकारियों ने अलग-अलग दिशाओं में भागने का फैसला किया। प्रफुल्ल चाकी किसी तरह समस्तीपुर पहुंचे और एक रेलगाड़ी में सवार हो गए। लेकिन बदकिस्मती से उसी ट्रेन में पुलिस का एक सब-इंस्पेक्टर भी सफर कर रहा था, जिसने चाकी को पहचान लिया और तुरंत अगले स्टेशन की पुलिस को गुप्त सूचना दे दी। जैसे ही ट्रेन अगले स्टेशन पर रुकी, पुलिस की भारी फौज चाकी को पकड़ने के लिए तैयार खड़ी थी। प्रफुल्ल चाकी ने घेरा तोड़कर भागने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन जब उन्होंने खुद को चारों तरफ से घिरा हुआ पाया, तो अंग्रेजों के हाथ आने के बजाय उन्होंने अपनी ही पिस्तौल से खुद को गोली मार ली और देश पर कुर्बान हो गए।
दूसरी तरफ, खुदीराम बोस लगातार भागते हुए वैनी पूसा रोड स्टेशन तक पहुंच गए, जहां पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद खुदीराम बोस पर ब्रिटिश अदालत में मुकदमा चलाया गया। अंधी और बहरी अंग्रेज सरकार इस कदर डरी हुई थी कि उसने महज 8 दिनों के भीतर ही मुकदमे की सुनवाई पूरी कर दी।
13 जुलाई 1908 को अदालत का क्रूर फैसला आया, जिसमें खुदीराम बोस को सीधे फांसी की सजा सुनाई गई। इस एकतरफा फैसले के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में अपील भी दायर की गई, लेकिन वहां के जज ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा।आखिरकार, फांसी की तारीख तय हुई 11 अगस्त 1908…।
1908 को आज ही के दिन यह महान युवा क्रांतिकारी अपने हाथों में पवित्र ग्रंथ ‘गीता’ लेकर, एक सच्चे और वीर भारतीय की तरह निडर होकर फांसी के तख्त पर चढ़ गया। जब जल्लाद ने उनके गले में फंदा डाला, तब उनके चेहरे पर मौत या फांसी का रत्ती भर भी खौफ नहीं था, बल्कि एक मंद मुस्कान थी।
मात्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन की सबसे छोटी उम्र में शहीद होने वाले खुदीराम बोस की इस शहादत ने पूरे देश के युवाओं में स्वतंत्रता की एक ऐसी नई अलख जगा दी, जिसने आगे चलकर ब्रिटिश साम्राज्य को जड़ से उखाड़ फेंका।
1988: आज ही के दिन लादेन और जवाहिरी ने मिलकर रखी थी दुनिया के सबसे कुख्यात आतंकी संगठन ‘अल-कायदा’ की नींव, जिसने आगे चलकर अमेरिका को दहलाया

11 सितंबर 2001 का वह काला दिन पूरी दुनिया कभी नहीं भूल सकती, जब अमेरिका में एक भीषण आतंकी हमला हुआ और 2,500 से भी ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान चली गई। अमेरिकी इतिहास के इस सबसे खौफनाक हमले के पीछे जिस आतंकी संगठन का नाम सामने आया, वह था ‘अल-कायदा’। इस कुख्यात संगठन के औपचारिक गठन की कहानी आज ही के दिन यानी 11 अगस्त 1988 से जुड़ी हुई है, जब पाकिस्तान के पेशावर में एक खुफिया बैठक के बाद इस तबाही के नेटवर्क की शुरुआत हुई थी।
अल-कायदा के गठन की पटकथा वैसे तो 1970 के दशक में ही लिखी जाने लगी थी। उस दौरान अफगानिस्तान की कम्युनिस्ट सरकार और एंटी-कम्युनिस्ट गुरिल्ला लड़ाकों के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा था। अप्रैल 1978 में मोहम्मद दाउद खान के नेतृत्व में चल रही अफगान सरकार का तख्तापलट कर दिया गया और खल्क व परचम पार्टी सत्ता में आ गईं। इस नई सरकार ने सोवियत संघ के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए और स्थानीय विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन छेड़ दिया। जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो साल 1979 में सोवियत संघ ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए अपनी सेना अफगानिस्तान भेज दी।
सोवियत सेना के आने के बाद अफगानिस्तान के स्थानीय लड़ाके और ज्यादा संगठित होने लगे, जिन्हें ‘मुजाहिदीन’ कहा जाता था। इन लड़ाकों को सोवियत संघ के खिलाफ खड़ा करने, उन्हें भारी मात्रा में पैसा, आधुनिक हथियार और नए लड़ाके मुहैया कराने का काम सऊदी अरब का ओसामा बिन लादेन और फिलिस्तीन का अब्दुल्ला यूसुफ आजम मिलकर कर रहे थे।
कई सालों तक सोवियत सेना के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध लड़ने के बाद, 11 अगस्त 1988 को पाकिस्तान के पेशावर शहर में एक बेहद सीक्रेट और महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। इस बैठक में ओसामा बिन लादेन, मिस्र का आयमान-अल-जवाहिरी और अल फद्ल एक साथ बैठे। इसी बैठक में दुनिया भर में जिहाद फैलाने के उद्देश्य से एक औपचारिक और अनुशासित संगठन बनाने का फैसला लिया गया, जिसे ‘अल-कायदा’ नाम दिया गया।
इसके ठीक अगले साल, यानी 1989 में सोवियत संघ को हार मानकर अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलानी पड़ी। इसी साल एक रहस्यमयी बम विस्फोट में अब्दुल्ला यूसुफ आजम भी मारा गया, जिसके बाद पूरे अल-कायदा नेटवर्क पर ओसामा बिन लादेन का एकछत्र नियंत्रण स्थापित हो गया।
सत्ता पूरी तरह हाथ में आते ही ओसामा बिन लादेन ने अल-कायदा के खतरनाक मंसूबों को वैश्विक स्तर पर फैलाना शुरू किया। धीरे-धीरे इस संगठन ने यमन, केन्या और तंजानिया जैसे कई देशों में अपने स्लीपर सेल्स और मजबूत नेटवर्क स्थापित कर लिए। 9/11 के बड़े हमले को अंजाम देने से पहले भी अल-कायदा ने अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी सेना और दूतावासों को निशाना बनाकर कई घातक हमले किए, जिसने अंततः 21वीं सदी की शुरुआत में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
11 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1347: अलाउद्दीन हसन गंगू (जफर खान) ने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के खिलाफ दक्कन क्षेत्र में विद्रोह कर स्वतंत्र बहमनी साम्राज्य की नींव रखी और ‘अलाउद्दीन बहमन शाह’ की उपाधि के साथ राजसी सत्ता हासिल की।
1876: अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने कनाडा के ब्रैंटफोर्ड से पेरिस (ओंटारियो) तक दुनिया की पहली लंबी दूरी की एकतरफा स्पष्ट फोन कॉल की थी। यह ऐतिहासिक कॉल संचार तकनीक के इतिहास में एक बड़ा बदलाव साबित हुई।
1928: अमेरिकी व्यवसायी वाल्टर डीमर (Walter Diemer) द्वारा विकसित दुनिया की पहली सफल बबल गम ‘डबल बबल’ को पेटेंट मिला।
1942: महात्मा गांधी द्वारा ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के आह्वान के पर अंग्रेजों की तत्कालीन ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला में प्रजामंडल कार्यकर्ताओं और छात्रों ने ब्रिटिश प्रतिबंधों के बावजूद व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और प्रभात फेरियां निकाली।
1960: मध्य अफ्रीकी देश चाड ने फ्रांस से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई। इस दिन को चाड में राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
1961: दादर नगर हवेली का भारत में विलय हुआ और इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
1962: सोवियत संघ ने वोस्टोक-3 स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च किया। इसमें सवार एंड्रीयन निकोलायेव ने 4 दिन के भीतर 64 बार धरती की परिक्रमा की थी। ऐसा करने वाले वे पहले अंतरिक्ष यात्री हैं।
1979: गुजरात के मोरबी में लगातार मूसलाधार बारिश के चलते मच्छू-2 बांध टूटने से आई भयानक जल प्रलय से 15 मिनट में ही पूरा जिला तबाह हो गया, हजारों लोगों (आधिकारिक और अनौपचारिक अनुमानों के मुताबिक 1,800 से लेकर 25,000 तक) की जान गई। हजारों मवेशी भी इस जलप्रलय में मारे गए। इसे भारत के इतिहास की सबसे बड़ी बांध आपदाओं में गिना जाता है।
1999: सदी का अंतिम पूर्ण चंद्रग्रहण यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में करोड़ों लोगों ने देखा। इसी दिन सदी का आखिरी पूर्ण सूर्यग्रहण भी यूरोप में दिखाई दिया था, जिससे यह खगोलीय दृष्टि से एक ऐतिहासिक हफ्ता बन गया था।
2004: भारत और पाकिस्तान ने वांछित अपराधियों की सूचियों की अदला-बदली की। यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाਲ करने और आतंकवाद से जुड़ी जानकारी साझा करने की प्रक्रिया का हिस्सा था।
2007: मोहम्मद हामिद अंसारी भारत के 12वें उपराष्ट्रपति बने।
2008: भारतीय शूटर अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलिंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में गोल्ड जीता। किसी भी इंडिविजुअल इवेंट में भारत को मिला ये पहला गोल्ड है।
2012: उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरेज़ और अहार क्षेत्र में 6.4 और 6.3 तीव्रता के दो लगातार विनाशकारी भूकंप आए, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई और हजारों लोग घायल हुए।
2021: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में निगुलसरी के पास नेशनल हाईवे-5 पर हुए भीषण भूस्खलन से चट्टानों के नीचे एक एचआरटीसी बस समेत कई वाहन दब गए थे, जिसमें 28 लोगों की मौत हुई।
2021: संसद ने 127वां संविधान संशोधन विधेयक, 2021 (बाद में 105वां संविधान संशोधन अधिनियम) सर्वसम्मति से पारित किया। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी खुद की OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) सूची तैयार करने का संवैधानिक अधिकार वापस दे दिया गया।
2022: जगदीप धनखड़ ने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
2023: संसद में सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरी क्षेत्र के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने वाले संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2023 पर विधायी मुहर लगी।
2023: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में अंग्रेजों के ज़माने के आपराधिक कानूनों को बदलने के लिए 3 ऐतिहासिक विधेयक भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 – IPC (1860) के स्थान पर, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 – CrPC (1973) के स्थान पर, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 – Indian Evidence Act (1872) के स्थान पर पेश किए। इसके साथ ही राजद्रोह (Sedition – 124A) की औपनिवेशिक धारा को खत्म कर देशद्रोही कृत्यों के खिलाफ सख्त नए प्रावधान प्रस्तावित किए गए।
2024: फ्रांस की राजधानी पेरिस में 33वें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का समापन हुआ। भारत ने इस ओलंपिक अभियान को कुल 6 पदक (1 रजत, 5 कांस्य) जीते।
2026: लोकसभा में केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ (Keralam) करने का विधेयक पारित हुआ।
2026: दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया के पश्चिमी क्षेत्रों में भीषण भूकंप से 110 से अधिक लोगों की मौत हो गई और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।
11 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1924: डॉ. लालमणि मिश्र – भारतीय शास्त्रीय संगीत (हिन्दुस्तानी संगीत) के प्रकांड विद्वान, प्रसिद्ध विचित्र वीणा वादक और संगीतकार। उन्होंने भारतीय संगीत शिक्षा और वाद्य यंत्रों के शोध में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1937: निर्देशक जॉन अब्राहम – प्रसिद्ध मलयाली भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और लघु कथाकार थे। उन्होंने भारतीय स्वतंत्र सिनेमा में ‘जन सिनेमा’ आंदोलन की शुरुआत की।
1937: हृदयनाथ मंगेशकर– भारत के सुप्रसिद्ध संगीतकार। वे स्वर कोकिला लता मंगेशकर और आशा भोसले के छोटे भाई हैं। उन्हें शास्त्रीय और सुगम संगीत में अद्वितीय योगदान के लिए ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया है।
1943: परवेज़ मुशर्रफ – पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख। उन्होंने 1999 में सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता संभाली थी और 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के 10वें राष्ट्रपति के रूप में शासन किया।
1949: डी. सुब्बाराव – भारतीय रिज़र्व बैंक के 22वें गवर्नर।
1950: स्टीव वोज़नियाक – प्रसिद्ध अमेरिकी कंप्यूटर विज्ञानी। उन्होंने 1976 में स्टीव जॉब्स के साथ मिलकर Apple की स्थापना की।
1954: यशपाल शर्मा – भारतीय क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के प्रमुख बल्लेबाज, जिन्होंने भारत के लिए 37 टेस्ट और 42 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
1961: सुनील शेट्टी – भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता, निर्माता और उद्यमी। उन्होंने अपने तीन दशक लंबे करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है।
1974: अंजू जैन – भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान।
11 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1967: नंददुलारे वाजपेयी – हिन्दी के प्रसिद्ध पत्रकार, समीक्षक, साहित्यकार, आलोचक तथा सम्पादक थे।
2000: उषा मेहता – भारतीय स्वतंत्रता सेनानी। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भूमिगत गुप्त कांग्रेस रेडियो चलाकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संदेश प्रसारित किए।
2004: चेन चुनशियान – चीनी कम्प्यूटर उद्योग के पितामह का।
2018: वी.एस. नायपॉल (विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल) – नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय मूल के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी साहित्यकार।
2020: राहत इंदौरी – प्रसिद्ध उर्दू शायर और गीतकार।
2023: बिकाश सिन्हा – भारत के प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक और भौतिक विज्ञानी, जिन्होंने परमाणु भौतिकी तथा उच्च ऊर्जा भौतिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स तथा भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के निदेशक रहे।
2026: एम.पी. परमेश्वरन– भारत के प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक, लेखक और ‘केरल शास्त्र साहित्य परिषद’ के प्रमुख स्तंभ।
11 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
राष्ट्रीय बेटा और बेटी दिवस (National Son and Daughter Day)

यह मुख्य रूप से अमेरिका और कुछ अन्य देशों में मनाया जाने वाला एक अनौपचारिक लेकिन लोकप्रिय पारिवारिक अवसर है। इसका उद्देश्य माता-पिता और बच्चों के बीच के रिश्ते को मजबूत करना तथा व्यस्त जीवन से समय निकालकर बच्चों के साथ समय बिताना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
बाहरी कड़ियां
विकिपीडिया
bharatdiscovery.org
Posted By: Himachal News
Himachal News की ताजा खबरों और वीडियो अपडेट्स के लिए हमारे Himachal News को फॉलो और YouTube चैनल Himachal News TV को Subscribe करें।
| जनवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| फरवरी | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 |
| मार्च | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अप्रैल | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| मई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| जून | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| जुलाई | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| अगस्त | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| सितंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| अक्टूबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |
| नवंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 |
| दिसंबर | 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 |



