14 June 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप आज यानी 14 जून 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
14 june 2026 Ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक सम्वत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम सम्वत: 2083 (सिद्धार्थि)
तिथि: ज्येष्ठ (अधिकमास) माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि (सायं 05:22 बजे तक, तत्पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ)
नक्षत्र: कृत्तिका (सुबह 05:12 बजे तक, तत्पश्चात रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ)
योग: धृति (रात 09:12 बजे तक, तत्पश्चात शूल योग प्रारंभ)
करण: शकुनि (सुबह 05:43 बजे तक), फिर चतुष्पाद (सायं 05:22 बजे तक), तदुपरान्त नाग करण प्रारंभ।
दिन: रविवार
प्रविष्टे: 31 ज्येष्ठ
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:23 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:19 बजे
चन्द्रोदय: रात 04:18 बजे (15 जून की तड़के)
चन्द्रास्त: सायं 06:16 बजे
चन्द्र राशि: चंद्रमा पूरे दिन और रात अपनी उच्च राशि वृषभ में संचार करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य वृष राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:49 से 04:36 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 से 03:36 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:19 से 07:41 बजे तक।
अमृत काल: रात 02:24 से 04:02 बजे तक (15 जून की तड़के)।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सायं 05:35 से 07:19 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 12:21 से 02:06 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सायं 05:28 से 06:23 बजे तक।
भद्रा / विष्टि: आज भद्रा का साया नहीं है।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
आज ज्येष्ठ मास (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सायं 05:22 बजे तक है और इसके बाद अमावस्या तिथि लग जाएगी। आज ज्येष्ठ अधिकमास की ‘अमावस्या’ का पावन योग बन रहा है। चूंकि यह रविवार का दिन है, इसलिए इसे ‘रवि अमवस्या’ या ‘भानु अमावस्या’ भी कहा जाता है। यह दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध कर्म और मानसिक शांति के उपायों के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। आज चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में सूर्य देव के साथ गोचर कर रहे हैं, जिससे ‘अमावस्या’ के दिन सूर्य-चंद्र की यह युति कुशाग्र बुद्धिमत्ता और आत्मबल को बढ़ाने वाली है। आज सुबह से चंद्रमा के प्रिय और शुभ फलदायी ‘रोहिणी’ नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो कला, ऐश्वर्य और स्थिरता के लिए विशेष फलदायी है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज रविवार का दिन है (जो प्रत्यक्ष देवता सूर्य नारायण को समर्पित है) और साथ ही अधिकमास की अमावस्या का पावन योग है, अतः जीवन में मान-सम्मान, आरोग्य और पितृदोष से मुक्ति के लिए आज ये विशेष उपाय करें:
सूर्य देव को अर्घ्य और गायत्री मंत्र: आज सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे में शुद्ध जल, लाल चंदन, कुमकुम और लाल फूल डालकर उगते हुए सूर्य देव को ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र के साथ अर्घ्य दें। इसके बाद वहीं खड़े होकर 21 बार गायत्री मंत्र का जाप करें। इससे राजकार्य में सफलता मिलती है।
पितरों के निमित्त तर्पण और दीपदान: अमावस्या तिथि होने के कारण आज दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से जल में काले तिल और गंगाजल मिलाकर तर्पण करें। शाम के समय घर के दक्षिण कोने में एक दीपक (सरसों के तेल का) पितरों के निमित्त जलाएं, इससे पितृदोष और गृहक्लेश शांत होते हैं।
अन्न और वस्त्र का दान: कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत करने, मान-सम्मान में वृद्धि और दरिद्रता दूर करने के लिए आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को गेहूं, तांबा, गुड़, लाल कपड़ा या धार्मिक पुस्तकों का दान करें।
सावधानी: आज रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहता है। यदि पश्चिम दिशा की यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो आज सुबह घर से निकलने से पहले थोड़ा सा दलिया या घी खाकर ही प्रस्थान करें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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